वाराणसी में 116 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा। मास्टरमाइंड नीतीश पांडेय समेत 4 गिरफ्तार, जानें कैसे OTP चुराकर करते थे फ्रॉड।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस और साइबर सेल ने 116.86 करोड़ रुपये के एक विशाल साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस बड़े मामले में बिहार के रहने वाले मुख्य मास्टरमाइंड नीतीश कुमार पांडेय सहित चार आरोपियों को दबोचा गया है। यह शातिर गिरोह कमीशन का लालच देकर आम लोगों के नाम पर बैंक खाते और फर्म खुलवाता था। बाद में इन्ही खातों का इस्तेमाल सट्टेबाजी (बेटिंग एप) और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के काले धन की हेराफेरी के लिए किया जाता था।
कमीशन का लालच और फर्जी खातों का जाल
चेतगंज थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त जांच में इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है। आरोपी भोले-भाले लोगों को टारगेट करते थे और उन्हें मोटा कमीशन देने का झांसा देकर उनके नाम पर नई फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद उसकी पूरी बैंकिंग किट, पासवर्ड और जानकारी गिरोह अपने पास रख लेता था। साइबर ठगी से कमाई गई रकम को इन्हीं खातों में मंगाया जाता था और फिर उसे कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि पुलिस पैसे के असली स्रोत तक न पहुंच सके।
41 बैंक खाते और 116 करोड़ का काला खेल
पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बिहार में रोहतास जिले के सासाराम का रहने वाला नीतीश कुमार पांडेय है। जांच एजेंसियों को अब तक आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों की भनक लगी है। जब इन खातों की डिटेल को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर खंगाला गया, तो इन पर 143 शिकायतें दर्ज मिलीं। इन्हीं शिकायतों की गहन जांच में करीब 116.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।
'XePay APK' से करते थे OTP की चोरी
तकनीकी जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह गिरोह बेहद हाई-टेक तरीके से काम कर रहा था। बैंकिंग लेनदेन को अंजाम देने और मैसेज पर नजर रखने के लिए आरोपी मोबाइल फोन में XePay APK नाम के ऐप का इस्तेमाल करते थे। इस ऐप के जरिए 'SMS Forwarding' को एक्टिवेट कर दिया जाता था, जिससे बैंक के सारे OTP और जरूरी मैसेज सीधे आरोपियों के पास पहुंच जाते थे। इसी तकनीक के सहारे वे करोड़ों रुपये मिनटों में ट्रांसफर कर लेते थे।
लैपटॉप, स्कैनर और दर्जनों डेबिट कार्ड बरामद
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों के पास से पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल होने वाला भारी साजो-सामान जब्त किया है। इनमें 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 19 चेकबुक, 40 डेबिट कार्ड, 48 QR स्कैनर और दो वाहन शामिल हैं।
पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इन लोगों ने देशभर में कितने लोगों के नाम पर फर्जी फर्म बना रखी हैं और ठगी का पैसा किन-किन राज्यों में भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, बेटिंग ऐप्स और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े कुछ और बड़े सफेदपोशों की गिरफ्तारी हो सकती है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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