गाजीपुर के स्कूल में पढ़वाई दुआ; प्रार्थना सभा का वीडियो वायरल होते ही मचा सियासी-प्रशासनिक भूचाल, DM के आदेश पर जांच शुरू




गाजीपुर के एमआरडी पब्लिक स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान दुआ-कलमा पढ़वाने का वीडियो वायरल, DM ने जांच के आदेश दिए।


गाजीपुर के स्कूल से उठा विवाद, वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से सामने आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था, धार्मिक संतुलन और स्कूलों में प्रार्थना की परंपरा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कासिमाबाद क्षेत्र के सेवठा सिंगेरा गांव स्थित एमआरडी पब्लिक स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों से इस्लामिक पद्धति में दुआ और कलमा पढ़वाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के सामने आते ही जिले में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते यह मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के बीच गहरा रोष देखने को मिल रहा है।

प्रार्थना सभा का वीडियो कैसे बना विवाद की जड़

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो 23 या 24 दिसंबर के आसपास का है, जिसमें सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध एमआरडी पब्लिक स्कूल की प्रार्थना सभा दिखाई दे रही है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि छात्र इस्लामिक पद्धति के अनुसार हाथ उठाकर दुआ और कलमा पढ़ते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर एक निजी स्कूल में धार्मिक विशेष पद्धति से प्रार्थना क्यों कराई गई। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और कुछ ही घंटों में यह जिले का बड़ा मुद्दा बन गया।

ब्राह्मण छात्रा से दुआ पढ़वाने के दावे ने बढ़ाया विवाद

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस प्रार्थना सभा के दौरान कथित तौर पर एक ब्राह्मण छात्रा के माध्यम से दुआ और कलमा पढ़वाया गया। इस दावे ने विवाद को और गहरा कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर विद्यालय में सभी धर्मों का सम्मान करने की बात की जाती है, तो किसी एक विशेष धार्मिक पद्धति को अनिवार्य रूप से क्यों अपनाया गया। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और स्कूल प्रबंधन पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।

हनुमान चालीसा की मांग और कथित फटकार का आरोप

विवाद तब और बढ़ गया जब यह बात सामने आई कि कुछ छात्रों ने स्कूल में हनुमान चालीसा का पाठ करने की मांग की थी। आरोप है कि इस मांग पर शिक्षकों ने छात्रों को कथित तौर पर डांटकर चुप करा दिया। इस दावे के सामने आते ही मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और छात्रों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उर्दू या दुआ पढ़वाई जा सकती है, तो अन्य धार्मिक पाठों पर रोक क्यों लगाई गई।

हिंदू संगठनों का आक्रोश और प्रशासन तक पहुंचा मामला

घटना की जानकारी मिलते ही जिले के कई हिंदू संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। क्षत्रीय महासभा के जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुए एसडीएम कासिमाबाद को एक औपचारिक पत्र सौंपा। पत्र में स्कूल प्रबंधन पर धार्मिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई। संगठनों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार का धार्मिक दबाव नहीं होना चाहिए और सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

DM के निर्देश पर जांच शुरू, प्रशासन सख्त

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। अपर जिलाधिकारी आयुष चौधरी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान सभी पहलुओं को देखा जाएगा और यदि किसी प्रकार की नियमावली का उल्लंघन पाया गया, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना बेहद जरूरी है।

DIOS ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ने भी एमआरडी पब्लिक स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्कूल से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि किस आधार पर प्रार्थना सभा में दुआ और कलमा पढ़वाया गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या इसके लिए अभिभावकों की सहमति ली गई थी या नहीं। DIOS की ओर से कहा गया है कि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्कूल प्रबंधन का पक्ष, CBSE निर्देशों का हवाला

वहीं, विद्यालय प्रबंधन ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। स्कूल के प्रबंधक ने टेलीफोनिक बातचीत में बताया कि सीबीएसई बोर्ड की ओर से अलग-अलग भाषाओं में प्रार्थना सभा कराने के निर्देश दिए गए हैं। उसी क्रम में उर्दू भाषा में प्रार्थना कराई गई थी। प्रबंधक का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी धर्म विशेष को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करना था।

CBSE नियमों की व्याख्या पर उठे सवाल

हालांकि, स्कूल प्रबंधन के इस बयान के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि भाषा और धार्मिक पद्धति में फर्क होता है। अगर प्रार्थना केवल उर्दू भाषा में होती, तो शायद विवाद इतना न बढ़ता। लेकिन दुआ और कलमा जैसी धार्मिक पद्धति अपनाने से यह मामला संवेदनशील बन गया। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि सीबीएसई के निर्देशों की व्याख्या सही तरीके से की गई थी या नहीं।

सोशल मीडिया पर तीखी बहस, वीडियो बना केंद्र

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही। वीडियो वायरल होते ही फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर तीखी बहस छिड़ गई। कुछ लोग इसे धार्मिक असहिष्णुता बता रहे हैं, तो कुछ इसे बेवजह तूल दिया गया मामला मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है।

शिक्षा और धर्म के संतुलन पर फिर छिड़ी बहस

गाजीपुर के इस स्कूल विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षा संस्थानों में प्रार्थना की भूमिका क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों को ऐसा मंच होना चाहिए, जहां सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान हो, लेकिन किसी एक पद्धति को थोपने से बचा जाए। इस घटना के बाद अभिभावकों में भी चिंता है कि बच्चों की पढ़ाई के माहौल पर इसका क्या असर पड़ेगा।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

फिलहाल, पूरे जिले की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। DM के निर्देश पर शुरू हुई जांच में स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि मामला नियमों का उल्लंघन है या गलतफहमी का नतीजा। इस बीच, एमआरडी पब्लिक स्कूल विवाद गाजीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

आगे क्या होगी कार्रवाई, यह तय करेगी रिपोर्ट

अब सवाल यह है कि जांच पूरी होने के बाद क्या स्कूल प्रबंधन पर कोई सख्त कार्रवाई होगी या मामला चेतावनी तक सीमित रहेगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की लापरवाही या नियम उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले का परिणाम आने वाले समय में प्रदेश के अन्य स्कूलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहां प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।

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