जौनपुर में सनसनीखेज़ हादसा: पत्रकार संघ मछलीशहर के अध्यक्ष की गाड़ी में जबरदस्त टक्कर, साजिश की आशंका



जौनपुर में पत्रकार संघ मछलीशहर अध्यक्ष अनिल पांडेय की गाड़ी से हुई टक्कर, साजिश की आशंका पर उच्च स्तरीय जांच की मांग।

इंद्रेश तिवारी की रिपोर्ट

हादसे की बड़ी घटना और शुरुआती जानकारी

जौनपुर जिले के मछलीशहर क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब पत्रकार संघ इकाई मछलीशहर के अध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय की कार से एक जोरदार टक्कर हो गई। यह घटना 28 सितंबर की सुबह लगभग 11 बजे अलीगंज बाज़ार के पास हुई। गाड़ी संख्या UP 62 CR 9991 से यात्रा कर रहे अनिल पांडेय का सामना सामने से आ रही एक पिकअप गाड़ी से हुआ, जिसने उनकी गाड़ी में सीधी टक्कर मार दी। इस टक्कर की गंभीरता इतनी अधिक थी कि वहां मौजूद लोग घबरा गए, हालांकि गनीमत रही कि पत्रकार संघ अध्यक्ष सुरक्षित रहे और उन्हें कोई शारीरिक चोट नहीं आई।

हादसे में साजिश की आशंका

अध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय ने इस हादसे को केवल सड़क दुर्घटना मानने से इंकार किया और इसे एक सुनियोजित हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता करने के कारण विरोधियों को उनसे ईर्ष्या है और इसी कारण यह साजिश रची गई। उनके मुताबिक पिकअप गाड़ी का ड्राइवर जानबूझकर गलत तरीके से गाड़ी चलाकर सामने से टक्कर मारने आया। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि यह केवल सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमले जैसा प्रतीत हो रहा है।

तहसील में पत्रकारों का प्रदर्शन और ज्ञापन

इस घटना के बाद जौनपुर पत्रकार संघ इकाई मछलीशहर के तमाम कार्यकर्ता तहसील पहुंच गए। वहां उन्होंने उप जिलाधिकारी कुमार सौरभ और क्षेत्राधिकारी प्रतिमा वर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिले। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले की जांच में देरी हुई तो आंदोलन भी किया जाएगा।



क्षेत्राधिकारी का बयान और आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी प्रतिमा वर्मा ने कहा कि इस हादसे की पूरी जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। यह बयान पत्रकारों में कुछ हद तक संतोष जरूर लाया, लेकिन फिर भी उनकी मांग है कि मामले को सिर्फ औपचारिकता बनाकर न छोड़ा जाए।

राजनीतिक दलों की सक्रियता

इस हादसे के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई। मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा के पूर्व विधायक लाल बहादुर यादव, वर्तमान विधायक पंकज पटेल और पूर्व विधायक सुषमा पटेल ने फोन पर अनिल पांडेय से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस घटना को लेकर कप्तान से उनकी बातचीत हो चुकी है और वह मामले की गंभीरता को लेकर उच्च अधिकारियों से निरंतर संवाद बनाए हुए हैं। इससे साफ है कि मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राजनीतिक सरगर्मी भी इसमें जुड़ गई है।

हादसे के गवाह और पत्रकारों की एकजुटता

घटना के बाद मौके पर मौजूद कई पत्रकारों ने अनिल पांडेय का समर्थन किया और कहा कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। मौके पर हाफिज नियामत, राजन अग्रहरि, इंद्रेश तिवारी, सतीश चन्द्र दुबे, सूर्यप्रकाश मौर्या, शोहरत अली, राधा रमन अग्रहरि, अब्दुलहई (राजा), धर्मेंद्र गिरी, कमलेश मिश्रा, विवेक गुप्ता, विवेक चौरसिया और करुणाकर द्विवेदी सहित कई पत्रकार मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि पत्रकार समाज इस मामले में पूरी तरह एकजुट है।

पत्रकारिता और खतरे का बढ़ता दायरा

यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि निष्पक्ष पत्रकारिता करना कितना कठिन हो गया है। पत्रकारों पर हमले और साजिशें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में काम करने वाले पत्रकार अक्सर राजनीतिक और आपराधिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में यह हादसा एक बड़ी चेतावनी है कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

मौजूदा हालात में पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि अगर समय रहते इस प्रकार की घटनाओं पर सख्ती नहीं दिखाई गई तो इसका असर पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर पड़ेगा। प्रशासन को चाहिए कि मामले की जांच में पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा

यह घटना केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और कहा कि अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे तो लोकतंत्र भी खतरे में पड़ सकता है। कई यूजर्स ने ट्विटर और फेसबुक पर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

सुरक्षा की मांग

जौनपुर में पत्रकार संघ मछलीशहर के अध्यक्ष की गाड़ी से हुई यह टक्कर अब केवल सड़क हादसे का मामला नहीं रहा बल्कि एक साजिश की शक्ल ले चुका है। पत्रकारों की ओर से उच्च स्तरीय जांच की मांग और राजनीतिक दलों की सक्रियता ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार किस प्रकार कदम उठाते हैं और क्या वास्तव में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर ठोस व्यवस्था की जाती है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ दब जाएगा।

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