बूथ-बूथ पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, SIR विशेष पुनरीक्षण में गड़बड़ियों पर सख्त संदेश



मछलीशहर में SIR विशेष पुनरीक्षण की जमीनी जांच, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बूथों पर जाकर फार्म-6 और सूची वाचन की स्थिति परखी।

इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट 


मछलीशहर में SIR विशेष पुनरीक्षण की सघन निगरानी

मछलीशहर क्षेत्र में रविवार को चल रहे एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम ने प्रशासनिक सक्रियता का स्पष्ट संकेत दिया। मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने इस बार सिर्फ कागजी रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर हालात को परखने का फैसला किया। इसी क्रम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ स्वयं कई बूथों पर पहुंचे और मतदाता पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों की अद्यतन स्थिति का जायजा लिया। यह निरीक्षण केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि हर स्तर पर प्रक्रिया की वास्तविक प्रगति समझने का प्रयास था, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की चूक न रहे।

बूथ-बूथ पहुंचकर कार्य की पड़ताल

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ ने नायब तहसीलदार संतोष कुमार यादव के साथ मिलकर क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण बूथों का निरीक्षण किया। इस दौरान खरुआवा, बिहारी महिला महाविद्यालय, गोहका और निजामुद्दीनपुर जैसे स्थानों पर बनाए गए बूथों पर पहुंचकर उन्होंने एसआईआर विशेष पुनरीक्षण की जमीनी स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी ने यह जानने की कोशिश की कि मतदाता सूची अद्यतन करने का कार्य कितनी पारदर्शिता और गंभीरता से किया जा रहा है। हर बूथ पर पहुंचकर उन्होंने बीएलओ और सुपरवाइजर से सीधे संवाद किया और उनसे प्रक्रिया की प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी ली।

फार्म-6 की जांच और सूची वाचन पर जोर

निरीक्षण के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बूथों पर भरे गए फार्म-6 की स्थिति को विशेष रूप से देखा। फार्म-6 नए मतदाता के नाम जोड़ने, त्रुटि सुधार और अन्य आवश्यक संशोधनों के लिए सबसे अहम दस्तावेज होता है। अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया कि सभी आवेदन सही तरीके से भरे गए हों और उनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जांचा कि बूथों पर मतदाता सूची को पढ़कर सुनाने की प्रक्रिया वास्तव में अपनाई जा रही है या नहीं। सूची वाचन का उद्देश्य यह होता है कि आम नागरिक स्वयं यह पुष्टि कर सकें कि उनका नाम सूची में सही ढंग से दर्ज है या नहीं।

मतदाताओं से सीधा संवाद, समस्याओं के समाधान के निर्देश

निरीक्षण के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बूथों पर मौजूद मतदाताओं से भी बातचीत की। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उन्हें सूची वाचन के दौरान कोई दिक्कत महसूस हुई या किसी प्रकार की त्रुटि नजर आई। अधिकारियों ने मतदाताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि सूची में नाम, पता या अन्य किसी जानकारी में कोई गलती हो, तो वे तुरंत संबंधित बीएलओ से संपर्क करें। प्रशासन की ओर से यह संदेश साफ था कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा और उसे समय रहते दुरुस्त किया जाएगा।

बीएलओ और सुपरवाइजर की भूमिका पर प्रशासन की नजर

एसआईआर विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम में बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ की भूमिका बेहद अहम होती है। निरीक्षण के दौरान सभी बूथों पर बीएलओ और सुपरवाइजर की मौजूदगी दर्ज की गई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने उनसे यह भी पूछा कि वे प्रतिदिन कितने आवेदन प्राप्त कर रहे हैं और उनका निस्तारण किस गति से हो रहा है। साथ ही यह भी देखा गया कि क्या बीएलओ द्वारा मतदाताओं को सही जानकारी दी जा रही है और उन्हें प्रक्रिया समझाने में कोई कोताही तो नहीं बरती जा रही। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि इस तरह के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की तैयारी

एसआईआर विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम को आगामी चुनावों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की बुनियाद होती है। यदि सूची में नाम छूट जाएं या गलतियां रह जाएं, तो इससे न केवल नागरिकों के अधिकार प्रभावित होते हैं बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। इसी वजह से प्रशासन इस बार हर स्तर पर सख्ती और पारदर्शिता बरतने के मूड में नजर आया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का खुद बूथों पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि सरकार और प्रशासन मतदाता सूची के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा प्रशासनिक संदेश

खरुआवा, गोहका और निजामुद्दीनपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में बूथ निरीक्षण के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि प्रशासन केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। गांवों में रहने वाले मतदाताओं को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीण मतदाताओं को आश्वस्त किया कि उनके नाम, पहचान और अधिकार सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वे सीधे बीएलओ या संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसा कायम करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

चुनावी सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही

एसआईआर विशेष पुनरीक्षण केवल नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह चुनावी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने निरीक्षण के दौरान यह भी कहा कि हर अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय है। यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। इस तरह के स्पष्ट संदेश से निचले स्तर के कर्मचारियों में भी सतर्कता देखी गई और कामकाज में गंभीरता नजर आई।

मतदाता जागरूकता पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने मतदाता जागरूकता को भी खास महत्व दिया। बूथों पर मौजूद लोगों को यह समझाया गया कि मतदाता सूची में नाम होना क्यों जरूरी है और इसमें किसी भी प्रकार की गलती भविष्य में किस तरह की परेशानी पैदा कर सकती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे सूची को ध्यान से देखें और समय रहते सुधार कराएं। यह जागरूकता अभियान लंबे समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक माना जा रहा है।

प्रशासनिक निरीक्षण से बढ़ा भरोसा

मछलीशहर क्षेत्र में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के इस औचक निरीक्षण से स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है। आम मतदाताओं का कहना है कि जब बड़े अधिकारी खुद मौके पर आकर काम की समीक्षा करते हैं, तो इससे न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ती है बल्कि नागरिकों को भी यह भरोसा मिलता है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। एसआईआर विशेष पुनरीक्षण के दौरान इस तरह की सक्रियता को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आगे भी जारी रहेगी निगरानी

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एसआईआर विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान इस तरह की निगरानी आगे भी जारी रहेगी। केवल एक दिन या एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर, आने वाले दिनों में अन्य बूथों पर भी इसी तरह निरीक्षण किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और विवाद-रहित रहे। मछलीशहर में शुरू हुई यह सख्त निगरानी व्यवस्था आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकती है।

इस तरह मछलीशहर में एसआईआर विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की बूथ-स्तरीय जांच ने प्रशासन की गंभीरता और चुनावी पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता को साफ तौर पर उजागर कर दिया है।

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