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धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी क्यों? इन वजहों से अहम माना जा रहा फैसला



NEET-UG विवाद के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला। जानिए उनके चयन की प्रमुख वजहें।

NEET-UG परीक्षा विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जोशी पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे हैं। संसदीय मामलों का लंबा अनुभव, दबाव में काम करने की क्षमता और सरकार के भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती इस जिम्मेदारी के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

NEET-UG विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय में बदलाव

NEET-UG परीक्षा को लेकर पैदा हुए विवाद और उसके बाद छात्रों के बड़े विरोध-प्रदर्शनों ने शिक्षा मंत्रालय को चर्चा के केंद्र में ला दिया। छात्रों की नाराजगी के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रल्हाद जोशी पहले से केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण के साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने से उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।

ऐसे समय में जब परीक्षा विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के कारण शिक्षा मंत्रालय पर खास नजर है, जोशी को जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे उनके लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर लंबा अनुभव

प्रल्हाद जोशी 2019 से 2024 तक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्हें संसद के कामकाज और संसदीय प्रक्रियाओं का व्यापक अनुभव मिला। अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने से लेकर संसद में मुश्किल परिस्थितियों और गर्मागर्म बहसों को संभालने तक उनकी भूमिका रही है।

शिक्षा मंत्रालय ऐसे समय में उनके पास आया है, जब मौजूदा मानसून सत्र के दौरान परीक्षा विवाद और छात्रों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। ऐसे में उनका संसदीय अनुभव महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दोनों सदनों में विपक्ष के हमलों का सामना करने और तनावपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों को संभालने के अनुभव के कारण भी जोशी को सरकार के अनुभवी नेताओं में गिना जाता है।

छात्रों के मुद्दों पर संवेदनशीलता का संदेश

नई जिम्मेदारी के बीच छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार के रुख की भी चर्चा है। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रल्हाद जोशी ने कहा था कि केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रति वास्तविक चिंता और संवेदनशीलता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम किया गया है। जोशी के मुताबिक, मोदी सरकार छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी रही है और उनके भविष्य को प्रभावित करने वाली किसी भी अनियमितता या अन्याय के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जिम्मेदारी रखती है।

NEET-UG विवाद के कारण छात्रों में पैदा हुई नाराजगी के बीच यह जिम्मेदारी ऐसे मंत्री को दी गई है, जिसके पास सरकार और संसद दोनों स्तरों पर जटिल परिस्थितियों से निपटने का अनुभव है।

दबाव वाली परिस्थितियों को संभालने का अनुभव

प्रल्हाद जोशी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण पहलू दबाव के बीच काम करने का उनका अनुभव भी है। संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ के साथ वह कई बार ऐसे राजनीतिक हालात का सामना कर चुके हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।

संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए उनकी जिम्मेदारी केवल सदन के कामकाज तक सीमित नहीं थी, बल्कि अलग-अलग दलों के साथ संवाद और सहमति कायम करने की भूमिका भी उससे जुड़ी थी। यही अनुभव शिक्षा मंत्रालय से जुड़े मौजूदा विवादों के बीच उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनुभवी और भरोसेमंद नेता के तौर पर पहचान

प्रल्हाद जोशी की गिनती केंद्र सरकार के अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में की जाती है। शिक्षा मंत्रालय के सामने केवल मौजूदा परीक्षा विवाद से जुड़े सवाल ही नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी हैं।

हायर एजुकेशन में एक्रेडिटेशन से संबंधित सुधार और स्किल इंटीग्रेशन प्रोग्राम जैसे विषयों के लिए केंद्र और राज्यों की संस्थाओं के बीच लगातार समन्वय की जरूरत है। ऐसे में लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव वाले नेता को मंत्रालय की जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में चल रहे संरचनात्मक बदलावों के दौरान अलग-अलग संस्थाओं के बीच तालमेल बनाए रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है। जोशी का सरकार में लंबा अनुभव इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे प्रल्हाद जोशी

प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब NEET-UG परीक्षा विवाद और छात्रों के विरोध के कारण शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल चर्चा में हैं। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उनका पिछला अनुभव, दबावपूर्ण परिस्थितियों को संभालने की क्षमता और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाने का अनुभव इस फैसले के प्रमुख पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है।

अब वह अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा क्षेत्र में चल रहे बदलावों के बीच उनकी नई जिम्मेदारी पर विशेष नजर रहेगी।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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