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बच्चों के हाथ में मोबाइल और स्क्रीन पर एडल्ट कंटेंट! Netflix, YouTube और Prime Video की ये सेटिंग्स तुरंत ऑन नहीं कीं तो हो सकती है बड़ी गलती


Netflix, Prime Video और YouTube पर बच्चों को एडल्ट कंटेंट से बचाने के लिए जानिए जरूरी पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स।

आज के दौर में बच्चे मोबाइल, स्मार्ट टीवी और टैबलेट पर घंटों वीडियो, कार्टून और वेब सीरीज देखते हैं, लेकिन इसी डिजिटल दुनिया में एडल्ट और हिंसक कंटेंट का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने खास पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स दिए हैं, जिनकी मदद से माता-पिता बच्चों को गलत कंटेंट से दूर रख सकते हैं। Kids Profile, PIN Lock, Restricted Mode और स्क्रीन टाइम कंट्रोल जैसी सेटिंग्स अब हर पैरेंट के लिए बेहद जरूरी हो गई हैं, क्योंकि छोटी सी लापरवाही बच्चों की मानसिक स्थिति और व्यवहार पर बड़ा असर डाल सकती है।

Netflix पर बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित फीचर, Kids Profile से छिप जाएगा एडल्ट कंटेंट

आज Netflix बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन चुका है। यहां हजारों फिल्में, वेब सीरीज और डॉक्यूमेंट्री मौजूद हैं, लेकिन इनमें कई ऐसे शो भी शामिल हैं जो बच्चों के लिए बिल्कुल सही नहीं माने जाते। इसी खतरे को देखते हुए Netflix ने Kids Profile फीचर शुरू किया है।

इस फीचर की मदद से माता-पिता बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बना सकते हैं, जिसमें केवल बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट ही दिखाई देता है। Kids Profile का इंटरफेस भी सामान्य प्रोफाइल से अलग होता है। इसमें कार्टून, एजुकेशनल वीडियो और बच्चों के मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम ही नजर आते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Netflix में माता-पिता उम्र के हिसाब से कंटेंट लिमिट तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि बच्चा 7 साल का है तो केवल उसी उम्र के अनुसार शो और फिल्में दिखाई जाएंगी। इससे हिंसक, रोमांटिक और एडल्ट कंटेंट अपने आप छिप जाता है।

Netflix का Profile Lock फीचर भी काफी उपयोगी माना जा रहा है। कई बार बच्चे दूसरे प्रोफाइल में जाकर एडल्ट कंटेंट खोल लेते हैं, लेकिन PIN Lock लगाने के बाद ऐसा करना आसान नहीं रहता। चार अंकों का पासकोड लगाकर पैरेंट्स अपने प्रोफाइल को सुरक्षित बना सकते हैं।

Netflix में ये सेटिंग्स ऑन करने के लिए सबसे पहले ऐप खोलकर Profile सेक्शन में जाना होता है। इसके बाद Manage Profiles ऑप्शन पर क्लिक करके Kids Profile बनाया जा सकता है। Viewing Restrictions में जाकर कंटेंट लिमिट तय की जा सकती है और Profile Lock फीचर के जरिए PIN सेट किया जा सकता है।

स्मार्ट टीवी, एंड्रॉयड मोबाइल, iPhone और वेब ब्राउजर सहित लगभग हर डिवाइस पर यह फीचर उपलब्ध है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बच्चों को OTT प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने से पहले पैरेंटल कंट्रोल जरूर एक्टिव करने की सलाह देते हैं।

Prime Video का Parental Control फीचर बना माता-पिता का नया सुरक्षा हथियार

Amazon Prime Video भी तेजी से भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले OTT प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो चुका है। यहां बॉलीवुड फिल्मों से लेकर इंटरनेशनल वेब सीरीज तक बड़ी मात्रा में कंटेंट मौजूद है। लेकिन हर कंटेंट बच्चों के लिए सही नहीं होता।

इसी समस्या को देखते हुए Prime Video ने Parental Controls फीचर दिया है। इस फीचर की मदद से माता-पिता यह तय कर सकते हैं कि बच्चे किस तरह का कंटेंट देख पाएंगे और कौन सा कंटेंट उनके लिए ब्लॉक रहेगा।

Prime Video में Viewing Restrictions फीचर सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है। इसमें U, U/A 13+, U/A 16+ और Adult जैसी कैटेगरी मिलती हैं। माता-पिता अपनी जरूरत के अनुसार कंटेंट लिमिट तय कर सकते हैं। यदि कोई बच्चा एडल्ट फिल्म या वेब सीरीज खोलने की कोशिश करेगा तो सिस्टम PIN मांगेगा।

यह फीचर खास तौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी है जहां एक ही अकाउंट कई लोग इस्तेमाल करते हैं। कई बार बड़े लोग जो कंटेंट देखते हैं वह बच्चों के सामने भी दिखाई देने लगता है। ऐसे में Parental Control फीचर बच्चों की सुरक्षा का मजबूत साधन बन जाता है।

Prime Video में पैरेंटल कंट्रोल एक्टिव करने के लिए सबसे पहले ऐप या वेबसाइट खोलनी होती है। इसके बाद Account & Settings सेक्शन में जाकर Parental Controls विकल्प चुनना होता है। यहां कंटेंट रेटिंग लिमिट सेट की जा सकती है और PIN लॉक भी लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बच्चों को मोबाइल देकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नए तरह का कंटेंट आ रहा है, इसलिए हर माता-पिता को समय-समय पर इन सेटिंग्स को अपडेट करते रहना चाहिए।

YouTube पर हर सेकंड अपलोड हो रहे वीडियो, Restricted Mode और YouTube Kids बेहद जरूरी

YouTube आज दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफॉर्म माना जाता है। यहां हर मिनट हजारों वीडियो अपलोड होते हैं। यही वजह है कि बच्चों के सामने कई बार ऐसा कंटेंट भी आ जाता है जो उनकी उम्र के हिसाब से सही नहीं होता।

YouTube ने इस समस्या को कम करने के लिए Restricted Mode फीचर लॉन्च किया है। यह फीचर ऑन करने के बाद एडल्ट, हिंसक, संवेदनशील और आपत्तिजनक वीडियो काफी हद तक फिल्टर हो जाते हैं।

Restricted Mode एक्टिव करने के लिए यूजर को YouTube ऐप में जाकर ऊपर प्रोफाइल आइकन पर टैप करना होता है। इसके बाद Settings > General में जाकर Restricted Mode ऑन किया जा सकता है।

हालांकि यह फीचर हर गलत वीडियो को पूरी तरह ब्लॉक नहीं कर पाता, लेकिन बच्चों के लिए काफी सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद करता है। इसी वजह से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे जरूरी फीचर मानते हैं।

छोटे बच्चों के लिए YouTube Kids ऐप को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। इस ऐप में केवल बच्चों के लिए चुना गया कंटेंट ही दिखाई देता है। यहां कार्टून, एजुकेशनल वीडियो, राइम्स और बच्चों के मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम मौजूद रहते हैं।

YouTube Kids में माता-पिता स्क्रीन टाइम लिमिट भी सेट कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि बच्चा ज्यादा समय मोबाइल इस्तेमाल कर रहा है तो ऐप अपने आप बंद हो जाएगा। इसके अलावा Search Control और Content Approval जैसे फीचर्स भी मिलते हैं, जिनकी मदद से माता-पिता तय कर सकते हैं कि बच्चा कौन से वीडियो देख सकेगा।

केवल ऐप नहीं, पूरे डिवाइस को सुरक्षित बनाना भी जरूरी

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल OTT ऐप्स में सेटिंग्स बदलना काफी नहीं होता। कई बार बच्चे ब्राउजर या दूसरे ऐप्स के जरिए भी एडल्ट कंटेंट तक पहुंच जाते हैं। इसलिए पूरे डिवाइस को सुरक्षित बनाना जरूरी हो जाता है।

Android स्मार्टफोन में Google Family Link एक बेहद उपयोगी फीचर माना जाता है। इसकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी, स्क्रीन टाइम और डाउनलोड होने वाले ऐप्स को कंट्रोल कर सकते हैं।

Apple डिवाइस में Screen Time फीचर मिलता है। इसमें कंटेंट लिमिट, ऐप लॉक और स्क्रीन टाइम कंट्रोल जैसे कई विकल्प मौजूद रहते हैं। इससे माता-पिता बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

स्मार्ट टीवी में भी Kids Mode और App Lock जैसे फीचर्स आने लगे हैं। Google TV और Android TV में अलग Kids सेक्शन मिलता है, जहां केवल बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट दिखाई देता है।

आजकल साइबर अपराध और ऑनलाइन खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार बच्चे अनजाने में गलत वेबसाइट्स या वीडियो तक पहुंच जाते हैं। इसलिए टेक्नोलॉजी कंपनियां लगातार नए सुरक्षा फीचर्स जोड़ रही हैं।

बच्चों की मानसिक सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी क्यों जरूरी बन गई

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कम उम्र में एडल्ट कंटेंट देखने से बच्चों के व्यवहार और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है। हिंसक या संवेदनशील वीडियो बच्चों के मन में डर, तनाव और गलत सोच पैदा कर सकते हैं।

इसी वजह से अब डिजिटल पैरेंटिंग को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केवल तकनीक पर निर्भर रहना काफी नहीं है, बल्कि माता-पिता को बच्चों से खुलकर बातचीत भी करनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने के सही तरीके समझाना बेहद जरूरी है। यदि बच्चा किसी गलत वीडियो या वेबसाइट पर पहुंच जाए तो उसे डराने के बजाय समझाना चाहिए।

डिजिटल दुनिया तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में ऑनलाइन कंटेंट और ज्यादा बढ़ने वाला है। ऐसे में पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स, स्क्रीन टाइम लिमिट और जागरूकता ही बच्चों को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत तरीका माने जा रहे हैं।

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