चार साल बाद यूपी को स्थायी DGP मिलने जा रहा है। UPSC पैनल में राजीव कृष्ण समेत 3 IPS अफसरों के नाम फाइनल।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार साल बाद स्थायी डीजीपी मिलने की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार को दिल्ली में होने वाली UPSC की अहम बैठक में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। इस पैनल में 1990 बैच की रेणुका मिश्रा और 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद व वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं और उनका स्थायी डीजीपी बनना लगभग तय माना जा रहा है। यूपी पुलिस लंबे समय से कार्यवाहक नेतृत्व में चल रही थी, ऐसे में अब स्थायी पुलिस प्रमुख मिलने से प्रशासनिक स्थिरता और बड़े स्तर पर रणनीतिक बदलाव की उम्मीद बढ़ गई है।
दिल्ली में UPSC की बैठक पर टिकी पूरे यूपी पुलिस महकमे की नजर
उत्तर प्रदेश के नए स्थायी डीजीपी को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चाएं तेज थीं, लेकिन अब इस प्रक्रिया ने निर्णायक रूप ले लिया है। मंगलवार को दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की बैठक होने जा रही है, जिसमें यूपी सरकार की तरफ से मुख्य सचिव एसपी गोयल शामिल होंगे। इसी बैठक में यूपी पुलिस के शीर्ष पद के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल अंतिम रूप से तैयार किया जाएगा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी राज्य में डीजीपी की नियुक्ति UPSC द्वारा तैयार किए गए पैनल से की जाती है। आयोग वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और कार्यशैली जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर नामों का चयन करता है। इसके बाद राज्य सरकार पैनल में शामिल तीन अधिकारियों में से किसी एक को स्थायी डीजीपी नियुक्त करती है।
यूपी जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में डीजीपी का पद बेहद अहम माना जाता है। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, एंटी माफिया अभियान, महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम और खुफिया रणनीतियों जैसे बड़े फैसले इसी पद से प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि इस नियुक्ति पर पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे की नजर बनी हुई है।
राजीव कृष्ण क्यों माने जा रहे सबसे मजबूत दावेदार?
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण फिलहाल उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी हैं। उन्हें प्रशासनिक अनुभव, सरकार के साथ बेहतर समन्वय और मौजूदा कानून-व्यवस्था को संभालने की क्षमता के चलते सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
राजीव कृष्ण लंबे समय तक यूपी पुलिस के कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। उन्हें शांत लेकिन प्रभावी प्रशासनिक शैली वाला अधिकारी माना जाता है। वर्तमान समय में प्रदेश सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर काफी सख्त रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार किसी ऐसे अधिकारी को स्थायी डीजीपी बनाना चाहती है जो पहले से पूरे सिस्टम को समझता हो और तत्काल फैसले लेने की क्षमता रखता हो।
सूत्रों के अनुसार, सरकार भी नेतृत्व में अचानक बदलाव की जगह निरंतरता चाहती है। यही कारण है कि राजीव कृष्ण का नाम सबसे आगे चल रहा है। पिछले कुछ समय में उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को संभाला है और पुलिस विभाग के अंदर भी उनकी कार्यशैली को लेकर सकारात्मक संदेश माना जाता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि UPSC पैनल में उनका नाम शामिल होता है तो अंतिम मुहर लगभग तय मानी जाएगी। हालांकि औपचारिक घोषणा यूपी सरकार द्वारा ही की जाएगी।
रेणुका मिश्रा की सीनियरिटी बनी बड़ी ताकत, लेकिन विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें
1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा इस पैनल में सबसे वरिष्ठ अधिकारी मानी जा रही हैं। उन्होंने बीकॉम, एमए इकोनॉमिक्स और पुलिस प्रशासन में एमए जैसी उच्च शिक्षा हासिल की है। उनका प्रशासनिक अनुभव भी काफी लंबा रहा है।
रेणुका मिश्रा पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। मई 2021 में उन्हें डीजी पद पर प्रमोशन मिला था। महिला अधिकारी होने के साथ-साथ उनकी प्रशासनिक छवि भी मजबूत मानी जाती रही है।
हालांकि पिछले कुछ समय में उनका नाम सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले के बाद चर्चाओं में आया था। जुलाई 2024 के बाद से उन्हें कोई नियमित तैनाती नहीं मिलने की बात भी सामने आई थी। यही कारण माना जा रहा है कि वरिष्ठता में सबसे ऊपर होने के बावजूद उनकी दावेदारी थोड़ी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
फिर भी UPSC की प्रक्रिया में वरिष्ठता को अहम माना जाता है, इसलिए उनका नाम पैनल में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। यदि किसी कारण से सरकार अनुभव और सीनियरिटी को प्राथमिकता देती है तो रेणुका मिश्रा बड़ा चेहरा बन सकती हैं।
IIT से पढ़े IPS पीयूष आनंद का लंबा प्रशासनिक अनुभव
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद भी इस रेस के मजबूत चेहरों में शामिल हैं। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF के महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में उनके कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाया भी गया था।
पीयूष आनंद का शैक्षणिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड काफी मजबूत माना जाता है। उन्होंने IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है और MDI गुरुग्राम से पब्लिक पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
यूपी पुलिस में रहते हुए उन्होंने 11 जिलों में एसपी और एसएसपी के रूप में काम किया। इसके अलावा वे करीब सात साल तक CBI में भी रहे। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF में ADG और स्पेशल DG जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाल चुके हैं।
उनकी छवि एक प्रोफेशनल और टेक्नोलॉजी फ्रेंडली अधिकारी की रही है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में यह माना जा रहा है कि राज्य सरकार प्रदेश में पहले से सक्रिय अधिकारी को प्राथमिकता दे सकती है, जिसके कारण उनकी संभावनाएं थोड़ी कम दिखाई दे रही हैं।
आखिर 4 साल तक क्यों नहीं मिला यूपी को स्थायी DGP?
उत्तर प्रदेश में मई 2022 के बाद से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो पाई थी। मणीलाल गोयल के बाद से राज्य पुलिस कार्यवाहक नेतृत्व में काम कर रही थी। इस दौरान कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन UPSC पैनल और सेवा नियमों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी बड़े राज्य में लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी का रहना प्रशासनिक रूप से आदर्श स्थिति नहीं माना जाता। स्थायी डीजीपी को लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने और बड़े स्तर पर पुलिस सुधार लागू करने का अवसर मिलता है।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में माफिया विरोधी अभियान, एनकाउंटर नीति, महिला सुरक्षा अभियान, साइबर अपराध नियंत्रण और धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे लगातार केंद्र में रहे हैं। ऐसे में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थायी डीजीपी बनने के बाद क्या बदल सकता है?
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के बाद यूपी पुलिस में कई स्तरों पर प्रशासनिक स्थिरता आने की उम्मीद है। पुलिस महकमे में लंबे समय की रणनीति बनाना आसान होगा। अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर कानून-व्यवस्था के बड़े फैसलों तक स्पष्ट नेतृत्व दिखाई देगा।
इसके अलावा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में कई बड़े धार्मिक आयोजन, चुनावी गतिविधियां और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां सामने आने वाली हैं। ऐसे में सरकार एक ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी देना चाहती है जो राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर भरोसेमंद साबित हो सके।
अब सबकी नजर UPSC की बैठक और उसके बाद यूपी सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। अगर सूत्रों की मानें तो राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा।


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