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'देश में लोकतंत्र नहीं बचा...' लाठीचार्ज और पेपर लीक से भड़का विपक्ष, काले कपड़ों में संसद पहुंचे नेता


नीट पेपर लीक और पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में विपक्षी सांसद काले कपड़े पहन संसद पहुंचे। प्रियंका और खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

​नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का सरकार के खिलाफ हल्ला बोल जारी है। मंगलवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता के विरोध में बुधवार को कांग्रेस, सपा और टीएमसी के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद भवन पहुंचे। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का सिस्टम पूरी तरह टूट चुका है और अब लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है।

लाठीचार्ज और हिरासत के विरोध में 'ब्लैक आउट'

​संसद के मकर द्वार पर काले कपड़ों में जुटे विपक्षी सांसदों ने पुलिस और सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। कांग्रेस सांसद के. सुरेश और प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि काले कपड़े पहनने का यह फैसला मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य सांसदों को बर्बरतापूर्वक हिरासत में लिए जाने के खिलाफ है। पवन खेड़ा ने भी कहा कि यह प्रदर्शन दिल्ली में छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार और शिक्षा मंत्री के अपने पद पर बने रहने की जिद का सीधा जवाब है। प्रमोद तिवारी ने यहां तक कहा कि इस सरकार से हमें वैसे ही लड़ना होगा जैसे हमारे पूर्वज अंग्रेजों से लड़े थे।

प्रियंका गांधी का वार: 'सिर्फ अडानी-अंबानी के कर्ज माफ, छात्रों के लिए सिस्टम फेल'

​काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ क्या हुआ यह मायने नहीं रखता, असली सवाल यह है कि छात्रों के साथ जो हो रहा है, क्या वह सही है? प्रियंका ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि देश का शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि सरकार अडानी और अंबानी के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर रही है।

​उन्होंने कहा कि गरीब, किसान और छात्रों के लिए इस सरकार के पास कुछ नहीं है, पूरा सिस्टम टूट चुका है। बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे बच्चों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में न तो चर्चा होती है और न ही नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाता है, जिससे साबित होता है कि लोकतंत्र अब खत्म हो चुका है।

शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष

​केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधान के पास अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है। बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद संजय यादव ने पेपर लीक की घटनाओं और 50 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने प्रशासन पर युवाओं की आवाज को दमनकारी नीतियों से कुचलने का आरोप लगाया।

खरगे की चेतावनी- 'कुचलने की कोशिश की तो लाखों लोग सड़कों पर होंगे'

​कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस कार्रवाई और सदन की कार्यवाही पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद नियमों के तहत नहीं चल रही है और बीजेपी-आरएसएस के कार्यकर्ता छात्रों को डरा-धमका रहे हैं। खरगे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर हमारे बड़े नेताओं की आवाज कुचलने की कोशिश की गई, तो लाखों की संख्या में लोग सड़क पर उतरेंगे। हम डरने वाले नहीं हैं, जो सुलूक राहुल और प्रियंका के साथ किया गया, उसके लिए सरकार को पछताना पड़ेगा।" इसी बीच सांसद इमरान मसूद ने भी नेता प्रतिपक्ष के साथ हुए व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी मांगों से बिल्कुल पीछे नहीं हटे हैं।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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