नुसरत भरूचा के महाकाल दर्शन पर मौलाना का बयान विवादों में, निजी आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और गंगा-जमुनी तहजीब पर छिड़ी बहस
उज्जैन में महाकाल दर्शन और विवाद की शुरुआत
बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है, जिसने धार्मिक, सामाजिक और संवैधानिक बहस को एक साथ छेड़ दिया है। नुसरत भरूचा हाल ही में उज्जैन पहुंचीं, जहां उन्होंने तड़के होने वाली भस्म आरती में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए उन्होंने भगवान महाकाल को जल अर्पित किया, शिवलिंग के समक्ष नमन किया और प्रसाद भी ग्रहण किया। यह पूरा दृश्य सामान्य धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जा रहा था, लेकिन जैसे ही इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगा।
सोशल मीडिया से सियासत और धर्म तक पहुंचा मामला
नुसरत भरूचा के महाकाल दर्शन की तस्वीरें पहले उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनीं। कई लोगों ने इसे आस्था और सांस्कृतिक सौहार्द का उदाहरण बताया। लेकिन कुछ ही घंटों में यह विषय धार्मिक बहस में तब्दील हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसको लेकर अलग-अलग विचार सामने आने लगे। कोई इसे निजी आस्था बता रहा था तो कोई धर्म के नियमों की दुहाई दे रहा था। इसी बीच बरेली से एक बयान सामने आया, जिसने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर की बहस में बदल दिया।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान और बढ़ता विवाद
उत्तर प्रदेश के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने नुसरत भरूचा के मंदिर दर्शन पर कड़ा ऐतराज जताया। मीडिया से बातचीत में मौलाना ने कहा कि किसी मुस्लिम महिला का गैर-इस्लामी धर्मस्थल पर जाकर पूजा करना, जल चढ़ाना और प्रसाद लेना इस्लाम के उसूलों और शरीयत के खिलाफ है। उन्होंने इसे इस्लाम में हराम बताते हुए कहा कि यह गुनाह की श्रेणी में आता है। मौलाना ने यहां तक कहा कि नुसरत भरूचा को अपने इस कृत्य पर तौबा करनी चाहिए और अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए।
उज्जैन के संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया
मौलाना के बयान पर उज्जैन के संत समाज ने खुलकर नाराजगी जाहिर की। कई साधु-संतों ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने और किसी भी धर्मस्थल पर जाने का संवैधानिक अधिकार है। संतों का कहना है कि नुसरत भरूचा का महाकाल मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बयान समाज में वैमनस्य फैलाने का काम करते हैं।
गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण या धार्मिक टकराव
उज्जैन के कई संतों और स्थानीय लोगों ने नुसरत भरूचा के मंदिर दर्शन को गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि भारत की पहचान हमेशा से धार्मिक विविधता और आपसी सम्मान रही है। यहां सदियों से अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते आए हैं। संतों ने कहा कि किसी कलाकार या आम नागरिक का किसी भी धर्मस्थल पर जाना भाईचारे और सौहार्द का संदेश देता है, न कि किसी धर्म के खिलाफ जाता है।
बॉलीवुड और धार्मिक विवादों का पुराना रिश्ता
यह पहली बार नहीं है जब किसी बॉलीवुड सेलेब्रिटी की धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी कई कलाकारों के मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे जाने पर बहस होती रही है। कभी इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया गया, तो कभी निजी आस्था। लेकिन हर बार यह मुद्दा कुछ समय बाद शांत हो जाता है। नुसरत भरूचा का मामला भी उसी कड़ी का एक नया अध्याय बनता नजर आ रहा है।
नुसरत भरूचा का करियर और सार्वजनिक छवि
नुसरत भरूचा बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शुमार हैं। उन्होंने प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी और ड्रीम गर्ल जैसी सफल फिल्मों में काम कर अपनी पहचान बनाई है। नुसरत अपनी सादगी, बेबाक बयानों और खुले विचारों के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। उनके प्रशंसकों का कहना है कि नुसरत का मंदिर जाना किसी भी तरह से चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि वह हमेशा से सभी संस्कृतियों का सम्मान करती आई हैं।


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