PREMIUM AD SPACE
अपने बिजनेस को दें बड़ी पहचान
Vishwa Media पर Premium Advertising Space बुक करें
WhatsApp पर BOOK NOW

ताजा खबरें

5/National/ticker-posts

बड़ी खबरें

Recent/hot-post

‘NEET दोबारा देने की हिम्मत नहीं बची…’ डॉक्टर बनने का सपना टूटा तो 18 साल की आकांक्षा ने दी जान, सुसाइड नोट पढ़ रो पड़ा परिवार



NEET परीक्षा विवाद के तनाव में मऊगंज की छात्रा आकांक्षा ने आत्महत्या की, सुसाइड नोट ने परिवार को तोड़ दिया।

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार का दावा है कि NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की आशंका से वह लगातार मानसिक तनाव में थी। घटना के बाद कमरे से मिले सुसाइड नोट में आकांक्षा ने लिखा कि उसमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है। बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए परिवार ने लाखों रुपये का कर्ज लिया था और नागपुर में रहकर उसकी पढ़ाई कराई जा रही थी।

डॉक्टर बनने का सपना और परिवार की बड़ी उम्मीदें

आकांक्षा चतुर्वेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था, लेकिन बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना पूरे परिवार ने मिलकर देखा था। बेहतर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए परिवार कुछ समय पहले नागपुर शिफ्ट हो गया था।

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चौबे खेती करते हैं। बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने नागपुर में कुक का काम भी शुरू कर दिया था। परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों से भी मदद लेकर आकांक्षा की कोचिंग और पढ़ाई का खर्च चलाया जा रहा था।

परिजनों के मुताबिक आकांक्षा पढ़ाई में काफी मेहनती थी और पिछले लंबे समय से NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परीक्षा देने के बाद वह अपने प्रदर्शन को लेकर काफी संतुष्ट दिखाई दे रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में चयन हो सकता है।

परीक्षा विवाद के बाद बढ़ने लगा तनाव

परिवार का कहना है कि परीक्षा को लेकर सामने आ रही खबरों और अनिश्चितताओं ने आकांक्षा को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। वह लगातार तनाव में रहने लगी थी और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर करती थी।

बताया जा रहा है कि आकांक्षा को डर था कि अगर परीक्षा दोबारा हुई तो वह उसी स्तर की तैयारी दोबारा नहीं कर पाएगी। इसी चिंता ने उसे अंदर से कमजोर कर दिया। परिजनों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह काफी चुप रहने लगी थी और ज्यादा बातचीत भी नहीं कर रही थी।

20 मई 2026 को आकांक्षा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे की जांच की गई।

सुसाइड नोट ने परिवार को तोड़ दिया

घटना के बाद पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला। नोट में आकांक्षा ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उन्हें उस पर भरोसा था कि वह डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब उसमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है।

उसने लिखा कि उसे पहले अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन अब भविष्य को लेकर वह आश्वस्त नहीं थी। सुसाइड नोट सामने आने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। गांव और आसपास के इलाके में भी इस घटना के बाद शोक का माहौल है।

आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और आर्थिक बोझ को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई। परिवार को आर्थिक मदद देने की भी घोषणा की गई है। साथ ही परिवार पर मौजूद कर्ज के भुगतान में सहयोग का भरोसा दिया गया है।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। वहीं, आकांक्षा की मौत ने हजारों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता को फिर सामने ला दिया है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और भविष्य की अनिश्चितता के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ