कोटा अस्पताल में डिलीवरी के दौरान लापरवाही से 5 प्रसूताओं की किडनियां फेल। दर्द से तंग आकर महिलाओं ने कलेक्टर से मांगी मौत।
राजस्थान के कोटा स्थित नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कथित लापरवाही और नकली दवाओं से पांच प्रसूताओं की दोनों किडनियां फेल होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पिछले 70 दिनों से अस्पताल में भर्ती इन महिलाओं ने बार-बार होने वाले डायलिसिस के दर्द से तंग आकर कोटा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। पीड़ितों ने सरकार से मांग की है कि या तो उनका किडनी ट्रांसप्लांट करवाया जाए या फिर उन्हें जहर दे दिया जाए।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर नकली दवाओं और लापरवाही का आरोप
कोटा के नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां भर्ती पांच महिलाओं— रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन की दोनों किडनियां पूरी तरह से काम करना बंद कर चुकी हैं। मरीजों और उनके परिजनों का सीधा आरोप है कि डिलीवरी के दौरान अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही और कथित तौर पर नकली दवाओं के इस्तेमाल से यह स्थिति पैदा हुई है। जांच के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि इन पांचों मरीजों को अब ताउम्र डायलिसिस के सहारे ही जिंदा रहना होगा।
डायलिसिस के असहनीय दर्द से टूटीं महिलाएं, इलाज से किया इनकार
करीब 70 दिनों से अस्पताल के बेड पर जिंदगी से संघर्ष कर रहीं इन प्रसूताओं का शारीरिक और मानसिक धैर्य अब जवाब दे चुका है। हर दूसरे-तीसरे दिन होने वाले डायलिसिस की पीड़ा उनके लिए बर्दाश्त से बाहर हो गई है। इसी दर्द से हारकर इन पांचों महिलाओं ने कोटा के जिला कलेक्टर को अपने हस्ताक्षर युक्त एक ज्ञापन सौंपा है। महिलाओं ने साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि वे अब और डायलिसिस नहीं करवा सकतीं। उनका कहना है कि या तो सरकार उनके किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करे, अन्यथा उन्हें जहर का इंजेक्शन देकर इस तकलीफ से मुक्ति दे दी जाए।
परिजनों की सरकार से गुहार: 'गलती सिस्टम की, सजा हम क्यों भुगतें?'
पीड़ित धन्नी सुमन के पति मोहनलाल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि 4 मई को उन्होंने अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। सीजेरियन ऑपरेशन के बाद अचानक उसकी किडनियां फेल हो गईं। मोहनलाल ने भावुक होते हुए कहा कि धन्नी डायलिसिस के नाम से ही कांप जाती है और उसने खुद जहर का इंजेक्शन दे देने की बात कही है। वहीं, एक अन्य मरीज रागिनी के भाई विकास ने भी आक्रोश जताते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन की गलती की सजा एक बेकसूर मरीज और उसका पूरा परिवार भुगत रहा है। सभी पीड़ित परिवारों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकारी खर्च पर किडनी ट्रांसप्लांट की जिम्मेदारी नहीं ली गई, तो मरीज डायलिसिस बंद कर देंगी और बिना इलाज के ही अस्पताल में रहेंगी, भले ही उनके प्राण निकल जाएं।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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