रिपोर्ट: प्रतीक जैसवाल
VaranAsi : धनतेरस के दिन से शुरू हुआ स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा का दर्शन शुक्रवार की रात माता की आरती के साथ संपन्न हुआ। माता के स्वर्णमयी विग्रह के कपाट अगले वर्ष धनतेरस तक के लिए मान्यता के अनुरूप बंद कर दिए गए। महंत शंकरपुरी ने विधि विधान से माता की आरती उतारी। इसके पहले अन्नकूट की झांकी में 501 कुंतल के 56 भोग माता को लगाए गए। दोपहर बाद से 3 हज़ार भक्त जनों को अन्नकूट का प्रसाद परोसा गया।
धर्म की नगरी काशी में परम्परा के अनुसार धनतेरस से दर्शन दे रही माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी विग्रह का शुक्रवार को अन्नकूट झांकी के बाद महाआरती की गयी, जिसके बाद कपाट अगले वर्ष धनतेरस तक के लिए बंद कर दिए गए।
इसके पहले अन्नकूट महोत्सव पर माता अन्नपूर्णा की नयनाभिराम अन्नकूट झांकी सजाई गयी। भक्तों ने मंगला आरती के साथ ही माता के दर्शन शुरू कर दिए थे। महंत शंकरपुरी ने बताया कि चार दिवसीय स्वर्णमयी अन्नपुर्णा दर्शन के बाद अन्नकूट पर्व पर मां को अपराह्न भोग आरती के बाद प्रसाद पाने हेतु भक्तों का तांता लगा रहा, जिसमें न्यायिक शासनिक अधिकारी समेत अन्य श्रद्धालु रहे।
रात्रि 11:30 बजे महंत शंकरपुरी ने स्वर्णमयी अन्नपूर्णा की महाआरती उतारी और पट मान्यताओं के अनुरूप ही अगले एक वर्ष तक के लिए बन्द किया। कहा कि इस बार मां से सभी के लिये विनती करता हूं कि इस वर्ष जो महामारी आई अब वह कभी न आये। वहीं कपाट बंद होने के दौरान महाआरती के बाद अन्नपूर्णेश्वरी के जयकारों और उद्घोष से पूरा प्रांगण गूंज उठा।


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