पुणे के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने 70 करोड़ महिलाओं को देश की ताकत बताया और स्वतंत्र पहचान पर जोर दिया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्राओं से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश की 70 करोड़ महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। राहुल ने कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर केवल पत्नी, बेटी और मां की भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए। उन्होंने 'मनुस्मृति' का हवाला देते हुए महिलाओं की पूरी आजादी की पुरजोर वकालत की।
महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर जोर
शनिवार को पुणे में छात्राओं से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति ही देश की असली रीढ़ है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि महिलाओं की पहचान को अक्सर तीन मुख्य पारिवारिक भूमिकाओं (पत्नी, बेटी और मां) के दायरे में ही समेट कर रख दिया जाता है। उनका कहना था कि ये भूमिकाएं अपनी जगह गलत नहीं हैं, लेकिन महिलाओं की अपनी एक अलग और स्वतंत्र पहचान भी होनी चाहिए, जो किसी पर निर्भर न हो।
'मनुस्मृति' का जिक्र और आजादी की वकालत
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने 'मनुस्मृति' का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें बताया गया है कि एक लड़की बचपन में अपने पिता की संपत्ति होती है, जवानी में पति की और बुढ़ापे में अपने बच्चों के सहारे जीती है। उन्होंने इन बातों को पूरी तरह शर्मनाक करार दिया। छात्राओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी महिलाओं को आजाद होना चाहिए। आपके रिश्ते अपने पिता, पति और बेटे के साथ हैं, लेकिन इनसे आपकी पहचान तय नहीं होती है।"
पितृसत्तात्मक सोच पर युवतियों से बेबाक चर्चा
राहुल गांधी ने यह भी साफ किया कि वे इस कार्यक्रम में कोई राजनीतिक बात करने नहीं, बल्कि युवाओं के विचार सुनने आए हैं। उन्होंने एक छात्रा से पूछा कि पुरुष महिलाओं पर नियंत्रण क्यों रखना चाहते हैं और क्या यह पितृसत्तात्मक व्यवस्था का हिस्सा है?
इस पर एक युवती ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि एक इंसान होने के नाते उसे तब बहुत गुस्सा आता है, जब लोग कहते हैं, "तुम तो बस एक औरत हो, खूबसूरत हो; कोई तुमसे शादी कर लेगा और तुम्हारी जिंदगी अच्छी कटेगी।"
अधिकार है हिस्सेदारी, कोई एहसान नहीं
संपत्ति में अधिकारों को लेकर राहुल गांधी ने एक और युवती से सवाल किया कि जब भाई अपना हिस्सा मांगता है तो उसे 'अधिकार' कहा जाता है, लेकिन लड़की के मांगने पर उसे सिर्फ 'हिस्सा मांगना' क्यों कहा जाता है?
जवाब में युवती ने समाज की सच्चाई बयां करते हुए कहा कि परिवार अक्सर यही उम्मीद करते हैं कि एक महिला 9 से 5 की नौकरी भी करे और घर वापस आकर खाना बनाने से लेकर बच्चों को संभालने तक का सारा काम भी खुद करे। इस चर्चा के आधार पर राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनका हिस्सा देना समाज का कोई एहसान नहीं माना जाना चाहिए, यह उनका हक है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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