मार्क जुकरबर्ग ने CSAM, डीपफेक कंटेंट और पीएम मोदी का वीडियो हटाने के विवाद पर माफी मांगी, मेटा पर बढ़ा दबाव।
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गलतियों को लेकर माफी जताई है। यह कदम उस विवाद के बाद सामने आया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने पर संसद की स्थायी समिति ने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए मेटा से जवाब और माफी की मांग की थी।
CSAM और डीपफेक कंटेंट पर जुकरबर्ग ने जताया खेद
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन से जुड़े मामलों में हुई गलतियों पर माफी मांगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े कुछ मामलों में कंपनी से त्रुटियां हुईं, जिन पर खेद व्यक्त किया गया है।
कुछ कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए खर्च हुई बड़ी रकम
मामले के दौरान यह भी कहा गया कि कुछ प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई थी। इस विषय पर भी मेटा की ओर से खेद जताया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि कंपनी को इंटरमीडियरी की परिभाषा के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली "सेफ हार्बर" सुरक्षा इस स्थिति में लागू नहीं होगी।
पीएम मोदी का वीडियो हटाने के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 जुलाई के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद सामने आया। संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इसे 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि के वीडियो को हटाने का मामला बताते हुए "लोकतंत्र पर हमला" करार दिया था।
तीन दिन में माफी मांगने का दिया गया था अल्टीमेटम
संसदीय समिति ने मेटा से इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने को कहा था। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई और माफी नहीं दी गई, तो मेटा को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली "सेफ हार्बर" सुरक्षा हटाने की सिफारिश की जा सकती है।
सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी उठे सवाल
निशिकांत दुबे का कहना था कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी इंटरमीडियरी की सामान्य भूमिका नहीं बल्कि एक पब्लिशर जैसा निर्णय माना जा सकता है। उनके अनुसार यदि मेटा से "सेफ हार्बर" सुरक्षा हटती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराने का रास्ता खुल सकता है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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