अगर आपके पास 10 लाख रुपये की एकमुश्त रकम है और आप उससे नियमित आय चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक विकल्प हो सकता है। FD की ब्याज दर के आधार पर 10 लाख रुपये पर हर महीने करीब 5,000 रुपये से 6,667 रुपये तक ब्याज मिल सकता है। 6% ब्याज पर मासिक आय 5,000 रुपये और 8% पर करीब 6,667 रुपये होगी।
10 लाख की FD पर ब्याज से कितनी होगी मासिक कमाई?
FD से मिलने वाली मासिक आय सीधे बैंक की ब्याज दर पर निर्भर करती है। अलग-अलग बैंक और अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दरें अलग हो सकती हैं।
एसबीआई और एचडीएफसी जैसे बड़े बैंकों में कई अवधियों पर करीब 6 से 6.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और जाना स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे छोटे बैंकों में चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दर 7 से 8 प्रतिशत तक पहुंच रही है।
6% ब्याज पर हर महीने 5,000 रुपये
मान लीजिए 10 लाख रुपये की FD पर आपको 6 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है। इस दर से एक साल में करीब 60,000 रुपये ब्याज बनेगा।
अगर ब्याज का भुगतान हर महीने लिया जाता है, तो यह रकम करीब 5,000 रुपये प्रति माह होगी।
6.5% ब्याज पर मिलेंगे 5,417 रुपये
10 लाख रुपये पर 6.5 प्रतिशत की ब्याज दर से सालाना ब्याज 65,000 रुपये होगा। इसे मासिक भुगतान के हिसाब से देखें तो हर महीने करीब 5,417 रुपये मिलेंगे।
7% ब्याज पर मासिक कमाई 5,833 रुपये
अगर FD पर ब्याज दर 7 प्रतिशत है, तो 10 लाख रुपये पर सालाना ब्याज 70,000 रुपये बनेगा। इस हिसाब से हर महीने करीब 5,833 रुपये की आय होगी।
7.5% ब्याज पर 6,250 रुपये महीना
7.5 प्रतिशत ब्याज दर मिलने पर 10 लाख रुपये की FD से सालाना ब्याज 75,000 रुपये होगा। मासिक भुगतान के हिसाब से यह रकम करीब 6,250 रुपये बैठती है।
8% ब्याज पर हर महीने करीब 6,667 रुपये
अगर किसी बैंक में 10 लाख रुपये की FD पर 8 प्रतिशत ब्याज मिलता है, तो सालाना ब्याज 80,000 रुपये होगा। ऐसे में हर महीने करीब 6,667 रुपये ब्याज के तौर पर मिल सकते हैं।
| FD ब्याज दर | सालाना ब्याज | अनुमानित मासिक ब्याज |
|---|---|---|
| 6% | 60,000 रुपये | 5,000 रुपये |
| 6.5% | 65,000 रुपये | 5,417 रुपये |
| 7% | 70,000 रुपये | 5,833 रुपये |
| 7.5% | 75,000 रुपये | 6,250 रुपये |
| 8% | 80,000 रुपये | 6,667 रुपये |
ये आंकड़े साधारण सालाना ब्याज के आधार पर निकाले गए हैं।
हर महीने इनकम चाहिए तो किस तरह की FD चुनें?
अगर FD का उद्देश्य घर के खर्च के लिए नियमित रकम हासिल करना है, तो ऐसी FD चुननी होगी जिसमें ब्याज का भुगतान नियमित अंतराल पर किया जाता हो। इसमें जरूरत के अनुसार मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान का विकल्प चुना जा सकता है।
इसके विपरीत, क्युमुलेटिव FD में ब्याज बीच में नहीं मिलता। ब्याज मूल रकम में जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है। इसलिए नियमित मासिक आय के लिए नियमित ब्याज भुगतान वाला विकल्प जरूरी है।
FD तोड़ने और टैक्स से जुड़ी जरूरी बातें
अगर केवल ब्याज की रकम निकाली जाती है, तो 10 लाख रुपये की मूल रकम FD में बनी रह सकती है। ब्याज को नियमित आय के तौर पर लिया जा सकता है, जबकि मूल रकम मैच्योरिटी पर वापस मिलती है।
हालांकि, मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने पर बैंक के प्रीमैच्योर विड्रॉल नियम लागू हो सकते हैं। इसका असर मिलने वाले मुनाफे पर पड़ सकता है।
FD से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है। आपकी कुल आय के आधार पर टैक्स देनदारी तय होती है। इसलिए FD चुनते समय ब्याज दर के साथ टैक्स के बाद मिलने वाली वास्तविक रकम को भी ध्यान में रखना जरूरी है।


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