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हाईकोर्ट से झटका, थानों का प्रभार छीना और अब FIR; कटनी CSP नेहा पच्चीसिया पर गंभीर आरोपों का मामला क्या है?


कटनी CSP नेहा पच्चीसिया पर 30 हजार रिश्वत, हत्या केस और जमीन से जुड़े आरोपों में FIR दर्ज हुई।

कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। उन पर ट्रांसपोर्टर से 30 हजार रुपये लेने, हत्या के मामले में निर्धारित समय पर चार्जशीट दाखिल न करने और जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल ने की। इससे पहले उनके अधिकार क्षेत्र से पांच थानों का प्रभार हटाया गया था और सरकारी ड्राइवर निलंबित हुआ था।

ट्रांसपोर्टर की शिकायत से बढ़ी CSP की मुश्किलें

कटनी CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ विवाद की शुरुआत ट्रांसपोर्टर की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वाहन चेकिंग के दौरान उनकी हाईवा गाड़ी को रोकने के बाद 30 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम नहीं देने पर वाहन को पुलिस थाने ले जाने की बात कही गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच शुरू कराई।

शिकायत के मुताबिक 30 हजार रुपये में से 25 हजार रुपये नकद दिए गए थे, जबकि बाकी 5 हजार रुपये अगले दिन चालक के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई थी। मामले में पुलिस विभाग ने जांच शुरू की और CSP के सरकारी चालक केशव सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।

हत्या के मामले में चार्जशीट को लेकर भी आरोप

नेहा पच्चीसिया के खिलाफ दूसरा गंभीर आरोप कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के मामले की जांच से संबंधित है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। आरोप के अनुसार, इसका लाभ हत्या के मामले में आरोपी को मिला और उसे अदालत से जमानत मिल गई।

इसके साथ ही शिकायत में आरोपी से जुड़ी जमीन को एक मध्यस्थ के जरिए खरीदने का आरोप भी लगाया गया। यही वजह रही कि मामले की जांच को केवल कथित वसूली तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि हत्या की जांच और जमीन से जुड़े आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया गया।

IG प्रमोद कुमार वर्मा ने जांच की जिम्मेदारी अनु बेनीवाल को दी

शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर रेंज के IG प्रमोद कुमार वर्मा ने मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी। जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए। अगस्त की शुरुआत में सामने आई जानकारी के अनुसार, 10 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके थे और मामले से जुड़े सभी पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही थी।

जांच के दौरान CSP नेहा पच्चीसिया भी जांच अधिकारी के सामने पेश हुईं और अपना बयान दर्ज कराया। वहीं, उनके निलंबित सरकारी चालक केशव सिंह को भी बयान के लिए बुलाया गया था, लेकिन उस समय उनके उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई थी।

पांच थानों का प्रभार चरणबद्ध तरीके से हटाया गया

जांच के बीच पुलिस विभाग ने नेहा पच्चीसिया के प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव किया। उनके अधिकार क्षेत्र से थानों का प्रभार चरणबद्ध तरीके से वापस लिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कुल पांच थानों का प्रभार उनसे हटाया गया। शुरुआत में दो थानों का प्रभार वापस लिया गया था और बाद में तीन अन्य थाने भी उनके नियंत्रण से बाहर कर दिए गए।

इसी मामले के दौरान उनके सरकारी चालक केशव सिंह को भी निलंबित किया गया। पुलिस विभाग की कार्रवाई के बाद मामले ने और तूल पकड़ा और नेहा पच्चीसिया ने प्रशासनिक फैसलों को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट में भी नहीं मिली राहत

नेहा पच्चीसिया ने थानों का प्रभार हटाए जाने समेत प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर थानों के प्रभार में बदलाव को पुलिस विभाग का आंतरिक मामला माना और इसमें हस्तक्षेप से इनकार किया।

इस घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और आरोपों का मामला और चर्चा में आ गया। बाद में जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की।

एयरहोस्टेस से पुलिस अफसर बनने तक का सफर

नेहा पच्चीसिया का पुलिस सेवा तक पहुंचने का सफर भी चर्चा में रहा है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के एक गांव से आती हैं। उनके पिता शिक्षक और मां गृहिणी हैं। चार बहनों में सबसे बड़ी नेहा की शिक्षा को लेकर परिवार में उनकी मां ने विशेष प्रयास किए थे।

12वीं कक्षा के बाद नेहा ने एविएशन में डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में एयरहोस्टेस के तौर पर काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने विदेशी और कॉर्पोरेट एविएशन कंपनियों में भी सेवाएं दीं। बाद में उन्होंने पुलिस सेवा में जाने का फैसला किया और गांव लौटकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की।

MPPSC में हासिल की 20वीं रैंक

नेहा पच्चीसिया ने 2012 से 2016 तक पुलिस सेवा में जाने के लिए तैयारी की। वर्ष 2016 में उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा के रूप में DSP का पद चुना।

एयरहोस्टेस की नौकरी से पुलिस सेवा तक पहुंचने की उनकी कहानी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनके काम और सार्वजनिक छवि के कारण वह कई बार चर्चा में भी रहीं। कोरोना महामारी के दौरान बेहतर प्रशासनिक कार्यों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

अब FIR के बाद बढ़ी कानूनी मुश्किलें

नेहा पच्चीसिया के खिलाफ दर्ज FIR में वसूली, हत्या के मामले की जांच से जुड़े आरोप और जमीन से संबंधित शिकायतों का मामला शामिल है। पुलिस जांच के दौरान इन आरोपों को लेकर संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी गई। इसके बाद तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

फिलहाल यह मामला कटनी पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर नेहा पच्चीसिया के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच और FIR दर्ज हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर उनका एयरहोस्टेस से पुलिस अधिकारी बनने का सफर भी इस पूरे घटनाक्रम के कारण फिर से सुर्खियों में आ गया है।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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