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आराधना मिश्रा को यूपी कांग्रेस की कमान, अजय राय की जगह ब्राह्मण चेहरे पर दांव; इमरान मसूद-राजेंद्र पाल गौतम के साथ नया समीकरण!

आराधना मिश्रा मोना को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी ने इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम को भी अहम जिम्मेदारी दी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। अजय राय की जगह मिली इस जिम्मेदारी के साथ पार्टी ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का प्रभारी बनाया है। नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित प्रतिनिधित्व के जरिए पुराने सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश दिखाई देती है।

आराधना मिश्रा मोना को क्यों सौंपी गई यूपी कांग्रेस की कमान

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी आराधना मिश्रा ‘मोना’ को देकर संगठन में बदलाव किया है। वह प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक हैं और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के दो विधायकों में से एक हैं। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। पार्टी संगठन में उनका पुराना जुड़ाव है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी वह सक्रिय रही हैं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब कांग्रेस विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

तीन बार रामपुर खास से विधायक चुनी गईं आराधना

आराधना मिश्रा ‘मोना’ रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने पहली बार 2014 में हुए उपचुनाव में इस सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने रामपुर खास से जीत दर्ज की।

इस तरह आराधना मिश्रा का विधानसभा क्षेत्र में लगातार चुनावी प्रदर्शन रहा है। पार्टी में उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और उत्तर प्रदेश में सक्रियता को भी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने के संदर्भ में देखा जा रहा है।

राजेंद्र गौतम की भूमिका की भी चर्चा

आराधना मिश्रा को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने में पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम की भूमिका भी मानी जा रही है। खबर के मुताबिक, आराधना मिश्रा को राजेंद्र गौतम के करीबी लोगों में गिना जाता है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस नियुक्ति के पीछे बताई गई वजहों की विस्तृत जानकारी यहां नहीं दी गई है।

प्रदेश संगठन में बदलाव का यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

सपा के साथ सीट बंटवारे पर अभी फैसला नहीं

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में कांग्रेस संगठन और अपने काडर को मजबूत करने के लिए प्रदेश में बदलाव कर रही है।

कांग्रेस लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपने पुराने सामाजिक आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश करती रही है। पार्टी 1980 के दशक में मजबूत रहे ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम यानी डीएमबी समीकरण को फिर से साधने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। कांग्रेस 1989 के बाद उत्तर प्रदेश में अकेले दम पर सत्ता में नहीं आई है।

ब्राह्मण चेहरे के साथ दलित और मुस्लिम प्रतिनिधित्व

आराधना मिश्रा ब्राह्मण समाज से आती हैं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के साथ कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को संगठन के शीर्ष स्तर पर प्रमुखता दी है। इसके साथ ही दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।

वहीं इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पार्टी की नई प्रदेश टीम में ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े प्रमुख चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।

कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव को पार्टी के पुराने सामाजिक समीकरण को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आराधना मिश्रा के जरिए ब्राह्मण समुदाय, राजेंद्र पाल गौतम के जरिए दलित समुदाय और इमरान मसूद के जरिए मुस्लिम प्रतिनिधित्व को साथ रखने की कोशिश की गई है।

अपर कास्ट वोटरों पर भी कांग्रेस की नजर

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने ऊंची जाति के वोटरों के बीच अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की चुनौती भी है। CSDS-लोकनीति के 2024 लोकसभा चुनाव के पोस्ट-पोल सर्वे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 79 फीसदी अपर कास्ट वोटरों ने NDA को वोट दिया था, जबकि 16 फीसदी ने INDIA गठबंधन का समर्थन किया था।

इस सर्वे में ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य जैसे अपर कास्ट समूहों को एक साथ रखा गया था। ऐसे आंकड़ों के बीच कांग्रेस की कोशिश इस सामाजिक आधार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की है।

करीब 9 फीसदी ब्राह्मण आबादी का समीकरण

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 9 फीसदी मानी जाती है। कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इसी समुदाय से आने वाले एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे को प्रदेश संगठन की कमान दी है।

इसके साथ ही पार्टी ने इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम को भी अहम जिम्मेदारियां दी हैं। इस नई व्यवस्था के जरिए कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित प्रतिनिधित्व को एक साथ जगह दी है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में किए गए इस बदलाव को पार्टी के सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस के लिए संगठन मजबूत करने की चुनौती

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से अपने संगठन और चुनावी प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला इसी संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ पार्टी ने एक ऐसे चेहरे को आगे किया है, जो रामपुर खास से लगातार तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं।

अब नई प्रदेश टीम में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने के बाद कांग्रेस के सामने अपने संगठन को जमीन पर मजबूत करने और चुनावी आधार बढ़ाने की चुनौती है। पार्टी की आगामी रणनीति में आराधना मिश्रा की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भूमिका महत्वपूर्ण होगी।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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