मुस्लिम बहू ने उठाई 40 लीटर की कांवड़, बोली- शिवरात्रि पर सास-ससुर को गंगाजल से नहलाऊंगी, शबनम से बनी सोनम की अनोखी भक्ति यात्रा



मुजफ्फरनगर में मुस्लिम महिला शबनम ने उठाई कांवड़, शिवरात्रि पर सास-ससुर को गंगाजल से स्नान कराने की मन्नत के साथ कर रही यात्रा।


सावन में मुस्लिम महिला की शिवभक्ति की मिसाल, गंगाजल लेकर निकलीं कांवड़ यात्रा पर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इस बार की कांवड़ यात्रा में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। एक मुस्लिम महिला शबनम, जो अब सोनम के नाम से जानी जाती हैं, अपने पति पवन कुमार के साथ हरिद्वार से 40 लीटर गंगाजल लेकर गाजियाबाद के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली हैं।
सावन के महीने में शिवभक्तों की भीड़ के बीच जब एक मुस्लिम महिला ने कांवड़ उठाई तो हर किसी की नजरें उसी पर टिक गईं। शबनम ने बताया कि उन्होंने यह संकल्प अपने सास-ससुर की लंबी उम्र और उनके स्वास्थ्य के लिए लिया है। वह शिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर जलाभिषेक करने के बाद अपने सास-ससुर को इसी गंगाजल से स्नान कराएंगी।

40 लीटर गंगाजल और सास-ससुर की तस्वीर के साथ कर रहीं कांवड़ यात्रा

शबनम ने बताया कि उनकी कांवड़ यात्रा केवल भगवान शिव के जलाभिषेक तक सीमित नहीं है। उन्होंने कांवड़ में अपने सास-ससुर की फोटो भी लगाई है। उनका कहना है कि वह 23 जुलाई को शिवरात्रि के दिन सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएंगी और फिर अपने सास-ससुर को गंगाजल से स्नान कराएंगी।
उनकी कांवड़ में कुल 82 लीटर की व्यवस्था है, जिसमें 40 लीटर गंगाजल का मुख्य भार वह खुद खींचती हैं। जब वह थक जाती हैं, तो उनके पति उनकी मदद करते हैं।

शबनम से सोनम बनने की कहानी, 9 साल पहले की थी लव मैरिज

शबनम ने खुद बताया कि वह मूल रूप से मुस्लिम परिवार से हैं। गाजियाबाद में एक अस्पताल में नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात पवन कुमार से हुई थी। दोनों को एक-दूसरे से प्रेम हो गया और उन्होंने 9 साल पहले लव मैरिज कर ली।
शबनम ने विवाह के बाद अपना नाम बदलकर सोनम रख लिया। पति-पत्नी अब एक साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। पवन ने भी इस यात्रा में पूरा साथ दिया और बताया कि वह 12 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ उठाकर निकले थे। अब वे गाजियाबाद की ओर बढ़ रहे हैं और 23 जुलाई को गंगाजल चढ़ाएंगे।

'जब तक भगवान शिव चलाएंगे, तब तक चलते रहेंगे' - शबनम

शबनम ने बताया कि वह अपनी कांवड़ अलग से खुद ही खींचती हैं। उनका कहना है कि कई लोग मिलकर भी कांवड़ खींच सकते हैं, लेकिन जब तक उनकी शक्ति रहेगी, वह खुद ही खींचेंगी।
शबनम ने कहा, "हम जब थक जाते हैं तो मदद ले लेते हैं, लेकिन जब तक चल सकते हैं, खुद ही चलते हैं। हमने मन्नत ली है कि इस बार की यात्रा सफल रही तो अगली बार और अच्छे से आएंगे।"

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही शबनम की कांवड़ यात्रा

शबनम की इस अनोखी श्रद्धा की कहानी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है। लोग इसे धार्मिक एकता की मिसाल मान रहे हैं। जहां सावन के महीने में लाखों शिवभक्त कांवड़ लेकर हरिद्वार से जल भरकर अपने-अपने शिवालयों में जल चढ़ाने जाते हैं, वहीं शबनम का यह कदम समाज में एक नई मिसाल पेश कर रहा है।
कई लोग इस घटना को देखकर सोशल मीडिया पर कमेंट कर रहे हैं कि यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक है। शबनम की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि आस्था की कोई जाति या धर्म नहीं होता।

पति पवन बोले- सास-ससुर को नहलाने के लिए उठा रहे हैं गंगाजल

शबनम के पति पवन कुमार ने कहा, "हम दोनों ने मिलकर मन्नत ली है कि सास-ससुर को गंगाजल से स्नान कराएंगे। इसीलिए हम 40 किलो गंगाजल लेकर जा रहे हैं। जब तक लगता है कि चल सकते हैं, हम चलते रहते हैं।
शिवरात्रि के दिन हम भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और फिर अपने मम्मी-पापा को भी गंगाजल से नहलाएंगे।"

धार्मिक सहिष्णुता और प्रेम की मिसाल बनी शबनम की यात्रा

शबनम की कांवड़ यात्रा न केवल भक्ति की मिसाल है बल्कि यह धार्मिक सहिष्णुता और आपसी प्रेम का भी संदेश देती है। जहां एक ओर समाज में धर्म को लेकर अक्सर विवाद होते हैं, वहीं शबनम और पवन की यह यात्रा बताती है कि भक्ति का मार्ग सबके लिए समान है।
शबनम की यह यात्रा कांवड़ियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई इस मुस्लिम महिला की भक्ति भावना को देखकर उसकी सराहना कर रहा है।

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