सावन आज से शुरू हो गया है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय 1 गलती पूजा को अधूरी कर सकती है। जानें सही शिव पूजा विधि, नियम और सामग्री।
पवित्र सावन महीने की आज से शुरुआत हो गई है और शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सावन में भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन सही नियमों के बिना यह आराधना अधूरी मानी जाती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने की दिशा से लेकर बर्तनों के चयन तक, एक छोटी सी चूक आपकी पूजा का पूरा फल रोक सकती है। आइए जानते हैं सावन में शिव पूजा की सही विधि, जरूरी सामग्री और महत्वपूर्ण नियम।
सावन में कैसे करें भोलेनाथ की पूजा? (सरल पूजा विधि)
महादेव की कृपा पाने के लिए सावन के दिनों में प्रातः काल उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने घर के पूजा स्थल या किसी नजदीकी शिवालय में जाकर दीप प्रज्वलित करें और व्रत या पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग का शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद पंचामृत और फिर गंगाजल अर्पित करें। भगवान शिव को चंदन का त्रिपुंड लगाएं और भस्म चढ़ाएं। अब भोलेनाथ की प्रिय चीजें जैसे बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते और आक के फूल अर्पित करें। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद धूप-दीप से भगवान की आरती उतारें। पूरी पूजा प्रक्रिया के दौरान मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का स्मरण करते रहें।
शिव पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट
भगवान शिव की आराधना में पवित्रता का विशेष महत्व है, इसलिए पूजा शुरू करने से पहले ही सभी चीजें एकत्रित कर लें।
- अभिषेक के लिए: साफ जल, गंगाजल और पंचामृत (कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद और चीनी का मिश्रण)।
- चढ़ाने के लिए: बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आक के फूल।
- अन्य पूजन सामग्री: सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (चावल), जनेऊ, फल, मिठाई, धूप और दीपक।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के खास नियम: न करें ये गलती
पूजा का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक के दौरान दिशा और समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- सही समय: शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातः 10 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जाता है।
- सही दिशा: जल अर्पित करते समय भक्त का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए (अर्थात दक्षिण दिशा में खड़े हों)। उत्तर दिशा को शिव-पार्वती का निवास माना गया है। भूलकर भी पूर्व या उत्तर दिशा में खड़े होकर जल न चढ़ाएं।
- बर्तनों का चयन: अभिषेक के लिए चांदी, पीतल या तांबे के पात्र का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन सबसे बड़ी सावधानी यह रखनी है कि तांबे के बर्तन में कभी भी दूध डालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
- जल चढ़ाने का तरीका: जल की धार हमेशा पतली और लगातार गिरनी चाहिए। सबसे पहले जलाधारी वाले हिस्से पर जल चढ़ाएं और उसके बाद मुख्य शिवलिंग पर धीरे-धीरे जलाभिषेक करें।


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