राज्यसभा में भी एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है। अब दोषियों को 10 साल की जेल और 10 करोड़ तक के जुर्माने की सजा मिलेगी।
लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी गुरुवार को भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बीच 'एंटी पेपर लीक बिल' (सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल में पेपर लीक के दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का बेहद कड़ा प्रावधान है। अब इस विधेयक को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक तौर पर कानून का रूप ले लेगा।
विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनि मत से हुआ पास
उच्च सदन (राज्यसभा) में इस अहम विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि निचले सदन (लोकसभा) में लगातार हो रहे व्यवधानों के बावजूद इस पर लगभग 10 घंटे तक लंबी चर्चा हुई और फिर इसे वहां से पारित किया गया। उन्होंने विपक्ष के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि वे भी 2024 के कानून और इस नए संशोधन की आवश्यकता को महसूस कर रहे हैं। भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि NTA (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) का विचार सबसे पहले साल 1992 में आया था, जिसे लागू करने का ऐतिहासिक कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उठाया है।
मल्लिकार्जुन खड़गे का सरकार पर सीधा हमला
बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि सिर्फ सजा या जुर्माना बढ़ा देने भर से पेपर लीक के मामले नहीं रुकने वाले हैं। खड़गे ने दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में देश भर में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन अब तक किसी भी दोषी को सजा नहीं मिल सकी है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह संशोधन बिल छात्रों के भारी आंदोलन और जनदबाव के कारण मजबूरी में लाया गया है।
क्या हैं सजा और जुर्माने के नए कड़े प्रावधान?
'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' में नकल माफिया और पेपर लीक से जुड़े अपराधियों के लिए खौफ पैदा करने वाले नियम बनाए गए हैं:
- व्यक्तिगत दोषियों के लिए: परीक्षा में पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों को अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा भुगतनी होगी।
- संगठित अपराध के लिए: अगर कोई पूरा गिरोह या संस्था पेपर लीक जैसे संगठित अपराध में शामिल पाई जाती है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट का होगा गठन
इस विधेयक में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। केंद्र सरकार को परीक्षा संबंधी अपराधों की गहराई से जांच के लिए एक 'स्पेशल टास्क फोर्स' (STF) बनाने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा बिल में एक नई धारा 12A जोड़ी गई है, जिसके तहत:
- मामले की जांच हर हाल में दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
- अपराधों की रोजाना सुनवाई के लिए सत्र न्यायालयों (Sessions Courts) को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का दर्जा दिया जाएगा।
- चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल होने की तारीख से ठीक तीन महीने के अंदर पूरी सुनवाई खत्म करनी होगी।
- मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए हर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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