ताजा खबरें

5/National/ticker-posts

बड़ी खबरें

Recent/hot-post

क्या UPI पेमेंट पर अब कटेंगे एक्स्ट्रा पैसे? सरकार ने बैंकों और ऐप्स को दिया सख्त आदेश, जानिए नया नियम


UPI पर ग्राहकों से अतिरिक्त चार्ज नहीं कटेगा। सरकार ने बैंकों और ऐप्स को MDR का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालने के सख्त आदेश दिए हैं।

​डिजिटल भुगतान व्यवस्था में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तैयारियों के बीच सरकार ने साफ किया है कि इसका वित्तीय बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। बैंकों और यूपीआई ऐप्स को किसी भी प्रकार का छिपा हुआ या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क वसूलने से बचने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन और ₹2,000 तक के अधिकतर व्यापारिक भुगतान पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे, जिससे ग्राहकों को राहत मिलेगी।

ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क रोकने के लिए कड़ी निगरानी

​सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि व्यापारियों से संबंधित एमडीआर का भार किसी भी सूरत में आम उपयोगकर्ताओं की जेब पर न डाला जाए। इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए पेमेंट एग्रीगेटर्स और भुगतान क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय विमर्श किया गया है, ताकि तकनीकी और नीतिगत कमियों को दूर किया जा सके। इसके अलावा, यूपीआई ऐप्स द्वारा लगाए जाने वाले अघोषित प्लेटफॉर्म शुल्क और व्यापारियों द्वारा अलग से चार्ज वसूलने के प्रयासों पर रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र को और ज्यादा मजबूत किया जा रहा है।

किन भुगतानों पर मिलेगी पूरी छूट?

​नए नियमों के तहत आम जनता द्वारा किए जाने वाले नियमित भुगतानों को राहत दी गई है:

  • P2P ट्रांसफर: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में किए जाने वाले सभी यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
  • छोटे व्यापारिक भुगतान: ₹2,000 तक के अधिकांश मर्चेंट भुगतानों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • पूंजी बाजार लेनदेन: स्टॉक मार्केट और कैपिटल मार्केट से जुड़े यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए 0.02 प्रतिशत की एमडीआर दर तय की गई है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति लेनदेन ₹300 निर्धारित है। यह दर सेबी, स्टॉक एक्सचेंजों और संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद तय की गई है।

स्टॉक ब्रोकर्स की चिंताओं की समीक्षा करेगा SEBI

​पूंजी बाजार में यूपीआई के इस्तेमाल को लेकर शेयर ब्रोकर्स ने कुछ व्यावहारिक समस्याएं उठाई हैं। खासतौर पर उन मामलों को लेकर चिंता जताई गई है, जहां निवेशक यूपीआई के जरिए ट्रेडिंग खाते में पूंजी तो डालते हैं, लेकिन कोई शेयर सौदा (ट्रेड) नहीं करते। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इस पूरे मामले की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

​सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर उपभोक्ताओं से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है, बल्कि यह भुगतान प्रणाली के विभिन्न पक्षों के बीच साझा की जाने वाली लागत है, जिसका उद्देश्य यूपीआई ढांचे को सुचारू रूप से संचालित करना और भविष्य में इसका विस्तार करना है।


​साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ