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11 दिन तक मौन व्रत रहेंगी साध्वी हर्षा रिछारिया, नर्मदा तट पर शुरू की कठिन तपस्या; बताई बड़ी वजह


साध्वी हर्षा रिछारिया ने जबलपुर के ग्वारीघाट पर 11 दिन की मौन साधना शुरू की, अन्न त्यागकर करेंगी तपस्या।

एक्टर और मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने जबलपुर के ग्वारीघाट स्थित मां नर्मदा तट पर 11 दिवसीय विशेष साधना शुरू कर दी है। इस दौरान वे मौन व्रत रखेंगी, अन्न का त्याग करेंगी और एकांत में रहकर ध्यान-साधना करेंगी। हर्षा ने बताया कि यह तपस्या आत्मिक शुद्धि, विश्व शांति और समाज में सकारात्मक बदलाव की कामना के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को आध्यात्मिक जीवन और मानसिक शांति का संदेश देना भी है।

मां नर्मदा तट पर शुरू हुई विशेष साधना

साध्वी हर्षा रिछारिया जबलपुर के पावन ग्वारीघाट पहुंचीं, जहां उन्होंने मां नर्मदा में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने 11 दिनों तक विशेष तपस्या और मौन साधना का संकल्प लिया। साधना के दौरान वे किसी से बातचीत नहीं करेंगी और अन्न ग्रहण भी नहीं करेंगी। इसके अलावा वे जूते-चप्पल का भी त्याग करेंगी और नर्मदा तट पर एकांत में रहकर ध्यान करेंगी।

हर्षा रिछारिया ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि खुद से जुड़ने का समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में मौन साधना और ध्यान व्यक्ति को आत्मचिंतन का अवसर देता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

साधना के पीछे बताई यह बड़ी वजह

साध्वी हर्षा रिछारिया ने कहा कि उनकी इस तपस्या का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं है, बल्कि समाज और देश के लिए प्रार्थना करना भी है। उन्होंने बताया कि वे विश्व शांति, भारत की आर्थिक स्थिरता और समाज में सकारात्मक बदलाव की कामना कर रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि बेटियों को लव जिहाद जैसी घटनाओं से बचाने और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का संकल्प भी उनकी साधना का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, जिसका असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों ने लोगों को मानसिक रूप से भी प्रभावित किया है। ऐसे में आध्यात्मिक साधना और ध्यान मन को स्थिर करने का माध्यम बन सकते हैं।

2012 से नर्मदा तट से जुड़ा है खास रिश्ता

हर्षा रिछारिया ने बताया कि उनका मां नर्मदा और ग्वारीघाट से पुराना आध्यात्मिक संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में जीवन के कठिन समय के दौरान उन्हें मां नर्मदा से आध्यात्मिक शक्ति और मार्गदर्शन मिला था। यही वजह है कि उन्होंने इस विशेष साधना के लिए ग्वारीघाट को चुना।

उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि जो लोग तनाव, चिंता और मानसिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं, उन्हें कुछ समय ध्यान, मौन व्रत और आत्मचिंतन के लिए जरूर निकालना चाहिए। इससे मानसिक संतुलन मजबूत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

साध्वी हर्षा रिछारिया ने बताया कि उनकी 11 दिवसीय साधना 15 जून को पूरी होगी। साधना पूर्ण होने के बाद वे ग्वारीघाट पर मां नर्मदा की आरती करेंगी और प्रसाद वितरण के साथ इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का समापन करेंगी।

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