मछलीशहर अधिवक्ता समिति चुनाव 2026 के नतीजे घोषित, अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव और महामंत्री आलोक विश्वकर्मा निर्वाचित।
इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट
अधिवक्ता भवन में मतगणना, पूरे दिन चला लोकतंत्र का उत्सव
मछलीशहर तहसील परिसर स्थित अधिवक्ता भवन शुक्रवार को पूरी तरह लोकतांत्रिक माहौल में तब्दील नजर आया, जब अधिवक्ता समिति के बहुप्रतीक्षित चुनाव की मतगणना प्रक्रिया संपन्न हुई। सुबह से ही अधिवक्ता भवन और उसके आसपास हलचल तेज थी। प्रत्याशियों के समर्थक, वरिष्ठ अधिवक्ता, युवा वकील और चुनाव समिति के सदस्य पूरी गंभीरता और अनुशासन के साथ मतगणना की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति न उत्पन्न हो।
यह चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि मछलीशहर बार की भविष्य की दिशा, अधिवक्ताओं की एकता और संगठनात्मक मजबूती का भी प्रतीक माना जा रहा था। यही कारण रहा कि मतदान से लेकर मतगणना तक हर चरण पर अधिवक्ताओं की गहरी दिलचस्पी देखने को मिली।
अध्यक्ष पद पर जितेंद्र श्रीवास्तव की शानदार विजय, 25 मतों से बाजी मारी
अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का रहा। मतगणना के दौरान जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ते गए, पूरे अधिवक्ता भवन में सन्नाटा और उत्सुकता दोनों साफ महसूस की जा सकती थी। अंततः जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो अध्यक्ष पद पर जितेंद्र श्रीवास्तव ने 164 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बाबू राम को 25 मतों के अंतर से पराजित किया, जिन्हें कुल 139 मत मिले।
जितेंद्र श्रीवास्तव की इस जीत को उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव, अधिवक्ताओं के बीच मजबूत पकड़ और चुनावी रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई और अधिवक्ता भवन जयकारों से गूंज उठा।
महामंत्री पद पर आलोक विश्वकर्मा का दबदबा, 75 मतों से ऐतिहासिक जीत
महामंत्री पद का चुनाव इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस पद के लिए कई प्रत्याशी मैदान में थे, जिससे मुकाबला बहुकोणीय बन गया था। लेकिन मतगणना के नतीजों ने साफ कर दिया कि अधिवक्ताओं का भरोसा किसके साथ है।
आलोक विश्वकर्मा ने महामंत्री पद पर 160 मत हासिल कर 75 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बृजेश कुमार को 85 मत प्राप्त हुए, जबकि वेद प्रकाश श्रीवास्तव को 42, सुभाष चंद्र मौर्य को 13 और संजय कुमार को मात्र 3 मत मिले।
यह जीत सिर्फ संख्या की नहीं, बल्कि संगठन में आलोक विश्वकर्मा की स्वीकार्यता और भरोसे की मजबूत मुहर मानी जा रही है। अधिवक्ताओं का मानना है कि महामंत्री पद पर उनका चयन बार के प्रशासनिक कार्यों को नई गति देगा।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अवनींद्र दुबे की रिकॉर्ड जीत
वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर मुकाबला अपेक्षाकृत सीधा रहा, लेकिन मतों का अंतर चौंकाने वाला साबित हुआ। अवनींद्र दुबे ने इस पद पर 200 मत प्राप्त कर अपने प्रतिद्वंदी रमेश प्रताप सिंह को 98 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। रमेश प्रताप सिंह को 102 मत मिले।
अवनींद्र दुबे की इस जीत को अधिवक्ताओं के बीच उनकी वरिष्ठता, शांत स्वभाव और संघर्षशील छवि से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी विजय ने यह साफ कर दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता वर्ग का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा।
कोषाध्यक्ष पद पर सांसें रोक देने वाला मुकाबला, संदीप श्रीवास्तव सिर्फ 2 मतों से विजयी
कोषाध्यक्ष पद पर इस बार सबसे रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। मतगणना के दौरान हर राउंड के साथ स्थिति बदलती रही और अंत तक किसी की जीत तय नहीं लग रही थी। अंततः संदीप श्रीवास्तव ने 151 मत प्राप्त कर मात्र 2 मतों के अंतर से विजय हासिल की। उनके प्रतिद्वंदी बृजेश कुमार पाल को 149 मत मिले।
यह परिणाम बताता है कि कोषाध्यक्ष पद के लिए अधिवक्ताओं के बीच कितनी कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। दो मतों का यह अंतर आने वाले समय में बार की राजनीति और समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विनय कुमार मौर्य की मजबूत जीत
कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विनय कुमार मौर्य ने 152 मत प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदियों कृष्ण कुमार गौतम और प्रेम चंद्र यादव को क्रमशः 71 और 93 मतों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। कृष्ण कुमार गौतम को 81 और प्रेम चंद्र यादव को 59 मत मिले।
विनय कुमार मौर्य की जीत को युवा अधिवक्ताओं के समर्थन और सक्रियता का प्रतीक माना जा रहा है। अधिवक्ता समुदाय में यह चर्चा रही कि युवा वर्ग ने इस बार खुलकर मतदान किया और अपने प्रतिनिधि को चुना।
कुल मतदान, निरस्त मतपत्र और चुनाव की पारदर्शिता
इस चुनाव में कुल 306 मत पड़े, जिनमें से 17 मतपत्र निरस्त घोषित किए गए। चुनाव समिति की ओर से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बताया गया। मतगणना के दौरान हर चरण पर प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह या विवाद की गुंजाइश न रहे।
अधिवक्ताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण मतदान और निष्पक्ष मतगणना ने मछलीशहर बार की लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत किया है।
कई पदों पर निर्विरोध निर्वाचन, पूरी कार्यकारिणी की तस्वीर साफ
चुनाव में कई पद ऐसे रहे, जिन पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। आय-व्यय निरीक्षक पद पर अनुराग सिन्हा, संयुक्त सचिव प्रशासन पद पर अशोक मिश्रा, पुस्तकालय पद पर विनोद कुमार, प्रकाशन पद पर लाल साहब यादव निर्विरोध चुने गए।
उपाध्यक्ष के दो पदों पर, जिनके लिए 10 वर्ष से अधिक अनुभव आवश्यक था, संतोष कुमार यादव और रतन लाल गुप्ता निर्विरोध निर्वाचित हुए। इसी प्रकार 15 वर्ष से अधिक अनुभव वाले कार्यकारिणी सदस्य पद पर सुरेश चंद्र मौर्य, शिव सागर पाल और मानिक लाल पाल का चयन हुआ।
15 वर्ष से कम अनुभव वाले कार्यकारिणी सदस्य पद पर गुलशन मौर्य, हरेंद्र कुमार यादव, मनोज कुमार पाल, कमला कांत यादव, दिलीप कुमार और जय प्रकाश का निर्विरोध निर्वाचन हुआ। यह दर्शाता है कि कई पदों पर अधिवक्ताओं के बीच सर्वसम्मति और सहमति का माहौल रहा।
चुनाव समिति और वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई प्रक्रिया
मतगणना की प्रक्रिया चुनाव समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्र सिन्हा की देखरेख में संपन्न हुई। समिति के सदस्य अशोक कुमार श्रीवास्तव, यज्ञ नारायण सिंह और दयानाथ पटेल पूरे समय मौजूद रहे। इसके अलावा अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष हुबेदार पटेल, महामंत्री नन्दलाल यादव सहित आर. पी. सिंह, रघुनाथ प्रसाद, भरत लाल यादव, इंदु प्रकाश सिंह, अजय सिंह, सतीश कुमार और कमलेश कुमार की उपस्थिति में मतगणना शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई।
इन सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और गरिमा को और बढ़ाया।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, पुलिस बल रहा तैनात
चुनाव और मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिवक्ता भवन के अंदर और बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि पूरी प्रक्रिया बिना किसी विवाद या हंगामे के संपन्न हो सकी।
अधिवक्ताओं ने भी अनुशासन और संयम का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सफल बनाया।
नई कार्यकारिणी से बड़ी उम्मीदें, अधिवक्ता हित होंगे प्राथमिकता
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अधिवक्ता समुदाय में नई कार्यकारिणी से कई उम्मीदें जुड़ गई हैं। अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव और महामंत्री आलोक विश्वकर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ता समिति से यह अपेक्षा की जा रही है कि अधिवक्ताओं की समस्याओं, न्यायालय से जुड़ी सुविधाओं और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों वर्गों के प्रतिनिधियों का संतुलन नई कार्यकारिणी में दिखाई दे रहा है, जिससे आने वाले कार्यकाल में बार की गतिविधियों को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
मछलीशहर बार चुनाव 2026 बना चर्चा का विषय
कुल मिलाकर मछलीशहर अधिवक्ता समिति का यह चुनाव न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना रहा। कड़े मुकाबले, रिकॉर्ड मत, बेहद कम अंतर से जीत और निर्विरोध निर्वाचनों ने इस चुनाव को खास बना दिया।
अब सभी की निगाहें नई कार्यकारिणी के पहले फैसलों और कार्यशैली पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मछलीशहर बार आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ेगी।


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