दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू। जानें PUC, पार्किंग शुल्क, निर्माण कार्य और GRAP के चारों चरणों में लागू होने वाली पाबंदियां।
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 244 के पार दर्ज होने के बाद प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए हैं। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने, पार्किंग शुल्क बढ़ाने और निर्माण कार्यों पर रोक जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली-NCR में क्यों लागू किया गया GRAP-1?
दिल्ली-NCR में ठंड की शुरुआत के साथ हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 से अधिक दर्ज किया गया है, जो खराब श्रेणी में आता है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन ने GRAP के पहले चरण के तहत नियंत्रण संबंधी उपाय लागू किए हैं।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया है कि कई वर्षों में पहली बार मौजूदा सीजन में इतनी देर से GRAP लागू किया गया है। इसके तहत वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और खुले में कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है GRAP और कौन करता है इसे लागू?
GRAP का पूरा नाम ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan) है। यह दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तैयार की गई व्यवस्था है। इसके अंतर्गत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के अनुसार अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध और नियंत्रण के उपाय लागू किए जाते हैं।
इस योजना का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने के साथ जरूरी कदम उठाना है। हवा की गुणवत्ता जितनी खराब होती जाती है, नियंत्रण के उपाय भी उतने ही सख्त किए जाते हैं। GRAP को लागू कराने की जिम्मेदारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की है।
CAQM ने 21 नवंबर 2025 को GRAP के शेड्यूल में बदलाव करते हुए कई उपायों को पहले के मुकाबले शुरुआती चरणों में शामिल किया था। इसके बाद स्टेज II के कई कदम स्टेज I में, स्टेज III के कई कदम स्टेज II में और स्टेज IV के कुछ कदम स्टेज III में शामिल किए गए। इसका उद्देश्य प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने से पहले ही रोकथाम के उपाय शुरू करना है।
GRAP-1 में क्या-क्या पाबंदियां लागू हैं?
GRAP का पहला चरण प्रदूषण को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इसमें सड़कों की मशीनी सफाई बढ़ाना, पानी का छिड़काव करना और निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करना शामिल है। इसके अलावा कचरे के उचित प्रबंधन और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की सख्त जांच पर भी जोर दिया जाता है।
इस चरण के तहत ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनाने और उद्योगों, बिजली संयंत्रों तथा ईंट भट्टों से निकलने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के उपाय भी किए जाते हैं। दिल्ली में निर्माण गतिविधियों से फैलने वाली धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों को नहीं मिलेगा ईंधन
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने का प्रावधान लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण रखना है।
PUC सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि वाहन का उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए अपने वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध रखना महत्वपूर्ण होगा।
दिल्ली में पार्किंग शुल्क बढ़ाने की तैयारी
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के तहत दिल्ली में पार्किंग शुल्क दोगुना करने की बात कही गई है। हालांकि, मेट्रो पार्किंग को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। पार्किंग शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उपायों में से एक है।
इसके साथ ही दिल्ली नगर निगम और सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में अंतर रखने तथा वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था शुरू करने की बात भी कही गई है। इससे सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम करने का प्रयास किया जाएगा।
निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक
पर्यावरण मंत्री के अनुसार, खुले में किए जाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक रहेगी। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट-स्प्रे यूनिट लगाई गई हैं। इनका इस्तेमाल हवा में मौजूद धूल के कणों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।
निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी रखने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) बनाया गया है। वहीं, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
GRAP-2 में कौन-से अतिरिक्त प्रतिबंध लगते हैं?
GRAP के दूसरे चरण में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय पहले चरण की तुलना में अधिक सख्त हो जाते हैं। इसमें सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय अलग-अलग करने जैसे कदम शामिल हैं। पार्किंग शुल्क बढ़ाने के उपाय भी इस चरण के अंतर्गत आते हैं।
इस दौरान आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर सेट बंद रखने के निर्देश दिए जाते हैं। निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान धूल को फैलने से रोकने के लिए जरूरी इंतजाम करना भी अनिवार्य होता है।
सड़कों की नियमित मशीनी सफाई, वैक्यूम क्लीनिंग और एंटी-स्मॉग गन से पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों और मेट्रो सेवाओं की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाती है।
इसके अलावा खुले में कचरा या बायोमास जलाने पर जुर्माना वसूला जाता है। इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण मजबूत करना है।
GRAP-3 लागू होने पर किन वाहनों और निर्माण कार्यों पर रोक लगती है?
GRAP का तीसरा चरण प्रदूषण की अधिक गंभीर स्थिति में लागू किया जाता है। इस दौरान गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के काम रोक दिए जाते हैं। इससे निर्माण गतिविधियों के कारण होने वाले धूल प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जाता है।
वाहनों के मामले में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल से चलने वाले चार पहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके अलावा गैर-जरूरी डीजल मध्यम मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर रोक लगती है।
अंतरराज्यीय डीजल बसों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लागू होता है, यदि वे CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
हालांकि, कुछ जरूरी परियोजनाओं को इससे छूट दी जाती है। मेट्रो, रेलवे, हवाई अड्डे, हाईवे, रक्षा, स्वास्थ्य और सफाई से संबंधित आवश्यक परियोजनाओं का काम जारी रह सकता है।
GRAP-4 में लागू होते हैं सबसे सख्त प्रतिबंध
GRAP का चौथा चरण सबसे सख्त स्तर माना जाता है। इस दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ संबंधी गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाते हैं। हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, बिजली की लाइन, पाइपलाइन और दूरसंचार जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़े निर्माण कार्य भी इसके दायरे में आते हैं।
दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर भी रोक लगाई जाती है। हालांकि, जरूरी सामान ले जाने वाले या आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले ट्रकों को छूट दी जाती है। CNG, LNG, इलेक्ट्रिक और BS-VI डीजल ट्रकों को भी चलने की अनुमति रहती है।
दिल्ली में पंजीकृत BS-IV और उससे नीचे के मानक वाले डीजल भारी मालवाहक वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है।
दिसंबर 2025 में GRAP-4 के दौरान सरकारी और अन्य कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का आदेश भी लागू किया गया था।
प्रदूषण रोकने के लिए आम लोगों को भी करना होगा सहयोग
GRAP के तहत आम नागरिकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील करता है।
इसके साथ ही खुले में कचरा या पत्तियां जलाने से बचने और डीजल जनरेटर का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासनिक कदमों के साथ नागरिकों का सहयोग भी जरूरी माना गया है।
दिल्ली-NCR में GRAP के अलग-अलग चरणों के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का दायरा वायु गुणवत्ता की स्थिति के अनुसार बढ़ता जाता है। संशोधित शेड्यूल के तहत कई उपाय पहले ही चरणों में शामिल किए गए हैं, ताकि प्रदूषण गंभीर होने से पहले उसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा सकें।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स
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