स्कूल में बुर्का पहनकर ‘धुरंधर’ गाने पर डांस, वीडियो वायरल होते ही अमरोहा में मचा बवाल… मुस्लिम संगठनों का आक्रोश, प्रिंसिपल ने मांगी सार्वजनिक माफी




अमरोहा के प्राइवेट स्कूल में बुर्का पहनकर डांस का वीडियो वायरल, धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप, प्रिंसिपल ने मांगी माफी


अमरोहा में वायरल वीडियो से उठा धार्मिक और सामाजिक विवाद

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्यभर में धार्मिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। वायरल वीडियो एक प्राइवेट स्कूल के वार्षिक कार्निवाल कार्यक्रम का बताया जा रहा है, जिसमें कुछ स्कूली छात्र बुर्का पहनकर फिल्म ‘धुरंधर’ के गाने पर डांस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही यह आरोप लगने लगे कि कार्यक्रम के दौरान इस्लाम धर्म, बुर्का और मुस्लिम धार्मिक पहचान का मजाक उड़ाया गया है, जिससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

किस स्कूल का है वीडियो और कब का बताया जा रहा है कार्यक्रम

वायरल क्लिप को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह अमरोहा स्थित मेस्को पब्लिक स्कूल का है। बताया जा रहा है कि स्कूल में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने मंच पर बुर्का पहनकर फिल्मी गाने पर डांस किया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद दर्शकों में पहले तो इसे एक सामान्य परफॉर्मेंस के रूप में देखा गया, लेकिन जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही विवाद ने तूल पकड़ लिया। कई यूजर्स और संगठनों ने इसे सीधे तौर पर मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों का मजाक करार दिया।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही भड़का आक्रोश

वीडियो को सबसे पहले सोशल मीडिया हैंडल ‘टीम राइजिंग फाल्कन’ द्वारा शेयर किए जाने की बात सामने आ रही है। पोस्ट के साथ यह दावा किया गया कि बुर्का और हिजाब जैसी धार्मिक पहचान को हास्य और मनोरंजन का विषय बनाकर पेश किया गया है। देखते ही देखते वीडियो फेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स में वायरल हो गया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों और संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

मुस्लिम कमेटी की सख्त प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग

मामले पर मुस्लिम कमेटी अमरोहा के नेता मंसूर अहमद एडवोकेट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि एक ऐसा स्कूल, जो खुद को अनुशासित और नैतिक शिक्षा का केंद्र बताता है, वहां इस तरह का कार्यक्रम आयोजित होता है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्कूल की मान्यता रद्द करने, जिम्मेदार छात्रों पर कार्रवाई करने और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। उनके अनुसार, यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचेगा।

“अगर मुस्लिम स्कूल में ही मजाक बनेगा धर्म” – लोगों की नाराजगी

विवाद बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई। कई लोगों का कहना है कि यदि किसी मुस्लिम बहुल क्षेत्र या मुस्लिम पृष्ठभूमि से जुड़े स्कूल में ही इस्लाम और बुर्के का इस तरह मजाक उड़ाया जाएगा, तो समाज में क्या संदेश जाएगा। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स में यह सवाल उठाया गया कि क्या स्कूल प्रबंधन को कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रस्तुति की जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर ऐसी परफॉर्मेंस को अनुमति दी गई।

स्कूल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

वायरल वीडियो के बाद स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे। लोग पूछने लगे कि क्या कार्यक्रम से पहले परफॉर्मेंस की स्क्रिप्ट या कॉन्सेप्ट की जांच नहीं की गई थी। क्या शिक्षकों और आयोजकों की मौजूदगी में यह डांस हुआ या फिर बच्चों को खुली छूट दे दी गई थी। शिक्षा संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे छात्रों को आपसी सम्मान, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाएं, लेकिन इस घटना ने स्कूल प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया।

बढ़ते विवाद के बीच प्रिंसिपल का माफीनामा

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से एक पत्र सार्वजनिक तौर पर जारी किया गया। इस पत्र में उन्होंने कार्यक्रम के दौरान हुई इस प्रस्तुति पर खेद व्यक्त किया और कहा कि स्कूल प्रशासन का किसी भी धर्म या धार्मिक प्रतीक का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। प्रिंसिपल ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि किसी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं तो स्कूल इसके लिए दिल से माफी मांगता है।

भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक का दावा

माफीनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि आगे से स्कूल में किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे। किसी भी परफॉर्मेंस को मंच पर प्रस्तुत करने से पहले उसकी पूरी जांच की जाएगी ताकि किसी भी धर्म, समुदाय या वर्ग की भावनाएं आहत न हों। प्रिंसिपल ने यह भरोसा भी दिलाया कि इस मामले में नियमों के अनुसार जिम्मेदार छात्रों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

क्या बच्चों की नादानी या सिस्टम की चूक

इस पूरे विवाद में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह बच्चों की नासमझी थी या फिर सिस्टम की गंभीर चूक। कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि छात्र कम उम्र के होते हैं और कई बार वे किसी परफॉर्मेंस के सामाजिक या धार्मिक प्रभाव को समझ नहीं पाते। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि बच्चों को मंच पर भेजने से पहले शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वे सामग्री की समीक्षा करें।

शिक्षा और संवेदनशीलता पर नई बहस

अमरोहा का यह मामला अब केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा प्रणाली में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य विविधता का सम्मान करना और आपसी समझ को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना।

प्रशासन की नजर और संभावित जांच

हालांकि खबर लिखे जाने तक स्थानीय प्रशासन की ओर से किसी औपचारिक जांच के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मामला जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के संज्ञान में आ चुका है। यदि शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज की जाती है तो स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया जा सकता है और नियमों के तहत कार्रवाई भी संभव है।



पहले भी विवादों में रहा है स्कूल

सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के अनुसार, मेस्को पब्लिक स्कूल पहले भी कुछ विवादों को लेकर चर्चा में रह चुका है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो के साथ इस तरह की बातें सामने आने से स्कूल की छवि पर असर जरूर पड़ा है।

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