दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन योजना, सिर्फ 5 रुपये में भरपेट मिलेगा पौष्टिक खाना, जानें मेन्यू और कैंटीन की पूरी व्यवस्था
दिल्ली में शुरू हुई ‘अटल कैंटीन’ योजना, मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अब गरीब और जरूरतमंद वर्ग को महंगे खाने की चिंता नहीं सताएगी क्योंकि दिल्ली सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत कर दी है—जिसका नाम है 'अटल कैंटीन योजना'। इस योजना के अंतर्गत बेहद कम कीमत यानी मात्र 5 रुपये में लोगों को भरपेट और पौष्टिक भोजन मुहैया कराया जाएगा। इस सामाजिक सरोकार से जुड़ी योजना की शुरुआत दिल्ली के विभिन्न इलाकों में की गई है, जिसमें झुग्गी-झोपड़ी, दिहाड़ी मजदूर बहुल क्षेत्र और शहरी गरीबों के निवास स्थान प्राथमिकता पर रखे गए हैं।
इस योजना की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर न सिर्फ जरूरतमंदों में उत्साह है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब चर्चा हो रही है। जानकारों का मानना है कि यह पहल शहरी गरीबों के लिए एक बड़ी राहत बन सकती है, खासतौर पर ऐसे समय में जब रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
योजना का उद्देश्य और सामाजिक महत्व
अटल कैंटीन योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को गरम, ताजा और पौष्टिक भोजन सुलभ कराना है। यह खासकर उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं या फिर जिनके पास स्थायी आय का कोई स्रोत नहीं है। यह पहल सरकार की सामाजिक कल्याण नीतियों का एक मजबूत उदाहरण है, जिससे न केवल भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटा जा सकेगा, बल्कि आम आदमी को आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर भी मिलेगा।
अटल कैंटीन में कैसे मिलेगा खाना और क्या है नियम?
इस योजना के तहत प्रत्येक अटल कैंटीन में प्रतिदिन दो बार यानी दोपहर और शाम को 500-500 लोगों को भोजन दिया जाएगा। यानी एक कैंटीन से रोजाना 1000 लोगों तक खाना पहुंचाने का लक्ष्य है। खाने का वितरण 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगा, जिससे किसी भी तरह की अफरा-तफरी और कुप्रबंधन से बचा जा सके।
दिल्ली सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कैंटीन तक भोजन समय पर पहुंचे और इसकी गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। इसके लिए एक सुदृढ़ आपूर्ति प्रणाली तैयार की गई है, जिसमें खाना पहले से तैयार किया जाएगा और तय समय पर कैंटीनों में भेजा जाएगा। इससे न सिर्फ गुणवत्ता नियंत्रण बेहतर होगा बल्कि स्वच्छता के मानक भी बरकरार रहेंगे।
मेन्यू में क्या खास? जानिए 5 रुपये की थाली में क्या-क्या मिलेगा
महज 5 रुपये में मिलने वाली अटल कैंटीन की थाली सिर्फ सस्ती ही नहीं है, बल्कि पूरी तरह से संतुलित और पोषणयुक्त भी है। इस थाली को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन की भरपूर मात्रा हो। थाली में शामिल हैं:
- 100 ग्राम चावल
- 300 ग्राम के आसपास चपाती
- 100 ग्राम सब्जी
- 100 ग्राम दाल
- साथ में अचार
इस थाली की कुल लागत करीब 30 रुपये आंकी गई है, जिसमें से 25 रुपये का खर्च दिल्ली सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन किया जाएगा। इस तरह जनता को मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, जो कि शायद देश में किसी भी राजधानी में उपलब्ध सबसे सस्ता और संतुलित भोजन विकल्प है।
अटल कैंटीन की खासियत और केंद्रित रणनीति
दिल्ली सरकार की यह योजना सिर्फ खाना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक गहरी सोच है जो शहरी गरीबों को मुख्यधारा में लाने और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने की दिशा में काम करती है। योजना की एक खास बात यह भी है कि कैंटीन उन क्षेत्रों में स्थापित की जा रही हैं जहां झुग्गी-झोपड़ियां हैं, मजदूरों की बस्तियां हैं या फुटपाथ पर काम करने वाले लोग ज्यादा रहते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभार्थी को दूर जाकर भोजन के लिए भटकना न पड़े।
वहीं कैंटीनों में खाना पकाने की सुविधा नहीं रखी गई है ताकि जगह की बचत हो और ऑपरेशन को ज्यादा चुस्त-दुरुस्त रखा जा सके। इसके बजाय, खाना बड़े सेंट्रलाइज्ड किचन में तैयार होगा और फिर कैंटीन तक सप्लाई किया जाएगा। इससे न केवल खाना समय पर पहुंचेगा, बल्कि ताजगी और गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
दिल्ली सरकार का नजरिया और भविष्य की योजनाएं
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इस योजना के बारे में कहा कि “कोई भी नागरिक भूखा न सोए, यह हमारी जिम्मेदारी है। अटल कैंटीन योजना इसी सोच का परिणाम है।” उन्होंने आगे कहा कि “आज देश के कई हिस्सों में भूख से मरने की खबरें आती हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि दिल्ली में कोई भी व्यक्ति भूख से पीड़ित न हो।”
भविष्य में इस योजना का विस्तार करने की भी योजना है। अगर यह योजना सफल रहती है और जनता का रिस्पॉन्स अच्छा आता है, तो कैंटीन की संख्या बढ़ाकर दिल्ली के हर विधानसभा क्षेत्र में इसे लागू करने की योजना बनाई जाएगी। साथ ही, तकनीक का इस्तेमाल करके ई-वाउचर सिस्टम और पहचान पत्र के माध्यम से एकीकृत वितरण प्रणाली भी तैयार की जा सकती है।
अटल कैंटीन की शुरुआत पर जनता की प्रतिक्रिया
इस योजना की शुरुआत के पहले दिन ही कई स्थानों पर भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने 5 रुपये में इतनी गुणवत्ता वाला खाना मिलने पर सरकार का धन्यवाद किया। कई दिहाड़ी मजदूरों ने कहा कि “पहले हमें कहीं न कहीं से महंगा खाना लेना पड़ता था, लेकिन अब हम 5 रुपये में भरपेट खा सकते हैं। ये हमारे जैसे लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है।”
सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे देशभर में लागू किए जाने की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि अगर इस योजना को स्थायित्व के साथ चलाया गया, तो यह न केवल भूखमरी की समस्या को कम करेगी बल्कि सामाजिक समानता की ओर भी एक मजबूत कदम होगी।
क्या 'अटल कैंटीन' बन सकती है राष्ट्रीय मॉडल?
दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन योजना सिर्फ एक राज्य की योजना न होकर एक संभावित राष्ट्रीय मॉडल बन सकती है। अगर अन्य राज्यों की सरकारें भी इसी तरह की योजनाएं शुरू करें तो देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद लोगों को भूख से राहत मिल सकती है। खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक होती है, ऐसी योजनाएं बेहद कारगर साबित हो सकती हैं।
यह योजना सिर्फ भोजन की नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक न्याय की भी योजना है। दिल्ली सरकार की यह पहल दिखाती है कि सही नीयत और सटीक रणनीति के साथ समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भी सम्मान और सुविधा दी जा सकती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह योजना कितनी लंबी दूरी तय करती है और क्या यह अन्य राज्यों को भी प्रेरित करती है।


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