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परीक्षा सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी: नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स, PM मोदी ने बताया क्या करेगी टीम



PM मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह टास्क फोर्स एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स पर फोकस करेगी और आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी। इसमें ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ और IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका समेत अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

परीक्षा सुधारों को लेकर PM मोदी का बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो मैसेज के जरिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने के साथ इसमें टेक्नोलॉजी के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेलों में हैं। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का भी जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने संसद में कठोर प्रावधानों वाला नया कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने इसके साथ भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया। इसी उद्देश्य से टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया गया है।

पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली पर रहेगा फोकस

पीएम मोदी ने अपने संदेश में परीक्षा प्रणाली के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं—विश्वसनीयता, पारदर्शिता और टेक्नोलॉजी—पर जोर दिया। उनका कहना था कि परीक्षा पद्धति ऐसी होनी चाहिए जिस पर भरोसा किया जा सके, जिसमें पारदर्शिता हो और तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए।

इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टीम एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स पर फोकस करेगी। पीएम मोदी के मुताबिक, टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता जल्द से जल्द सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

NTA की परीक्षा प्रणाली में सुधार पर काम करेगी टीम

परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह बहु-विषयक समूह NTA की परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगा। खासतौर पर टेक्नोलॉजी और परीक्षा व्यवस्था के भीतर संरचनात्मक सुधार इसके प्रमुख क्षेत्रों में शामिल होंगे।

टास्क फोर्स का नेतृत्व नंदन नीलेकणि करेंगे। उनके साथ ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

कौन हैं नंदन नीलेकणि?

नंदन नीलेकणि का जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई बिशप कॉटन बॉयज स्कूल से की, जबकि हाई स्कूल की शिक्षा सेंट जोसेफस हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

खास बात यह है कि नीलेकणि ने किसी कोचिंग क्लास की मदद के बिना IIT बॉम्बे में प्रवेश हासिल किया था। आगे चलकर उन्होंने भारतीय आईटी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और देश की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल इंफोसिस की स्थापना से जुड़े।

नारायण मूर्ति से मुलाकात और इंफोसिस की शुरुआत

नंदन नीलेकणि की मुलाकात 1978 में नारायण मूर्ति से हुई। इसी मुलाकात के बाद इंफोसिस की स्थापना हुई। यह वह दौर था जब भारतीय अर्थव्यवस्था की परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं और किसी स्टार्टअप को आगे बढ़ाना आसान नहीं था।

करीब एक दशक तक इंफोसिस ने मुश्किल परिस्थितियों में काम किया। इसके बाद 1991 में भारत में हुए बड़े आर्थिक सुधारों ने कंपनी के लिए नए अवसर पैदा किए और उसके आगे बढ़ने का रास्ता खुला।

1992 में IPO, 1999 में NASDAQ पर लिस्टिंग

इंफोसिस ने 1992 में शेयर बाजार में अपना IPO लॉन्च किया। इसके बाद दुनिया की बड़ी कंपनियों ने इंफोसिस द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू किया और कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन तेजी से बढ़ने लगी।

वर्ष 1999 में इंफोसिस NASDAQ पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन एक अरब डॉलर के आंकड़े से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद 2002 में नंदन नीलेकणि को कंपनी का CEO नियुक्त किया गया।

मनमोहन सिंह ने 2009 में सौंपी थी UIDAI की जिम्मेदारी

नंदन नीलेकणि की तकनीकी और प्रबंधन क्षमता को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 में उन्हें UIDAI प्रोजेक्ट का चेयरमैन बनने के लिए आमंत्रित किया था। नीलेकणि ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया।

UIDAI को भारत की डिजिटल व्यवस्था को आकार देने वाले महत्वपूर्ण कदमों में माना जाता है। आधार आज दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक सिस्टम के तौर पर पहचाना जाता है।

आधार से सरकारी सेवाओं तक पहुंच हुई आसान

UIDAI बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा कर उसे सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस में स्टोर करता है। आधार व्यवस्था आने के बाद कई सरकारी सेवाओं को लोगों तक कम समय में पहुंचाना संभव हुआ है।

आधार के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, पेंशन और दूसरी सेवाओं का लाभ तेजी से हासिल किया जा सकता है। अब परीक्षा सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान भी नंदन नीलेकणि को दी गई है।

हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में ये विशेषज्ञ शामिल

नंदन नीलेकणि इस हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। उनके अलावा ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा को इसमें शामिल किया गया है।

अलग-अलग क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों की यह टीम NTA की परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों पर काम करेगी। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।


साभार: मीडिया रिपोर्ट्स 

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