गोरखपुर में सपा नेता अमरेंद्र निषाद पर चचेरे भाई ने गोली चलाई। लाइसेंसी रिवॉल्वर से हमला, पुलिस जांच में जुटी।
गोरखपुर में दिनदहाड़े फायरिंग से दहला इलाका, सपा नेता पर जानलेवा हमला
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से सामने आई यह घटना न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम लोगों के बीच भी दहशत फैलाने वाली है। समाजवादी पार्टी के नेता अमरेंद्र निषाद पर उनके ही चचेरे भाई ने दिनदहाड़े गोली चलाकर हत्या की कोशिश की। यह सनसनीखेज वारदात गुलरिहा थाना क्षेत्र के खुटहन खास गांव में उस वक्त हुई, जब अमरेंद्र निषाद अपने घर के बाहर खड़े थे। अचानक हुई इस फायरिंग ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी और लोग सहम उठे।
घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हमला किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि खून के रिश्ते में जुड़े चचेरे भाई रविंद्र निषाद ने किया। आरोप है कि रविंद्र ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से अमरेंद्र निषाद के सीने पर निशाना साधते हुए गोली चला दी। गनीमत यह रही कि गोली अमरेंद्र के बगल से निकल गई और उनकी जान बच गई। एक पल की देरी या दिशा बदलने से बड़ा हादसा हो सकता था।
घर के दरवाजे पर खड़े थे अमरेंद्र, कार से बुलाकर किया हमला
पीड़ित अमरेंद्र निषाद के मुताबिक, यह पूरी घटना मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे की है। वह अपने घर के मुख्य दरवाजे के पास खड़े थे। तभी बगल में रहने वाले उनके बड़े पिता के बेटे यानी चचेरे भाई रविंद्र निषाद ने उन्हें आवाज दी और पास बुलाया। अमरेंद्र जैसे ही कार के पास पहुंचे, उसी दौरान रविंद्र ने अचानक लाइसेंसी रिवॉल्वर निकालकर उनके ऊपर गोली चला दी।
अमरेंद्र का कहना है कि हमले के वक्त उन्हें संभलने का भी मौका नहीं मिला। गोली सीधे उनके सीने की ओर दागी गई थी, लेकिन किस्मत से वह उनके शरीर को छूते हुए बगल से निकल गई। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग दौड़ पड़े, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर अमरेंद्र किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंच पाए।
जान बचते ही पुलिस को दी सूचना, आरोपी गिरफ्तार
गोली चलने के बाद अमरेंद्र निषाद ने बिना देर किए गुलरिहा थाने को सूचना दी। पुलिस तत्काल हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। पीड़ित की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी रविंद्र निषाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और लाइसेंसी रिवॉल्वर को भी कब्जे में ले लिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर चचेरे भाई ने इतनी बड़ी वारदात क्यों की। पारिवारिक रंजिश, जमीन विवाद या किसी राजनीतिक कारण की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है, ताकि घटना की असली वजह सामने आ सके।
अमरेंद्र और उनकी मां ने मांगी सुरक्षा, जान का खतरा बताया
हमले के बाद अमरेंद्र निषाद और उनकी मां राजमती निषाद ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। अमरेंद्र ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर लिखा है कि उन्हें आरोपी रविंद्र और उसके परिवार से जान का खतरा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने सुरक्षा नहीं दी, तो भविष्य में उनके या उनके परिवार के साथ कोई बड़ी घटना हो सकती है।
राजमती निषाद ने भी बेटे पर हुए हमले को गंभीर साजिश बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का हमला नहीं, बल्कि परिवार को डराने और खत्म करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके घर और परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा दी जाए।
बसपा सरकार में मंत्री रहे पिता, राजनीतिक विरासत से जुड़ा नाम
अमरेंद्र निषाद कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। वह बसपा सरकार में मंत्री रहे स्वर्गीय जमुना निषाद के बेटे हैं। जमुना निषाद को गोरखपुर और आसपास के इलाकों में निषाद समाज का बड़ा नेता और मसीहा माना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनाव लड़े और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी चुनावी मैदान में कड़ी टक्कर दी थी।
जमुना निषाद की राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि उनकी गिनती पूर्वांचल के प्रभावशाली नेताओं में होती थी। उनके निधन के बाद यह राजनीतिक विरासत परिवार में ही आगे बढ़ी। उनकी पत्नी राजमती निषाद पिपराइच विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं और इसके बाद उन्होंने अपने बेटे अमरेंद्र निषाद को राजनीति में सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया।
पिपराइच सीट से चुनाव लड़ चुके हैं अमरेंद्र निषाद
अमरेंद्र निषाद ने भी राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है। वह पिपराइच विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद वह इलाके में सक्रिय राजनीति करते रहे।
उनका नाम निषाद समाज के प्रभावशाली युवा नेताओं में लिया जाता है। इसी वजह से उन पर हुआ यह हमला सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और लोग किसी बड़े टकराव की आशंका जता रहे हैं।
खून के रिश्ते में छिपी दुश्मनी, क्या है विवाद की जड़?
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खून के रिश्ते में ऐसी दुश्मनी क्यों पनपी कि गोली चलाने तक की नौबत आ गई। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों चचेरे भाइयों के बीच पहले से कोई विवाद था या नहीं। कुछ स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पारिवारिक जमीन और संपत्ति को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था।
वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई से भी जोड़कर देख रहे हैं। निषाद परिवार इलाके में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है और राजनीतिक पकड़ भी मजबूत रही है। ऐसे में आपसी रंजिश का राजनीतिक रंग लेना कोई नई बात नहीं मानी जा रही।


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