बरेली में हवाला कारोबार का बड़ा खुलासा, 35 लाख कैश बरामद। फर्जी कंपनी के जरिए दिल्ली-दुबई तक फैला था नेटवर्क।
उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने हवाला कारोबार के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान 35 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन और फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क बरेली से दिल्ली और दुबई तक फैला हुआ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी कंपनी बनाकर संदिग्ध लेनदेन कर रहे थे और बिना किसी रिकॉर्ड के करोड़ों रुपये इधर से उधर पहुंचाए जा रहे थे। मामले में कई और लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
माधोबाड़ी इलाके में छापेमारी के दौरान हुआ खुलासा
बरेली पुलिस को लंबे समय से अवैध धन के लेनदेन की सूचना मिल रही थी। इसके बाद एसओजी और बारादरी थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए माधोबाड़ी इलाके में छापा मारा। पुलिस की कार्रवाई के दौरान हजियापुर निवासी जमीर अहमद और राजस्थान के बीकानेर निवासी जगदीश चोटिया को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान पुलिस को उनके पास से 35 लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और दो फर्जी आधार कार्ड मिले।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कई अहम जानकारियां दी हैं। बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़ी रकम का हवाला कारोबार संचालित किया जा रहा था।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ और किन-किन लोगों तक पैसा पहुंचाया जाता था।
‘केजीएन’ नाम की कंपनी बनी हवाला कारोबार का जरिया
पुलिस जांच में सबसे बड़ा खुलासा ‘केजीएन’ नाम की कंपनी को लेकर हुआ है। जांच में सामने आया कि कंपनी केवल कागजों में मौजूद थी और उसका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। कंपनी का कार्यालय पीलीभीत बाईपास रोड स्थित आशुतोष सिटी क्षेत्र में दिखाया गया था।
पुलिस के मुताबिक इसी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए किया जा रहा था। खातों में बड़ी रकम जमा होती थी और फिर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि हवाला कारोबार को छिपाने के लिए टोकन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था। इस सिस्टम में नकदी का लेनदेन बिना किसी लिखित रिकॉर्ड के किया जाता था ताकि जांच एजेंसियों को कोई दस्तावेजी सबूत न मिल सके।
गिरफ्तार आरोपी जमीर अहमद ने पूछताछ में बताया कि उसने यह कंपनी दुबई में रहने वाले अली जीशान के कहने पर खुलवाई थी। कंपनी मोईन अली के नाम पर बनाई गई थी और उसी के जरिए पैसों का लेनदेन किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी कंपनी के जरिए कितने समय से हवाला कारोबार चल रहा था।
दिल्ली और दुबई तक जुड़े मिले नेटवर्क के तार
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी जगदीश चोटिया पिछले करीब चार साल से इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक वह दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करता था। इसी वजह से पुलिस को इस पूरे नेटवर्क के दिल्ली और दुबई से जुड़े होने की आशंका है।
मामले में मोईन अली, लालचंद और धम्माराम समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा सके।
पुलिस को उम्मीद है कि बैंक खातों, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच से हवाला कारोबार की कई और परतें खुल सकती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।


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