कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF की वेज सीलिंग सितंबर 2026 में बढ़कर 25,000 रुपये हो गई है। 1952 में EPF योजना लागू होने के समय यह सीमा सिर्फ 300 रुपये थी। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में इसमें बदलाव होते रहे। 17 सितंबर 2026 से लागू नई सीमा के साथ 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये तक की पात्र वेज वाले नए कर्मचारी भी अनिवार्य EPF कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
1952 में सिर्फ 300 रुपये थी EPF वेज सीलिंग
EPF योजना नवंबर 1952 में लागू हुई थी। उस समय योजना के तहत 300 रुपये महीने तक वेज पाने वाले कर्मचारियों को इसके दायरे में रखा गया था। शुरुआती वर्षों में सरकार ने वेज सीलिंग में लगातार बदलाव किए और यह सीमा धीरे-धीरे बढ़ती गई।
जून 1957 में करीब साढ़े चार साल बाद वेज सीलिंग को 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया। इसके बाद दिसंबर 1962 में इसमें फिर बदलाव हुआ और सीमा 1,000 रुपये महीने हो गई।
इस तरह EPF योजना लागू होने के पहले 10 वर्षों के भीतर ही वेज सीलिंग 300 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये तक पहुंच गई थी।
1952 से 1962 तक ऐसे बढ़ी वेज सीलिंग
नवंबर 1952 में EPF वेज सीलिंग 300 रुपये थी। जून 1957 में यह बढ़कर 500 रुपये हुई और दिसंबर 1962 में इसे 1,000 रुपये कर दिया गया।
इसके बाद अगला बदलाव करीब 14 साल बाद दिसंबर 1976 में हुआ, जब वेज सीलिंग को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,600 रुपये कर दिया गया।
1976 में 1,600 रुपये हुई EPF की सीमा
दिसंबर 1976 में EPF वेज सीलिंग 1,600 रुपये निर्धारित की गई। इसके करीब नौ साल बाद सितंबर 1985 में इसे बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया।
इसके बाद नवंबर 1990 में वेज सीलिंग 3,500 रुपये हुई और अक्टूबर 1994 में इसे बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया। जून 2001 में एक बार फिर बदलाव करते हुए सीमा 6,500 रुपये कर दी गई।
इस अवधि में EPF वेज सीलिंग का सफर इस तरह रहा:
दिसंबर 1976 में 1,600 रुपये, सितंबर 1985 में 2,500 रुपये, नवंबर 1990 में 3,500 रुपये, अक्टूबर 1994 में 5,000 रुपये और जून 2001 में 6,500 रुपये।
6,500 रुपये की सीमा 13 साल से ज्यादा रही
जून 2001 में EPF वेज सीलिंग को 6,500 रुपये किया गया था। यह सीमा अगस्त 2014 तक लागू रही। यानी 13 साल से अधिक समय तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
इसके बाद सितंबर 2014 में सरकार ने वेज सीलिंग को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया। इस बदलाव में सीमा सीधे 8,500 रुपये बढ़ी और EPF वेज सीलिंग 15,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई।
इसके बाद करीब 12 वर्षों तक 15,000 रुपये की सीमा बनी रही।
सितंबर 2026 में 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हुई सीमा
EPF वेज सीलिंग में अब सितंबर 2026 में एक और बड़ा बदलाव हुआ है। 17 सितंबर 2026 से नई वेज सीलिंग 25,000 रुपये कर दी गई है।
इससे पहले 16 सितंबर 2026 तक EPF के लिए वेज सीलिंग 15,000 रुपये थी। अब यह सीमा बढ़कर 25,000 रुपये हो गई है।
नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये तक की पात्र वेज पाने वाले नए कर्मचारी अनिवार्य EPF कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
2014 से 2026 तक EPF वेज सीलिंग
सितंबर 2014 में EPF वेज सीलिंग 15,000 रुपये हुई थी। यह सीमा 16 सितंबर 2026 तक लागू रही। इसके बाद 17 सितंबर 2026 से इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया।
यानी 12 वर्षों के अंतराल के बाद EPF वेज सीलिंग में फिर बदलाव हुआ है।
25,000 रुपये की नई सीमा से कर्मचारी के योगदान पर क्या असर पड़ेगा
नई वेज सीलिंग का असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनकी बेसिक वेज 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये तक है तथा जो नए सिरे से अनिवार्य EPF कवरेज में आते हैं।
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक वेज 25,000 रुपये है और EPF योगदान पूरी 25,000 रुपये की सीमा पर किया जाता है, तो 12 फीसदी के हिसाब से कर्मचारी का योगदान 3,000 रुपये होगा।
पुरानी 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर 12 फीसदी योगदान 1,800 रुपये था। इस तरह अधिकतम वेज सीलिंग के आधार पर कर्मचारी के मासिक योगदान में 1,200 रुपये का अंतर आता है।
पुरानी और नई सीमा के आधार पर कर्मचारी का योगदान इस प्रकार है:
पहले 15,000 रुपये की सीमा पर 12 फीसदी योगदान 1,800 रुपये था। अब 25,000 रुपये की सीमा पर यह योगदान 3,000 रुपये है। दोनों के बीच अंतर 1,200 रुपये प्रति माह का है।
हालांकि, हर कर्मचारी के लिए योगदान अपने आप 3,000 रुपये नहीं होगा। वास्तविक योगदान कर्मचारी की पात्रता, बेसिक वेज और लागू EPF नियमों पर निर्भर करेगा।
नियोक्ता के योगदान पर भी पड़ सकता है असर
EPF में कर्मचारी के साथ नियोक्ता भी योगदान करता है। 25,000 रुपये की वेज सीमा पर 12 फीसदी योगदान 3,000 रुपये होता है।
नियोक्ता के योगदान में EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना का हिस्सा भी शामिल होता है। 25,000 रुपये की सीमा पर 8.33 फीसदी के हिसाब से अधिकतम EPS योगदान करीब 2,083 रुपये महीने हो सकता है।
वहीं, 15,000 रुपये की पुरानी सीमा पर EPS का अधिकतम योगदान 1,250 रुपये था। इस तरह पात्र कर्मचारियों के मामले में वेज सीलिंग बढ़ने से EPF और EPS से जुड़ी बचत तथा पेंशन योगदान की रकम भी बढ़ सकती है।
ज्यादा PF कटने से टेक-होम सैलरी पर क्या असर होगा
नई EPF वेज सीलिंग का असर कर्मचारी की महीने की हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ सकता है। यदि कर्मचारी का EPF योगदान बढ़ता है तो उसकी सैलरी से कटने वाली रकम भी बढ़ सकती है।
इस स्थिति में कर्मचारी की मासिक टेक-होम सैलरी कम हो सकती है। दूसरी ओर EPF खाते में जमा होने वाली राशि बढ़ेगी। यानी बढ़े हुए योगदान का असर मौजूदा हाथ में आने वाली आय और भविष्य की रिटायरमेंट सेविंग, दोनों पर पड़ सकता है।
1952 से 2026 तक EPF वेज सीलिंग की पूरी टाइमलाइन
नवंबर 1952 में EPF वेज सीलिंग 300 रुपये थी। जून 1957 में इसे 500 रुपये किया गया। दिसंबर 1962 में सीमा बढ़कर 1,000 रुपये हुई।
दिसंबर 1976 में यह 1,600 रुपये, सितंबर 1985 में 2,500 रुपये, नवंबर 1990 में 3,500 रुपये और अक्टूबर 1994 में 5,000 रुपये पहुंची।
जून 2001 में वेज सीलिंग 6,500 रुपये कर दी गई, जो अगस्त 2014 तक लागू रही। सितंबर 2014 में यह सीमा बढ़कर 15,000 रुपये हो गई और 16 सितंबर 2026 तक यही सीमा रही।
17 सितंबर 2026 से EPF वेज सीलिंग बढ़कर 25,000 रुपये हो गई है।
74 साल में 300 से 25,000 रुपये हुई सीमा
1952 में 300 रुपये से शुरू हुई EPF वेज सीलिंग अब 2026 में 25,000 रुपये तक पहुंच गई है। इस अवधि में वेज सीलिंग में कुल 9 बार बदलाव हुआ।
25,000 रुपये की नई सीमा लागू होने के साथ 15,000 रुपये से अधिक और 25,000 रुपये तक की पात्र वेज वाले नए कर्मचारियों के लिए अनिवार्य EPF कवरेज का दायरा बढ़ सकता है। 1952 से 2026 तक की इस पूरी अवधि में 6,500 रुपये की सीमा 2001 से 2014 तक सबसे लंबे समय तक लागू रही, जबकि 15,000 रुपये की सीमा भी करीब 12 साल तक बनी रही।


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