पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से डिलीट होने पर संसदीय समिति सख्त। मार्क जुकरबर्ग को 3 दिन का अल्टीमेटम, वरना छिनेगा सेफ हार्बर।
फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो डिलीट होने पर दूरसंचार और आईटी की संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो फेसबुक का 'सेफ हार्बर क्लॉज' (Safe Harbor Clause) खत्म किया जा सकता है, जिससे कंपनी के अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मार्क जुकरबर्ग को खुद मांगनी होगी माफी
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सोमवार (3 अगस्त, 2026) को इस विवाद के संबंध में मेटा के अधिकारियों के साथ बैठक की। समिति ने दो टूक कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना लोकतंत्र पर सीधे प्रहार जैसा है। बैठक में मेटा ने इसे तकनीकी खामी बताते हुए माफी मांगी और स्वीकार किया कि रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे (पांच घंटे) तक कंटेंट गायब था। हालांकि, समिति ने इस माफी को नाकाफी मानते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में केवल माफी काफी नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए। समिति की स्पष्ट मांग है कि माफी सीधे मार्क जुकरबर्ग की तरफ से आनी चाहिए।
छिन सकती है 'सेफ हार्बर' की सुरक्षा
संसदीय समिति ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो भारत सरकार फेसबुक को आईटी एक्ट के सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' की सुरक्षा वापस ले सकती है। यह ढाल हटने का सीधा मतलब यह होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी सामग्री के लिए कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकेंगे।
सभी प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश
समिति की यह सख्ती केवल फेसबुक तक सीमित नहीं है। गूगल, यूट्यूब, एक्स (X), व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट सहित सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अल्टीमेटम दिया गया है। इन सभी कंपनियों को तीन दिन के भीतर अपने प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण (Child Sexual Exploitative and Abuse Material) और महिलाओं से जुड़ी किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
'देश को अस्थिर करने का है इरादा'
समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने इस घटना की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि मेटा इंडिया द्वारा प्रधानमंत्री का कंटेंट हटाना कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी में 2024 के चुनावों को लेकर भी मार्क जुकरबर्ग ने एक बयान दिया था, जिसके लिए उन्हें बाद में माफी मांगनी पड़ी थी। दुबे के मुताबिक, ऐसी घटनाओं का पैटर्न यह दर्शाता है कि इनका इरादा देश को अस्थिर करने का है।
तेलंगाना में गूगल और मेटा पर FIR
इस पूरे विवाद के बीच, तेलंगाना पुलिस ने भी इन टेक कंपनियों पर कानूनी शिकंजा कसा है। गूगल पर वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले ऐप्स को अपने प्लेटफॉर्म पर पनाह देने और मेटा पर पीएम मोदी का फर्जी वीडियो साझा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में 'सेफ हार्बर क्लॉज' हटता है, तो ऐसी शिकायतों में प्लेटफॉर्म के अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई करना बहुत आसान हो जाएगा।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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