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PF Salary Limit: ₹15,000 से ₹25,000 हुई PF कवरेज की सीमा, जानिए कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर


PF कवरेज की सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई। जानिए नए नियम और ₹15,000 योगदान सीमा का पूरा असर।

केंद्र सरकार ने प्रोविडेंट फंड (PF) कवरेज से जुड़ी मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस फैसले से अधिक कर्मचारी PF और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे। हालांकि, अनिवार्य PF योगदान की वेतन सीमा ₹15,000 ही रहेगी। सरकार के अनुसार इस बदलाव पर सालाना करीब ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा।

PF कवरेज की सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000

केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए PF कवरेज की मासिक सैलरी लिमिट ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दी है। इस बदलाव के बाद ज्यादा संख्या में कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।

नई सीमा का संबंध PF कवरेज से है। यानी ₹25,000 तक बेसिक सैलरी और DA पाने वाले कर्मचारियों को EPF के दायरे में शामिल करना कंपनी के लिए जरूरी होगा।

₹25,000 तक बेसिक सैलरी और DA वालों पर क्या होगा

आसान भाषा में समझें तो अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA को मिलाकर रकम ₹25,000 या उससे कम है, तो उसे EPF के दायरे में शामिल करना कंपनी के लिए अनिवार्य होगा।

इस बदलाव से पहले PF कवरेज के लिए बताई गई वेतन सीमा ₹15,000 थी। अब इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया गया है, जिससे ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है जिन्हें EPF और पेंशन से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।

अनिवार्य PF योगदान की सीमा अभी ₹15,000 ही

नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि PF कवरेज की सीमा बढ़ने के बावजूद अनिवार्य योगदान की वेतन सीमा ₹15,000 ही रहेगी।

इसका मतलब है कि कंपनी और कर्मचारी का अनिवार्य EPF योगदान ₹15,000 तक की सैलरी को आधार मानकर तय होगा। ₹25,000 की नई सीमा का मतलब यह नहीं है कि अनिवार्य PF योगदान की गणना भी ₹25,000 की पूरी सैलरी पर होगी।

₹20,000 सैलरी वाले कर्मचारी का उदाहरण

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA को मिलाकर ₹20,000 है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा क्योंकि उसकी सैलरी नई ₹25,000 की कवरेज सीमा के भीतर है।

हालांकि, इस कर्मचारी के लिए अनिवार्य EPF योगदान ₹15,000 की वेतन सीमा तक ही निर्धारित होगा। यानी कवरेज और अनिवार्य योगदान की सीमा को अलग-अलग समझना जरूरी है।

₹30,000 सैलरी और नए कर्मचारी के लिए क्या नियम

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹30,000 है और वह पहले से EPF सदस्य नहीं है, तो नई नौकरी में उसके लिए EPF में शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा।

ऐसे कर्मचारी के पास EPF लेने या नहीं लेने का विकल्प रहेगा। इस तरह ₹25,000 की नई सीमा का मुख्य असर PF कवरेज के विस्तार पर होगा, जबकि अनिवार्य योगदान के लिए ₹15,000 की सीमा बनी रहेगी।

सरकार के अनुसार सालाना ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, PF कवरेज की सीमा बढ़ाने के फैसले से कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मिल सकती है।

सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव पर हर साल करीब ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ने से कर्मचारियों को लंबे समय में फायदा होगा और कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।

PF कवरेज और योगदान में अंतर समझना जरूरी

इस फैसले को समझते समय PF में शामिल होने की सीमा और अनिवार्य योगदान की सीमा को अलग रखना जरूरी है। नई व्यवस्था के अनुसार ₹25,000 तक बेसिक सैलरी और DA वाले कर्मचारियों के लिए PF कवरेज जरूरी होगा, लेकिन अनिवार्य योगदान की गणना ₹15,000 की सीमा तक ही होगी।

वहीं, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी और DA पाने वाला ऐसा कर्मचारी जो पहले से EPF सदस्य नहीं है, उसके लिए EPF में शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा। वह अपनी इच्छा के अनुसार EPF का विकल्प चुन सकता है।

इसलिए सरकार के फैसले का सीधा असर PF के दायरे को बढ़ाने पर है। दूसरी ओर, अनिवार्य EPF योगदान के लिए ₹15,000 की वेतन सीमा में बदलाव नहीं किया गया है।



साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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