ताजा खबरें

5/National/ticker-posts

बड़ी खबरें

Recent/hot-post

भदोही का फिर बदलेगा नाम? 1994 से 2026 तक 5 बार बदली जिले की पहचान, जानिए पूरी कहानी


भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर करने की घोषणा हुई। जानिए 1994 से 2026 तक पांच बार कैसे बदली जिले की पहचान।

29 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की। इससे पहले 1994 में जिला बनने के बाद इसका नाम कई बार बदला जा चुका है। 1997 में भदोही से संत रविदास नगर, 1999 में संत रविदास नगर भदोही और 2014 में फिर भदोही नाम किया गया था।

1994 में भदोही बना अलग जनपद

भदोही लंबे समय तक वाराणसी जिले का हिस्सा रहा। क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग के बाद 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इसे अलग जनपद का दर्जा दिया। उस समय नए जिले का नाम भदोही रखा गया।

अलग जनपद बनने के बाद भदोही की प्रशासनिक पहचान स्वतंत्र जिले के रूप में स्थापित हुई। यह क्षेत्र अपने हस्तनिर्मित कालीनों के लिए भी जाना जाता है और दुनिया के प्रमुख कालीन उत्पादक क्षेत्रों में इसकी पहचान रही है।

1997 में मायावती सरकार ने बदला नाम

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जिले के नाम को लेकर पहला बड़ा बदलाव हुआ। 4 दिसंबर 1997 को मायावती सरकार ने भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया।

इस फैसले के बाद जिले की आधिकारिक पहचान संत रविदास के नाम से जुड़ गई। इसके साथ ही भदोही नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई।

1999 में फिर नाम में जुड़ा भदोही

जिले के नाम में अगला बदलाव 12 नवंबर 1999 को हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता की सरकार ने इसका नाम संत रविदास नगर भदोही कर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, कालीन निर्यातकों की मांग के बाद भदोही नाम को फिर आधिकारिक नाम में शामिल किया गया। इस तरह जिले के नाम में संत रविदास नगर के साथ भदोही भी जुड़ गया।

2014 में अखिलेश यादव सरकार ने वापस किया भदोही नाम

समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद जिले के नाम को लेकर एक बार फिर फैसला बदला गया। 6 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संत रविदास नगर का नाम फिर भदोही करने का निर्णय लिया गया।

उस समय सरकारी प्रवक्ता की ओर से बताया गया था कि नाम बदलने का फैसला जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश के आधार पर लिया गया था। इसके बाद भदोही नाम फिर जिले की प्रशासनिक पहचान बन गया।

बाद के वर्षों में मायावती ने इस फैसले का विरोध किया। वर्ष 2020 में उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो भदोही का नाम दोबारा संत रविदास नगर किया जाएगा।

2026 में योगी आदित्यनाथ ने फिर की नाम बदलने की घोषणा

अब करीब 12 साल बाद भदोही के नाम का मुद्दा फिर चर्चा में है। 29 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने 2014 में जिले का नाम वापस भदोही किए जाने का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिले को फिर संत रविदास नगर के नाम से पहचान दिलाई जाएगी।

अखिलेश यादव ने नाम बदलने की राजनीति पर उठाया सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नाम बदलने की यह राजनीति अब खत्म होगी और 2027 में जनता सरकार बदलने के लिए तैयार है।

अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री की घोषणा के कुछ घंटे बाद सामने आई। इसके साथ ही जिले के नाम को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आ गए।

1994 से 2026 तक पांच बड़े पड़ाव

भदोही के नाम में करीब तीन दशक के दौरान कई बदलाव हुए। 30 जून 1994 को भदोही अलग जनपद बना। इसके बाद 4 दिसंबर 1997 को इसका नाम संत रविदास नगर किया गया। 12 नवंबर 1999 को नाम संत रविदास नगर भदोही हुआ। 6 दिसंबर 2014 को इसे फिर भदोही कर दिया गया।

अब 29 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की है। इस तरह 1994 से 2026 के बीच जिले के नाम से जुड़े पांच बड़े पड़ाव सामने आते हैं।

अब आगे क्या होगा

2026 में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिले के नाम को लेकर अगला महत्वपूर्ण चरण औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिसूचना का होगा। फिलहाल घोषणा के बाद भदोही के नाम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

करीब तीन दशक में जिले के नाम में हुए बदलावों में अलग-अलग सरकारों के फैसले और राजनीतिक रुख दिखाई देते हैं। 2026 में हुई नई घोषणा ने एक बार फिर भदोही और संत रविदास नगर नाम को लेकर बहस को सामने ला दिया है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ