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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर बोले विनोद तावड़े, 'सिद्धांतों के लिए छोड़ा मंत्री पद, राष्ट्रहित से कभी नहीं किया समझौता'



गुरुग्राम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर विनोद तावड़े ने उनके सिद्धांतों और राष्ट्रसेवा को याद किया। 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

गुरुग्राम स्थित भाजपा कार्यालय गुरुकमल में रविवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े और हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व, राष्ट्रवादी विचारों और उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी ने की। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

'सिद्धांतों के लिए मंत्री पद छोड़ना स्वीकार किया'

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विनोद तावड़े ने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण की भावना से कार्य करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ का चुनाव चिह्न दीपक इसलिए चुना गया था क्योंकि दीपक स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है। उनके अनुसार यही भावना प्रत्येक कार्यकर्ता के जीवन में होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन सिद्धांत, साहस और राष्ट्रसेवा का उदाहरण है। जब उनके सामने सिद्धांत और मंत्री पद में से किसी एक को चुनने की स्थिति आई तो उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्री पद छोड़ना उचित समझा। तावड़े ने कहा कि इतिहास उन्हीं लोगों को याद रखता है जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और डॉ. मुखर्जी ऐसे ही व्यक्तित्व थे।

धारा 370 से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक का किया उल्लेख

विनोद तावड़े ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान' का विचार सामने रखा और जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के विरोध में आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि बिना परमिट जम्मू-कश्मीर जाने के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्होंने राष्ट्र की एकता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। तावड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धारा 370 हटाकर उनके लंबे समय से जुड़े संकल्प को पूरा किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल राजनेता ही नहीं बल्कि एक शिक्षाविद और दूरदर्शी विचारक भी थे। कम उम्र में कुलपति बनने वाले डॉ. मुखर्जी आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी और अध्ययनशील राजनीति के समर्थक थे। उनका मानना था कि विचारवान और अध्ययन करने वाला कार्यकर्ता ही समाज का प्रभावी नेतृत्व कर सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया प्रेरणादायी व्यक्तित्व

हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रहित, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो डॉ. मुखर्जी की सोच के अनुरूप है।

कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी ने राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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