लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में भीषण आग से 15 की मौत। बायोमेट्रिक गेट लॉक होने और फायर सेफ्टी न होने से गई जान। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में भयंकर आग लगने से 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं थे। आग लगने पर बिजली गुल हो गई, जिससे मुख्य दरवाजे का बायोमेट्रिक सिस्टम लॉक हो गया और लोग अंदर ही फंस गए। इस हादसे ने प्रशासन और बिल्डिंग मालिकों की गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी है।
बायोमेट्रिक गेट बना 'मौत का फंदा'
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस कमर्शियल बिल्डिंग के ऑफिस का मुख्य गेट थंब इम्प्रेशन (बायोमेट्रिक सिस्टम) के जरिए ही खुलता था। जैसे ही इमारत में आग लगी, बिजली और सिस्टम फेल हो गए। इसके कारण ऑटोमैटिक गेट पूरी तरह से लॉक हो गया। अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का कोई मौका ही नहीं मिला और वे आग और धुएं के बीच फंसकर रह गए।
न इमरजेंसी एग्जिट, न फायर सेफ्टी के इंतजाम
जांच में यह चौंकाने वाला सच भी सामने आया है कि पूरी बिल्डिंग में कोई 'इमरजेंसी एग्जिट' (आपातकालीन रास्ता) नहीं बनाया गया था। इसके अलावा इमारत में आग बुझाने वाले उपकरणों और फायर सेफ्टी सिस्टम का पूरी तरह से अभाव था। इस बिल्डिंग में लंबे समय से पेट शॉप, लाइब्रेरी और एनिमेशन सेंटर जैसी कई गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रखा गया था।
LDA की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस बिल्डिंग की जमीन रामेश्वरम इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मालिक वीरेंद्र शुक्ला के नाम पर बताई जा रही है, जबकि नक्शा सुरेंद्र और धीरेंद्र शुक्ला के नाम से पास है। साल 2014 में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने एक आवासीय भवन (Residential) को कमर्शियल उपयोग में बदलने की मंजूरी दे दी थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि LDA ने बिना फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों की जांच किए इस कमर्शियल बिल्डिंग का नक्शा कैसे पास कर दिया? हर बार की तरह प्रशासन हादसे के बाद ही जागता नजर आ रहा है।
साभार: प्राप्त न्यूज़ रिपोर्ट्स के आधार पर


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