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बाबा रामदेव का Gen-Z आंदोलन पर बड़ा बयान, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल


बाबा रामदेव ने Gen-Z आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकारी भर्ती में कथित घोटाले पर गंभीर सवाल उठाए।

योगगुरु बाबा रामदेव ने Gen-Z आंदोलन को लेकर देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हरिद्वार में मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों, बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी, नकल और पेपर लीक का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में जाति, वर्ग, समुदाय और विचारधारा के आधार पर भेदभाव तथा कथित भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।

Gen-Z आंदोलन को लेकर बाबा रामदेव ने जताई चिंता

योगगुरु बाबा रामदेव ने देश में चल रहे Gen-Z आंदोलन को लेकर चिंता जताते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। हरिद्वार में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग जगहों पर बच्चों को स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।

बाबा रामदेव के मुताबिक कई जगह बच्चे इस बात की शिकायत करते हैं कि उनके स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। इसके अलावा बिजली, पानी और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं की भी कमी है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर जहां पर्याप्त व्यवस्थाएं मौजूद हैं, वहां भी नकल और पेपर लीक जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

स्कूलों में शिक्षक और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा

बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि छोटे-छोटे स्कूल और कॉलेजों से बच्चे निकल रहे हैं, लेकिन कई संस्थानों में पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधनों की कमी बनी हुई है। उन्होंने शिक्षक, किताब, बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि देश में एक तरफ बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ कुछ जगहों पर नकल और पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आती हैं। बाबा रामदेव ने इन समस्याओं को गंभीर बताते हुए व्यवस्था को सुधारने की अपील की।

सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल

बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनका आरोप था कि इंटरव्यू के दौरान अपने जाति, वर्ग, समुदाय और विचार से जुड़े लोगों को नौकरी दी जाती है, जबकि दूसरे लोगों को अवसर से वंचित कर दिया जाता है।

उन्होंने इस तरह की व्यवस्था को अपमानजनक और लोकतंत्र के खिलाफ बताया। बाबा रामदेव ने कहा कि एक ओर देश में ‘सत्यमेव जयते’ की बात होती है, वहीं दूसरी ओर पहले से तय करके लाखों-करोड़ों रुपये लेकर नौकरियां बांटने का खेल चल रहा है।

‘आंदोलन ही चलते रहे तो देश कैसे चलेगा’

बाबा रामदेव ने देश में लगातार आंदोलनों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि देश में आंदोलन ही चलते रहेंगे तो देश कैसे चलेगा। इसी के साथ उन्होंने व्यवस्था में मौजूद कथित घपलों को दूर करने की जरूरत बताई।

उन्होंने सरकारी नौकरियों में 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक लेकर भर्ती किए जाने का आरोप भी लगाया। बाबा रामदेव ने कहा कि व्यवस्था को ठीक करने का अभी भी समय है और सुधार नहीं हुआ तो देश में और ज्यादा आंदोलन हो सकते हैं।

‘अभी भी समय है, सुधर जाओ’

बाबा रामदेव ने कहा कि अभी भी समय है और व्यवस्था को सुधार लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करते और न ही उसे बर्दाश्त करते हैं। हालांकि, उनके मुताबिक देश में घपला भी बहुत है और इन कथित घपलों को ठीक करने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि कहीं ऐसा न हो कि उन्हें दोबारा आंदोलन करना पड़े। इस बयान के जरिए बाबा रामदेव ने एक ओर आंदोलनों से पैदा होने वाली अराजकता के खिलाफ अपना रुख रखा, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था में मौजूद कथित भ्रष्टाचार को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया।

देश में नफरत और घृणा के माहौल का भी किया जिक्र

बाबा रामदेव ने अपने बयान में देश के राजनीतिक माहौल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देश में नफरत और घृणा का ऐसा माहौल बन गया है कि संसद में पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के खिलाफ पाकिस्तान और हिंदुस्तान की तरह खड़े दिखाई देते हैं।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और राजनीतिक माहौल से जुड़े इन मुद्दों का उल्लेख करते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उनका कहना था कि देश में चल रहे घपलों को ठीक किया जाना चाहिए, ताकि हालात और अधिक आंदोलनों की ओर न बढ़ें।

बाबा रामदेव ने किन मुद्दों पर उठाए सवाल

बाबा रामदेव के बयान में शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी सुविधाओं से लेकर नकल, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया तक कई मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने स्कूलों में शिक्षक, बिजली, पानी और शौचालय की कमी का मुद्दा उठाया। साथ ही सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में कथित घोटाले और जाति, वर्ग, समुदाय तथा विचार के आधार पर नौकरी देने के आरोप लगाए।

उन्होंने सरकारी भर्ती में 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक लिए जाने का भी आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने देश में नफरत और घृणा के माहौल तथा संसद में पक्ष-विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का उल्लेख किया।

बाबा रामदेव ने कहा कि सुधार का समय अभी भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में और ज्यादा आंदोलन हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करने की बात भी कही।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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