यूपी में एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा पर प्रतिबंध। मिलावट मिलने पर यूनिट और ब्रांड पर सख्त कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की शिकायतों के बीच एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि मिलावटी उत्पाद मिलने पर संबंधित निर्माण इकाई के उत्पाद जब्त किए जाएंगे और जनस्वास्थ्य को खतरा पाए जाने पर यूनिट बंद कराई जा सकती है। खतरनाक रसायन मिलने पर FIR और संबंधित ब्रांड की बिक्री पर प्रदेशभर में रोक लग सकती है।
दूध और दुग्ध उत्पादों को लेकर यूपी सरकार का सख्त आदेश
उत्तर प्रदेश में दूध और उससे जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में एनालॉग पनीर के साथ क्रीम, घी, छेना और खोवा पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। यह फैसला दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की शिकायतों तथा निरीक्षण के दौरान सामने आए अपमिश्रकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का हवाला देते हुए कहा गया है कि दूध और दुग्ध उत्पादों को उनके वास्तविक रूप में ही बेचा जाना चाहिए। सरकार के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर किए गए निरीक्षण में दूध और दुग्ध उत्पादों के सैंपल में मिलावट की पुष्टि हुई है।
मिलावटी उत्पाद मिलने पर पूरी यूनिट पर होगी कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी निर्माण इकाई में मिलावटी दूध या दुग्ध उत्पाद पाए जाते हैं तो कार्रवाई केवल संबंधित उत्पाद तक सीमित नहीं रहेगी। ऐसी स्थिति में पूरी निर्माण इकाई के उत्पाद जब्त किए जा सकते हैं।
आदेश के अनुसार, यदि किसी इकाई से तैयार उत्पादों के कारण जनस्वास्थ्य को खतरा सामने आता है तो उस निर्माण इकाई को तत्काल बंद कराया जा सकता है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 34 के तहत तत्काल प्रतिबंध आदेश जारी करने की बात भी कही है।
इसके अलावा, यदि जांच के दौरान खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति या इकाई के खिलाफ FIR दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
मिलावटी ब्रांड की बिक्री पर पूरे यूपी में लग सकती है रोक
उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल स्थानीय निर्माण इकाइयों को लेकर ही सख्ती नहीं दिखाई है, बल्कि राज्य के बाहर निर्मित डेयरी उत्पादों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
आदेश में कहा गया है कि यदि परीक्षण के दौरान राज्य के बाहर निर्मित किसी डेयरी उत्पाद में हानिकारक रसायन या वनस्पति वसा पाए जाने की पुष्टि होती है, तो अधिकारी संबंधित ब्रांड को उत्तर प्रदेश में कहीं भी बेचने पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
इसके साथ ही संबंधित ब्रांड का खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण भी तत्काल निलंबित किया जा सकता है। यानी जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर कार्रवाई केवल किसी एक दुकान या उत्पाद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित ब्रांड के खिलाफ पूरे राज्य में कदम उठाया जा सकता है।
जांच में इन मिलावटों का भी जिक्र
अधिकारियों की ओर से कई जिलों में दूध और डेयरी उत्पादों में अलग-अलग तरह की मिलावट पाए जाने की सूचना दी गई है। इनमें वनस्पति वसा, सोयाबीन और सोया-आधारित उत्पाद, टैल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, तरल ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और विभिन्न न्यूट्रलाइजर शामिल हैं।
सरकार के आदेश के मुताबिक, ऐसे मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल करके दूध और दुग्ध उत्पादों का निर्माण उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा आयुक्त को इन पदार्थों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
एनालॉग पनीर को लेकर क्यों सख्त हुआ रुख
एनालॉग पनीर ऐसे डेयरी विकल्पों को कहा गया है जिनमें वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर प्रदेश में इस तरह के उत्पादों को लेकर जारी आदेश ऐसे समय आया है जब दूध और दुग्ध उत्पादों में विभिन्न प्रकार की मिलावट की शिकायतें सामने आई हैं।
सरकार ने अपने आदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों को उनके वास्तविक रूप में बेचे जाने की बात पर जोर दिया है। इसके साथ ही जांच के दौरान मिलावट की पुष्टि होने पर निर्माण इकाई, उत्पाद और संबंधित ब्रांड के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है।
इन राज्यों में पहले भी उठाए जा चुके हैं कदम
उत्तर प्रदेश एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य नहीं है। इससे पहले उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई अन्य राज्यों ने भी वनस्पति वसा से बने डेयरी विकल्पों यानी एनालॉग पनीर के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाए हैं।
इन राज्यों में भी एनालॉग पनीर को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बाद राज्य में ऐसे उत्पादों की बिक्री और निर्माण को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई का रास्ता स्पष्ट किया गया है।
ब्रांड से लेकर निर्माण इकाई तक कार्रवाई का प्रावधान
उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में मिलावट की स्थिति में कार्रवाई का दायरा स्पष्ट रूप से रखा गया है। जांच में मिलावटी उत्पाद मिलने पर निर्माण इकाई के उत्पाद जब्त किए जा सकते हैं। जनस्वास्थ्य के लिए खतरा मिलने पर यूनिट को बंद कराया जा सकता है।
वहीं, खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर FIR दर्ज करने का प्रावधान है। राज्य के बाहर निर्मित किसी डेयरी उत्पाद में हानिकारक रसायन या वनस्पति वसा पाए जाने की पुष्टि होने पर संबंधित ब्रांड की उत्तर प्रदेश में बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके साथ खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण निलंबित करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
साभार: मीडिया रिपोर्ट्स


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