भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में AIIMS रिपोर्ट का बड़ा खुलासा! बेल्ट पर मिले त्वचा के अंश। CBI जांच जारी।
मध्य प्रदेश की रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में दिल्ली एम्स (AIIMS) की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया है। 10 जुलाई 2026 को सीबीआई (CBI) को सौंपी गई इस अंतिम सीलबंद रिपोर्ट के अनुसार, फंदे के रूप में इस्तेमाल की गई धातु के छल्ले वाली जिम्नास्टिक बेल्ट पर ट्विशा की त्वचा (Skin Tissue) के अंश मिले हैं। यह वैज्ञानिक साक्ष्य सीधे तौर पर उनकी गर्दन पर मौजूद चोट के निशानों से मेल खाता है, जिससे पुलिस की थ्योरी को बल मिला है और इस हाई-प्रोफाइल मामले की गुत्थी अब सुलझती नजर आ रही है।
कैसे खुला बेल्ट और चोट का राज?
इस केस में शुरुआत से ही सबसे बड़ा सवाल यह था कि पुलिस जिस जिम्नास्टिक बेल्ट को फंदा बता रही है, क्या वाकई उसी से फंदा लगा था? दरअसल, भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम के दौरान स्थानीय मेडिकल बोर्ड के सामने वह बेल्ट पेश ही नहीं की गई थी, जिससे स्थिति साफ नहीं हो सकी। लेकिन जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सख्त आदेश पर एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने दूसरा पोस्टमार्टम किया और ‘हिस्टोपैथोलॉजिकल’ (ऊतक विज्ञान संबंधी) जांच की, तो प्रयोगशाला में बेल्ट पर मानव त्वचा के अंश मिल गए। इस वैज्ञानिक प्रमाण से साबित हो गया कि ट्विशा की गर्दन पर आए जानलेवा निशान इसी बेल्ट के दबाव के कारण बने थे।
CBI को सौंपी गई 11 पन्नों की सीलबंद रिपोर्ट
एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में 5 डॉक्टरों के विशेष बोर्ड ने 24 मई 2026 को दूसरा पोस्टमार्टम किया था और भोपाल जाकर क्राइम सीन का बारीकी से मुआयना भी किया था। तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मापदंडों पर एक महीने तक चले गहन अध्ययन के बाद, 10 जुलाई 2026 को 11 पन्नों की विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सीबीआई को सीलबंद लिफाफे में सौंप दी गई है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को गोपनीय रखा गया है और दूसरे पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर सीबीआई को दी गई है।
परिजनों ने उठाए थे पुलिस की जांच पर सवाल
गौरतलब है कि 12 मई 2026 को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। इस दर्दनाक घटना के बाद ट्विशा के मायके वालों ने स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच और पहले पोस्टमार्टम की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाते हुए सच छुपाने का दावा किया था। न्याय की गुहार लगाते हुए परिवार हाईकोर्ट पहुंचा, जिसके बाद अदालत ने केस भोपाल पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया और दिल्ली एम्स से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। अब यह एम्स रिपोर्ट सीबीआई जांच में एक अहम 'ब्रह्मास्त्र' साबित होने वाली है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।