फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप की पहचान करने के तरीके जानें। URL, ऑफर, ऐप परमिशन और Google Play Protect से रहें सतर्क।
ऑनलाइन शॉपिंग के आकर्षक ऑफर और नए ऐप के चक्कर में आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। साइबर ठग नामी कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप के जरिए बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और दूसरी संवेदनशील जानकारियां चुराने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में किसी लिंक पर क्लिक करने या ऐप डाउनलोड करने से पहले URL, वेबसाइट की भाषा, ऑफर की कीमत, संपर्क विवरण, ऐप की परमिशन और रिव्यू की जांच करना जरूरी है।
ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए लिंक की जांच करना क्यों जरूरी है?
इंटरनेट पर खरीदारी करना और नए ऐप का इस्तेमाल करना आज आम बात है। कई बार किसी प्रोडक्ट पर भारी छूट देखकर लोग तुरंत ऑर्डर कर देते हैं। इसी तरह, उपयोगी दिखाई देने वाले ऐप को बिना उसकी विश्वसनीयता जांचे फोन में इंस्टॉल कर लिया जाता है। साइबर ठग लोगों की इसी जल्दबाजी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
कई बार ठग नामी कंपनियों की वेबसाइट से मिलते-जुलते वेब पेज तैयार कर लेते हैं। इन वेबसाइट का नाम, डिजाइन और दिखने का तरीका इतना मिलता-जुलता हो सकता है कि पहली नजर में असली और नकली के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाए। ऐसे ही कुछ मामलों में नकली ऐप के जरिए भी यूजर्स की निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
इसलिए इंटरनेट पर किसी अनजान लिंक से जुड़ने, भुगतान करने या नया ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है। कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देकर संदिग्ध वेबसाइट और ऐप को पहचानने में मदद मिल सकती है।
वेबसाइट का URL देखकर पहचानें असली और नकली लिंक
किसी वेबसाइट पर बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड या दूसरी निजी जानकारी दर्ज करने से पहले उसके URL को ध्यान से देखना चाहिए। साइबर ठग कई बार असली कंपनी के नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव करके या उसमें अतिरिक्त शब्द जोड़कर नकली लिंक बनाते हैं।
ऐसे लिंक पहली नजर में वास्तविक वेबसाइट जैसे लग सकते हैं। हालांकि, URL को ध्यान से देखने पर नाम या पते में अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी अनजान मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया पोस्ट में मिले लिंक पर बिना जांचे भरोसा नहीं करना चाहिए।
किसी कंपनी की वेबसाइट खोलने के लिए उसका आधिकारिक वेब एड्रेस खुद टाइप करना बेहतर विकल्प है। इसके अलावा, कंपनी के सत्यापित अकाउंट पर उपलब्ध लिंक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इससे गलत वेबसाइट पर पहुंचने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
वेबसाइट की भाषा और डिजाइन में दिखें ये गड़बड़ियां तो रहें सावधान
फर्जी वेबसाइट की पहचान करने के लिए उसके कंटेंट और डिजाइन पर भी ध्यान देना चाहिए। कई बार ऐसी साइट पर वर्तनी की गलतियां, असामान्य भाषा, धुंधली तस्वीरें या डिजाइन से जुड़ी खामियां देखने को मिलती हैं। ये संकेत बताते हैं कि वेबसाइट को तैयार करने में लापरवाही हुई हो सकती है।
हालांकि, केवल इन गलतियों के आधार पर किसी वेबसाइट को नकली घोषित नहीं किया जा सकता। इसी तरह, वेबसाइट का आकर्षक डिजाइन और पेशेवर दिखने वाला लेआउट भी उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। ठग वास्तविक कंपनियों की वेबसाइट से मिलता-जुलता डिजाइन तैयार कर सकते हैं।
इसलिए किसी वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले उसके URL, संपर्क जानकारी और दूसरे उपलब्ध विवरणों की भी जांच करनी चाहिए। केवल उसके बाहरी रूप को देखकर अपनी निजी जानकारी साझा करना उचित नहीं है।
बेहद सस्ते ऑफर के लालच में न करें जल्दबाजी
ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भारी छूट वाले ऑफर अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं। लेकिन अगर किसी महंगे स्मार्टफोन या दूसरे प्रोडक्ट की कीमत सामान्य से बहुत कम दिखाई दे, तो भुगतान करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
कुछ फर्जी वेबसाइट ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऐसे ऑफर दिखा सकती हैं, जिनकी कीमत पर आसानी से भरोसा करना मुश्किल हो। इनका मकसद लोगों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के लिए प्रेरित करना हो सकता है।
इसी तरह, 'अभी खरीदें', 'ऑफर कुछ ही मिनटों में खत्म' जैसे संदेशों या लगातार चलने वाले काउंटडाउन के दबाव में आकर पेमेंट नहीं करना चाहिए। खरीदारी से पहले संबंधित प्रोडक्ट की कीमत और ऑफर की जानकारी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें।
जल्दबाजी में लिया गया फैसला आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी वास्तविकता की पुष्टि करना जरूरी है।
कंपनी की संपर्क जानकारी की जांच करना न भूलें
किसी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचने के लिए उस पर दी गई कंपनी की संपर्क जानकारी भी देखनी चाहिए। आमतौर पर भरोसेमंद वेबसाइट पर कंपनी का पता, कस्टमर केयर नंबर या संपर्क करने का कोई अन्य माध्यम उपलब्ध होता है।
अगर वेबसाइट पर ऐसी जानकारी नहीं है या दिए गए विवरण अधूरे दिखाई देते हैं, तो सावधानी बरतनी चाहिए। केवल वेबसाइट पर कंपनी का नाम लिखा होने या ईमेल एड्रेस मौजूद होने से यह साबित नहीं होता कि वेबसाइट वास्तविक है।
इसलिए निजी जानकारी साझा करने या ऑनलाइन भुगतान करने से पहले वेबसाइट के उपलब्ध विवरणों को ध्यान से देखना चाहिए। किसी तरह का संदेह होने पर बिना जांच किए आगे बढ़ने से बचना बेहतर है।
नकली ऐप डाउनलोड करने से पहले इन बातों पर दें ध्यान
स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करते समय भी उतनी ही सावधानी जरूरी है, जितनी किसी वेबसाइट का इस्तेमाल करते समय बरती जाती है। कोई ऐप उपयोगी दिखाई दे रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि उसे बिना जांचे इंस्टॉल कर लेना चाहिए।
ऐप की विश्वसनीयता समझने के लिए उसकी परमिशन, रिव्यू, डाउनलोड की संख्या और उपलब्ध रहने की अवधि पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। इन जानकारियों से ऐप के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं, हालांकि इनमें से कोई एक जानकारी अपने आप में उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।
ऐप की परमिशन देखकर समझें वह कौन-सी जानकारी मांग रहा है
किसी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले यह देखना चाहिए कि वह फोन के किन फीचर्स और जानकारियों तक पहुंच मांग रहा है। ऐप की जरूरत और मांगी गई परमिशन के बीच संबंध समझना महत्वपूर्ण है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी शॉपिंग ऐप को कॉन्टैक्ट्स या कॉल लॉग तक पहुंचने की अनुमति चाहिए, तो यह समझना जरूरी है कि उसे इसकी आवश्यकता क्यों है। ऐप के काम से असंबंधित लगने वाली परमिशन को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करना चाहिए।
ऐप इंस्टॉल करते समय उसकी परमिशन पर ध्यान देने से अनावश्यक रूप से निजी जानकारी साझा करने के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
ऐप के रिव्यू और डाउनलोड की संख्या भी जांचें
नया ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके रिव्यू और रेटिंग पढ़ना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही यह देखना चाहिए कि ऐप को कितनी बार डाउनलोड किया गया है और वह कितने समय से उपलब्ध है।
हालांकि, केवल अच्छी रेटिंग या सकारात्मक टिप्पणियों के आधार पर किसी ऐप को सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। कुछ मामलों में रिव्यू नकली भी हो सकते हैं। इसलिए ऐप से जुड़ी सभी उपलब्ध जानकारियों को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
ऐप के बारे में संदेह होने पर उसे इंस्टॉल करने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। डाउनलोड की संख्या और रेटिंग को उसकी विश्वसनीयता जांचने के कई संकेतों में से एक के रूप में देखना चाहिए।
Android फोन में Google Play Protect रखें चालू
Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए Google Play Protect एक ऐसा फीचर है, जो संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप की जांच करने और उनके बारे में चेतावनी देने में मदद करता है।
इस फीचर को चालू रखने से संदिग्ध ऐप की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। इसलिए Android फोन में Google Play Protect की स्थिति जांचते रहना और ऐप डाउनलोड करते समय सावधानी बरतना जरूरी है।
हालांकि, केवल इस फीचर पर निर्भर रहने के बजाय ऐप की परमिशन, रिव्यू और अन्य उपलब्ध जानकारियों की भी जांच करनी चाहिए। किसी ऐप को फोन में इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता के बारे में पर्याप्त जानकारी जुटाना बेहतर रहता है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए सावधानी ही सबसे जरूरी
फर्जी वेबसाइट और नकली ऐप पहली नजर में वास्तविक सेवाओं जैसे दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में किसी लिंक पर क्लिक करने, ऑनलाइन भुगतान करने या ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है।
वेबसाइट का URL, भाषा, डिजाइन, कंपनी की संपर्क जानकारी और ऑफर की वास्तविकता पर ध्यान देने के साथ-साथ ऐप की परमिशन, रिव्यू और डाउनलोड की संख्या भी देखनी चाहिए। Android यूजर्स को Google Play Protect चालू रखने की सलाह दी जाती है।
ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान जल्दबाजी से बचना और बिना जांचे किसी वेबसाइट या ऐप पर भरोसा नहीं करना साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।


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