समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर जेल से रिहा होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की जाएगी। इस मामले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं।
रामपुर जेल से निकलते ही ED की हिरासत में आजम खान
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहा किया गया था। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद वह मनी लॉन्ड्रिंग के एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में आ गए।
अधिकारियों के अनुसार, ED आजम खान को गाजियाबाद की अदालत में पेश करेगी। वहां इस मामले में उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ चल रही जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
रिहाई के बाद आजम खान ने कानून और अपनी पहचान को लेकर उठाए सवाल
रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने अपनी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्होंने कानून के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए इसे मुस्लिम होने की सजा से भी जोड़ा।
आजम खान ने कहा, "कहने को क्या बचा है? मैं क्या कह सकता हूं? कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है। यह मुस्लिम होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक विश्वविद्यालय एक मुस्लिम द्वारा बनाया गया था। यह हमारा अपराध है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए। क्या यह हमारा अपराध है?"
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की संपत्तियों पर प्रवर्तन निदेशालय पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुका है। जांच एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों सहित 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है।
रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर है। इस ट्रस्ट की स्थापना मोहम्मद आजम खान ने की थी और उस पर उनका नियंत्रण बताया गया है। आजम खान विश्वविद्यालय के मानद चांसलर भी हैं।
किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जे का आरोप
ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 384 सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया।
जांच के दौरान रामपुर जिला प्रशासन की रिपोर्ट में सिंहनखेड़ा गांव में स्थित शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉट पर कथित अवैध कब्जे का मामला भी सामने आया। यह जमीन करीब 34 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई बताई गई है।
आरोप है कि आजम खान ने इस जमीन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के लिए किया। वहीं, गृह मंत्रालय की ओर से नियुक्त कस्टोडियन पहले ही ट्रस्ट को आवंटित जमीन की लीज रद्द कर चुका था। इसके बाद गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति कस्टोडियन ने रामपुर जिला प्रशासन के माध्यम से जमीन का कब्जा वापस ले लिया।
सरकारी काम के लिए आवंटित धन यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला भी सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, सार्वजनिक कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि को कथित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी की ओर स्थानांतरित किया गया।
जांच में आरोप लगाया गया कि सरकारी कार्य विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराए गए। इसके अलावा, सरकारी ठेके प्राप्त करने वाले ठेकेदारों से धनराशि वापस लेकर उसे ट्रस्ट को दान के रूप में दिलवाया गया।
इस मामले में ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जानकारी साझा की थी। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में FIR नंबर 0224/2026 दर्ज की गई।
इस प्राथमिकी में आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया।
साल 2016 में मकान गिराने और लूटपाट के भी आरोप
ED ने आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ रामपुर पुलिस की ओर से दर्ज 28 अन्य FIR को भी अपनी जांच में शामिल किया है। इनमें से ज्यादातर मामलों में पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
इन मामलों से संबंधित FIR और आरोपपत्रों में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई परिवारों के मकानों को बुलडोजर से गिरा दिया गया था। प्रभावित परिवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई गई है, जो वक्फ की संपत्तियों पर किरायेदार के रूप में रह रहे थे।
आरोपों के मुताबिक, तत्कालीन सर्किल ऑफिसर और अन्य लोगों के नेतृत्व में एक भीड़ ने आजम खान के निर्देश पर इन मकानों को ध्वस्त किया। इस दौरान वहां रहने वाले लोगों के साथ मारपीट करने, उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देने और नकदी, गहने तथा मवेशी लूटने के आरोप भी लगाए गए हैं।
जांच में यह आरोप भी शामिल है कि ध्वस्त किए गए मकानों का मलबा ट्रकों के माध्यम से जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाया गया था।
रामपुर नगर पालिका की सफाई मशीनरी यूनिवर्सिटी पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसी की पड़ताल में रामपुर नगर पालिका से जुड़ा एक अन्य मामला भी शामिल है। संबंधित FIR और पुलिस के आरोपपत्र के अनुसार, नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी को कथित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में भेज दिया गया था।
ED अब इन सभी मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। किसानों की जमीन पर कथित कब्जे, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, मकानों को ध्वस्त करने और नगर पालिका की मशीनरी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचाने जैसे आरोप जांच का हिस्सा हैं।
आजम खान के खिलाफ जांच में कई मामले शामिल
आजम खान से जुड़े इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई केवल एक आरोप तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से संबंधित संपत्तियों के साथ-साथ जमीन, सरकारी धन और अन्य कथित अनियमितताओं की भी पड़ताल कर रही है।
रामपुर जेल से रिहाई के बाद मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की हिरासत और गाजियाबाद की अदालत में प्रस्तावित पेशी ने आजम खान की कानूनी मुश्किलों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


0 टिप्पणियाँ
आपका विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कृपया अपनी राय नीचे लिखें।