AI वॉइस क्लोनिंग से अपनों की नकली आवाज बनाकर ठगी हो रही है। जानें साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय और 1930 पर शिकायत का तरीका।
साइबर अपराधी अब आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर आम लोगों की आवाज की हूबहू नकल तैयार कर रहे हैं। इस तकनीक के जरिए परिजनों और परिचितों को किसी आपात स्थिति का झांसा देकर तुरंत पैसों की मांग की जाती है। ऐसे मामलों में केवल आवाज सुनकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर न करने, परिवार में पहले से 'सीक्रेट कोडवर्ड' तय रखने और धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
केवल मैसेज या लिंक ही नहीं, अब आवाज की नकल से ठगी
डिजिटल धोखाधड़ी का दायरा अब केवल फर्जी मैसेज, वॉट्सऐप चैट, संदिग्ध ईमेल, अनजान लिंक या खतरनाक APK फाइलों तक सीमित नहीं रह गया है। शातिर ठग अब AI टूल्स का सहारा लेकर किसी भी व्यक्ति के बोलने के अंदाज और टोन को काफी हद तक कॉपी कर रहे हैं। इसके बाद वे उस नकली आवाज का इस्तेमाल करके पीड़ित के दोस्तों और परिजनों को फोन मिलाते हैं। कॉल पर किसी गंभीर संकट या मजबूरी का बहाना बनाकर तुरंत आर्थिक मदद के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
सोशल मीडिया से कैसे तैयार की जाती है नकली आवाज?
आवाज की क्लोनिंग करने के लिए साइबर ठग सबसे पहले संबंधित व्यक्ति के वॉइस सैंपल तलाशते हैं। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए जाने वाले रील्स, शॉर्ट्स, वीडियो या ऑडियो क्लिप्स का सहारा लिया जाता है।
आधुनिक AI तकनीक इन क्लिप्स के जरिए आवाज की बनावट, बोलने की गति और लहजे को गहराई से समझकर वैसी ही आवाज तैयार कर देती है। ठग इस क्लोन की गई आवाज का इस्तेमाल फोन कॉल या वॉइस नोट्स भेजने में करते हैं। जब किसी परिजन को अपने ही किसी करीबी की जानी-पहचानी आवाज में परेशानी का संदेश मिलता है, तो वे बिना किसी संदेह के तुरंत पैसे भेज बैठते हैं।
परिचित का फोन आने पर भी न करें जल्दबाजी, अपनाएं 'सीक्रेट कोडवर्ड'
किसी भी अनपेक्षित कॉल पर अचानक पैसों की मांग होने पर हड़बड़ी में कोई ट्रांजैक्शन नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के जोखिम से निपटने के लिए परिवार और करीबी मित्रों के बीच पहले से एक गोपनीय कोडवर्ड निर्धारित किया जा सकता है। संकट के समय अगर कोई आर्थिक मदद मांगे, तो पैसे भेजने से पहले उस तय कोडवर्ड के बारे में जरूर पूछें। असली व्यक्ति को वह कोड पता होगा, जबकि जालसाज उसका जवाब नहीं दे पाएगा।
इसके साथ ही, उस परिजन के वास्तविक और सामान्य नंबर पर दोबारा खुद कॉल करके स्थिति की पुष्टि करें या परिवार के किसी अन्य सदस्य से बात कर लें। सोशल मीडिया पर भी जरूरत से ज्यादा साफ और लंबी आवाज वाले वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने से सावधानी बरतनी चाहिए।
धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
यदि किसी कारणवश वित्तीय जालसाजी हो जाती है, तो बिना समय गंवाए इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दें। भारत में साइबर अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल की सुविधा उपलब्ध है। वित्तीय नुकसान होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अतिरिक्त, संदिग्ध संदेशों और साइबर अपराध से जुड़े मामलों की सूचना देने के लिए 'संचार साथी' पोर्टल पर दिए गए विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में सिर्फ आवाज सुनकर भरोसा न करें और रकम भेजने से पहले अपनी ओर से पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें।


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