PM मोदी के 12 साल में UPI, 5G, भारतनेट, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर और AI सेक्टर में हुए बड़े बदलावों के आंकड़े जानें।
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर पिछले 12 वर्षों में भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में हुए बदलावों के आंकड़े सामने आते हैं। इस अवधि में UPI ट्रांजेक्शन, 5G नेटवर्क, ग्रामीण इंटरनेट कनेक्टिविटी और मोबाइल निर्माण में तेज विस्तार दर्ज किया गया। भारतनेट के जरिए ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया, जबकि सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों के लिए भी मिशन शुरू किए गए हैं।
UPI ने बदली डिजिटल पेमेंट की तस्वीर
भारत में डिजिटल पेमेंट के विस्तार में UPI की बढ़ती पहुंच एक प्रमुख बदलाव के तौर पर सामने आई है। वित्त वर्ष 2016-17 में देश में सालाना 1.78 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए थे। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ यानी 241.6 अरब से अधिक हो गई। इसी अवधि में UPI के जरिए हुए लेन-देन की कुल वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत बताई गई है। UPI का इस्तेमाल भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी हो रहा है। अगस्त 2026 में जारी सरकारी जानकारी के मुताबिक UPI 11 देशों में ऑपरेशनल था।
5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार
टेलीकॉम सेक्टर में भी इस दौरान 5G नेटवर्क का विस्तार हुआ। भारत में 5G सेवाओं की शुरुआत 1 अक्टूबर 2022 को हुई थी। दी गई जानकारी के मुताबिक लॉन्च के करीब 21 महीने के भीतर 730 से ज्यादा जिलों तक 5G नेटवर्क पहुंच गया था। बाद के सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में 5G सेवाएं उपलब्ध थीं और 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों की संख्या 5.63 लाख तक पहुंच चुकी थी।
मोबाइल डेटा की कीमत में भी इस अवधि में बड़ा अंतर दर्ज किया गया। 2014 में 1 जीबी मोबाइल डेटा की औसत कीमत करीब ₹269 बताई गई थी। 2024 में सरकारी आंकड़ों में यह औसत कीमत ₹9.18 प्रति जीबी दर्ज की गई, जबकि 2026 के आंकड़ों में यह ₹7.51 प्रति जीबी बताई गई है।
इंटरनेट इस्तेमाल में भी वृद्धि दर्ज हुई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक औसत डेटा खपत 2014 में प्रति यूजर करीब 0.26 जीबी प्रति महीना थी, जो मार्च 2024 तक 20.27 जीबी प्रति महीना हो गई। 2025-26 में यह खपत 20 जीबी प्रति यूजर प्रति माह से अधिक बताई गई है।
गांवों तक पहुंचा फाइबर इंटरनेट
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारतनेट के जरिए ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने का काम किया गया। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 2.22 लाख लक्षित ग्राम पंचायतों में से 2.13 लाख से अधिक को सर्विस-रेडी बनाया जा चुका था।
इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC नेटवर्क की भी भूमिका रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में CSC की संख्या 5.5 लाख से अधिक हो चुकी है। ये केंद्र इंटरनेट, कंप्यूटर और अन्य सुविधाओं के जरिए विभिन्न ई-सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
मोबाइल निर्माण में 33 गुना बढ़ोतरी
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी इस अवधि में बड़ा विस्तार दर्ज किया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में देश में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब ₹18,000 करोड़ था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹6.27 लाख करोड़ हो गया, यानी उत्पादन में करीब 33 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
मोबाइल फोन के निर्यात में भी तेज वृद्धि हुई। 2014-15 में मोबाइल फोन का निर्यात करीब ₹1,500 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़ तक पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों में इसे 165 गुना वृद्धि के तौर पर दर्ज किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन अब देश में ही निर्मित किए जाते हैं। एक अन्य सरकारी आंकड़े में यह हिस्सेदारी करीब 99.2 प्रतिशत बताई गई है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर भी बढ़ा फोकस
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के साथ भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए ₹76,000 करोड़ के बजट आवंटन के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया गया। सरकारी जानकारी में गुजरात के साणंद और असम के मोरीगांव में टाटा, माइक्रोन, कायन्स और सीजी पावर से जुड़े प्लांट्स का भी उल्लेख किया गया है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े प्रयासों में घरेलू चिप निर्माण और डिजाइन क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों की ओर से 211 चिप्स टेप-आउट किए जा चुके थे और सात चिप्स अलग-अलग नोड्स पर सफलतापूर्वक फैब्रिकेट किए गए थे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए IndiaAI Mission
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी केंद्र सरकार ने IndiaAI Mission शुरू किया है। इस मिशन के लिए करीब ₹10,372 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। दी गई खबर में 10,000 से अधिक GPU वाले कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाने की बात कही गई है।
बाद के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक IndiaAI Mission के तहत साझा कंप्यूट क्षमता 45,000 से अधिक GPU तक पहुंच चुकी थी। अगस्त 2026 तक 237 प्रोजेक्ट्स ने सब्सिडी वाले AI कंप्यूटिंग संसाधनों का इस्तेमाल किया था।
टेक्नोलॉजी सेक्टर में कई स्तरों पर विस्तार
पिछले करीब 12 वर्षों के आंकड़ों में भारत के डिजिटल पेमेंट, मोबाइल इंटरनेट, 5G, ग्रामीण कनेक्टिविटी और मोबाइल निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विस्तार दिखाई देता है। इसी अवधि में सेमीकंडक्टर और AI जैसे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मिशन शुरू किए गए। उपलब्ध आंकड़े इस बदलाव को डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल से लेकर देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण की बढ़ती क्षमता तक अलग-अलग स्तरों पर दिखाते हैं।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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