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IAS रिंकू सिंह का नियुक्ति विभाग को पत्र: '4 घंटे ही काम है तो आधी सैलरी दें', मंत्री और विधायक पर भी लगाए गंभीर आरोप


IAS रिंकू सिंह राही ने यूपी सरकार को पत्र लिखकर आधी सैलरी लेने की पेशकश की, तैनाती और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप।

उत्तर प्रदेश के 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने जालौन में SDM पद से हटाए जाने के बाद नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को पांच पन्नों का पत्र लिखकर अपनी वर्तमान तैनाती पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि SDM न्यायिक पद पर प्रतिदिन लगभग चार घंटे ही काम रहता है, इसलिए उन्हें आधा वेतन दिया जाए। पत्र में उन्होंने कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक गौरी शंकर वर्मा और जिला प्रशासन से जुड़े कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

SDM पद से हटने के बाद सरकार को लिखा पांच पन्नों का पत्र

जालौन में SDM पद से हटाए जाने के बाद 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने उत्तर प्रदेश के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को विस्तृत पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने अपनी मौजूदा तैनाती और कार्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। राही का कहना है कि SDM न्यायिक के पद पर प्रतिदिन करीब चार घंटे ही कार्य रहता है। ऐसे में यदि सरकार उचित समझे तो उन्हें आधा वेतन ही दिया जाए।

मंत्री और विधायक के नाम का भी किया उल्लेख

अपने पत्र में रिंकू सिंह राही ने उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और बीजेपी विधायक गौरी शंकर वर्मा का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक गौरी शंकर वर्मा की मौजूदगी में जिला अधिकारी ने निर्देश दिए थे कि जालौन तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में कोई कार्रवाई न की जाए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जुड़े कथित अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच को रोकने के लिए षड्यंत्र रचा गया। पत्र में उन्होंने मंत्री के करीबी रिश्तेदार और ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन के कोल्ड स्टोरेज से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया है।

ट्रांसफर को लेकर भी उठाए सवाल

रिंकू सिंह राही ने पत्र में कहा कि पूरे विवाद की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही उनका जालौन के SDM पद से स्थानांतरण कर उन्हें SDM न्यायिक बना दिया गया। उनके अनुसार यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया।

'जनता दर्शन केवल दिखावा' होने का आरोप

पत्र में IAS अधिकारी ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जालौन में आयोजित जनता दर्शन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। उनके अनुसार वहां लोगों की समस्याओं का स्थायी समाधान करने के बजाय केवल तत्कालिक निस्तारण किया जाता है।

आधी सैलरी और नई तैनाती का किया अनुरोध

रिंकू सिंह राही ने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग से अनुरोध किया है कि उन्हें जालौन की किसी अन्य तहसील या फिर किसी अन्य जिले में नियमानुसार कार्य करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में ऐसी व्यवस्था संभव न हो तो उन्हें किसी अन्य राज्य में भेज दिया जाए, जहां लिखित व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप सुशासन लागू करने में प्रशासनिक या राजनीतिक बाधाएं न हों।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि अंतिम निर्णय होने तक वह 22 जुलाई 2026 से अपने कार्य के अनुरूप आधा वेतन लेने का निर्णय कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने विभाग से अनुरोध किया कि उनके इस फैसले को अनुशासनहीनता न मानते हुए सद्भावना के साथ स्वीकार किया जाए।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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