KGMU लखनऊ में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिखने के आरोप में प्रोफेसर संजीव गुप्ता सस्पेंड, जांच में बड़ा खुलासा।
राजधानी लखनऊ के KGMU में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए कहने के मामले में नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री जनता दर्शन में शिकायत पहुंचने के बाद हुई जांच में कई मरीजों ने बाहर से खरीदारी कराने की पुष्टि की, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री जनता दर्शन की शिकायत से खुला पूरा मामला
पूरा मामला तब सामने आया जब गोरखपुर के एक मरीज ने मुख्यमंत्री जनता दर्शन कार्यक्रम में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि KGMU के नेत्र रोग विभाग में इलाज के दौरान डॉक्टर ने उसे यूनिवर्सिटी के HRF स्टोर से दवाएं और लेंस लेने की बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदारी करने को कहा। मरीज का दावा था कि बाहर से खरीदे गए सामान पर करीब 18 हजार रुपये खर्च हुए, जबकि वही सामान KGMU स्टोर पर काफी कम कीमत में उपलब्ध था।
शिकायत को गंभीर मानते हुए KGMU प्रशासन ने तुरंत अनुशासन समिति गठित कर जांच शुरू कराई। जांच के दौरान मरीजों के रिकॉर्ड, पर्चियां और खरीदारी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। मामले ने तब बड़ा मोड़ लिया जब कई मरीजों ने लिखित रूप से बाहर से दवाएं खरीदने की पुष्टि कर दी।
जांच में 17 मरीजों ने बाहर से खरीदारी की पुष्टि की
KGMU प्रशासन के मुताबिक जांच समिति ने करीब 30 मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले। इनमें से 17 मरीजों ने लिखित बयान देकर बताया कि उन्हें अस्पताल के बजाय बाहर से दवाएं और लेंस खरीदने के लिए कहा गया था। कई मरीजों ने खरीदारी की रसीदें और संबंधित दस्तावेज भी जांच समिति को सौंपे।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल परिसर में एक बाहरी व्यक्ति सक्रिय था, जो मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाने का काम करता था। प्रशासन का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क मरीजों को अस्पताल के अधिकृत स्टोर से हटाकर बाहर खरीदारी कराने में भूमिका निभा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन ने उस बाहरी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कराने का फैसला लिया है। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में प्रवेश और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
विभागाध्यक्ष और OT सिस्टर इंचार्ज को भी नोटिस
सिर्फ प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता पर ही कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि विभागाध्यक्ष और ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज को भी नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने दोनों से जवाब मांगा है कि विभाग में इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक कैसे चलती रहीं और निगरानी व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक क्यों हुई।
KGMU प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में मरीजों को सस्ती और पारदर्शी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर मरीजों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने या बाहरी मेडिकल स्टोरों से जोड़ने की कोशिश की जाती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है। अस्पताल की कार्यप्रणाली और मेडिकल स्टोर व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं।


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