![]() |
AISA नेता नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के 10,000 रुपये के बॉन्ड वाले नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच में चुनौती दी है।
AISA की छात्र नेता नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए 10,000 रुपये के बॉन्ड और श्योरिटी वाले नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। नेहा को हाल ही में एक मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था। दशहरा की छुट्टियों के चलते अदालत 26 अक्टूबर तक बंद है, इसलिए उनकी लीगल टीम ने वेकेशन बेंच से इस मामले की तत्काल सुनवाई करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम को कनॉट प्लेस में आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले हिरासत में लिया था। उन्हें मंडी हाउस में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पकड़ा गया था। पुलिस ने उन्हें कई घंटों तक हिरासत में रखने के बाद अगली सुबह छोड़ दिया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा किया गया। अब पुलिस ने पूछताछ के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड और एक श्योरिटी भरने का नोटिस दिया है, जिसके खिलाफ नेहा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
नेहा बोरा की ओर से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 का इस्तेमाल केवल किसी प्रदर्शन को रोकने के मकसद से किया जाना चाहिए। याचिका के मुताबिक, पुलिस इस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कुचलने और एक दंडात्मक उपाय के रूप में कर रही है।
वेकेशन बेंच से जल्द सुनवाई की अपील
वर्तमान में दशहरा के त्योहार और छुट्टियों की वजह से दिल्ली हाई कोर्ट का कामकाज बंद है। अदालत अब 26 अक्टूबर को खुलेगी। इसे देखते हुए नेहा बोरा की कानूनी टीम ने छुट्टियों के दौरान बैठने वाली 'वेकेशन बेंच' (अवकाश पीठ) के समक्ष इस मामले की जल्द सुनवाई (अर्जेंट हियरिंग) का अनुरोध किया है।
CJP फाउंडर अभिजीत दिपके भी हुए थे गिरफ्तार
इस मामले के अलावा, सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके को भी पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियातन गिरफ्तारी) किया था। उन पर भी बीएनएसएस (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई थी। हालांकि, रविवार शाम को स्पेशल एग्जीक्यूटिव कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया। गौरतलब है कि 'SIR' के खिलाफ विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन के बीच उन्हें हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इससे योग्य वोटर्स के वोट देने का अधिकार छिनने का भारी खतरा है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।