‘राहुल गांधी भगवान राम जैसे हैं?’ कांग्रेस नेता के बयान से मचा सियासी भूचाल, बीजेपी बोली– हिंदू आस्था का खुला अपमान



राहुल गांधी को भगवान राम से जोड़ने वाले कांग्रेस नेता नाना पटोले के बयान पर बीजेपी भड़की, हिंदू आस्था के अपमान का आरोप।


कांग्रेस नेता के बयान से शुरू हुआ नया सियासी तूफान

भारतीय राजनीति में बयानबाज़ी अक्सर सीमाएं लांघती दिखती है, लेकिन जब बात धार्मिक आस्था और आस्थावान करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ जाए, तो विवाद का दायरा और गहराता चला जाता है। ऐसा ही एक मामला तब सामने आया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने सार्वजनिक मंच से यह कहते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया कि Rahul Gandhi दलितों, वंचितों और कमजोर वर्गों के लिए काम कर रहे हैं और यह वही कार्य है, जो भगवान राम ने किया था। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और बयान ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक आग पकड़ ली।

बयान में भगवान राम और राहुल गांधी की तुलना

नाना पटोले के बयान का मूल भाव यह था कि जिस तरह भगवान राम ने समाज में न्याय, मर्यादा और करुणा का संदेश दिया, उसी तरह राहुल गांधी आज के दौर में शोषितों और वंचितों की आवाज़ बनकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब कभी राहुल गांधी अयोध्या जाएंगे, तो वह पूजा-अर्चना करेंगे और भगवान राम के चरणों में नमन करेंगे। पटोले के अनुसार, कांग्रेस की राजनीति का मूल विचार सामाजिक न्याय और इंसानियत पर आधारित है और राहुल गांधी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

राजीव गांधी और मंदिर गेट खोलने का जिक्र

अपने बयान को मजबूत करने के लिए नाना पटोले ने दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब रामलला के दर्शन के लिए मंदिर के गेट बंद थे, तब राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का निर्णय लिया था। पटोले का दावा था कि कांग्रेस का इतिहास मंदिर विरोधी नहीं रहा है, बल्कि पार्टी ने हमेशा सभी धर्मों की आस्था का सम्मान किया है। इस बयान के जरिए उन्होंने बीजेपी के उस आरोप का जवाब देने की कोशिश की, जिसमें कांग्रेस को अक्सर हिंदू विरोधी करार दिया जाता है।

पहले भी हो चुकी है तुलना, तब भी हुआ था विवाद

यह पहली बार नहीं है जब नाना पटोले ने राहुल गांधी को भगवान राम से जोड़ने वाला बयान दिया हो। अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही एक बयान दिया था, जिसमें कहा गया था कि भगवान राम भी कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चले थे और राहुल गांधी भी उसी मार्ग पर पदयात्रा कर रहे हैं। हालांकि तब उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं कर रही है, बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नाम “R” अक्षर से शुरू होते हैं।

‘भगवान तो भगवान हैं, राहुल गांधी इंसान हैं’

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उठे विवाद पर सफाई देते हुए नाना पटोले ने कहा था कि भगवान तो भगवान हैं और राहुल गांधी एक इंसान हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि राहुल गांधी को भगवान कहना या उनकी तुलना करना कांग्रेस की आधिकारिक सोच नहीं है। पटोले ने उस समय बीजेपी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया था कि बीजेपी नेता अपने नेताओं की तुलना भगवान से करते हैं, जबकि कांग्रेस ऐसा नहीं करती। इसके बावजूद, हर बार ऐसा बयान आते ही नया विवाद खड़ा हो जाता है।

बीजेपी का तीखा पलटवार

नाना पटोले के ताज़ा बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता CR Kesavan ने इसे हिंदू भावनाओं का गंभीर अपमान बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम की तुलना किसी भी जीवित राजनीतिक नेता से करना करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

‘माफ न करने लायक अपराध’

सीआर केसवन ने अपने बयान में कहा कि नाना पटोले का यह बयान माफ न करने लायक अपराध है। उनके अनुसार, भगवान राम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक मूल्यों का आधार हैं। ऐसे में उनकी तुलना किसी राजनीतिक व्यक्ति से करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह जानबूझकर की गई ऐसी हरकत है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों।

द्रौपदी मुर्मू और शुद्धिकरण टिप्पणी का जिक्र

बीजेपी प्रवक्ता ने नाना पटोले के पुराने बयानों को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि पटोले पहले भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अयोध्या राम मंदिर दर्शन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। सीआर केसवन के मुताबिक, पटोले ने उस समय मंदिर के शुद्धिकरण जैसी शर्मनाक बातें कही थीं, जो उनकी सोच को दर्शाती हैं। बीजेपी का आरोप है कि यह सब एक खास मानसिकता का परिणाम है, जो हिंदू आस्था को नीचा दिखाने का काम करती है।

राहुल गांधी के अयोध्या न जाने पर सवाल

बीजेपी ने इस विवाद के बहाने राहुल गांधी को भी घेरने की कोशिश की है। सीआर केसवन ने सवाल उठाया कि अगर राहुल गांधी वास्तव में भगवान राम के आदर्शों पर चलने का दावा करते हैं, तो वह अब तक अयोध्या क्यों नहीं गए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या नाना पटोले राहुल गांधी से यह सवाल करने की हिम्मत करेंगे कि उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा समारोह और उससे जुड़े आयोजनों का मजाक क्यों उड़ाया था।

कांग्रेस की रणनीति या व्यक्तिगत बयान?

इस पूरे विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नाना पटोले का बयान कांग्रेस की आधिकारिक रणनीति का हिस्सा है या यह उनका व्यक्तिगत विचार है। कांग्रेस पार्टी अक्सर यह कहती आई है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती है और किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रखती। हालांकि, बार-बार ऐसे बयान सामने आने से पार्टी की छवि पर असर पड़ता है और विरोधियों को हमला करने का मौका मिल जाता है।

धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल

भारतीय राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। अलग-अलग दल समय-समय पर धार्मिक भावनाओं को साधने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन जब तुलना सीधे भगवान से की जाए, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है। इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल सीमाओं के भीतर होना चाहिए या नहीं।

सोशल मीडिया पर उबाल

नाना पटोले के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोग इसे राहुल गांधी की छवि को मजबूत करने की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक भूल करार दे रहे हैं। वहीं, कई यूजर्स ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

चुनावी मौसम और बयानबाज़ी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी मौसम नजदीक आते ही इस तरह के बयान और तेज़ हो जाते हैं। हर दल अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाता है। ऐसे में धार्मिक मुद्दों पर दिए गए बयान तुरंत सुर्खियां बन जाते हैं और सियासी तापमान बढ़ा देते हैं।

कांग्रेस के लिए बढ़ती मुश्किलें

नाना पटोले के बयान ने कांग्रेस के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। एक तरफ पार्टी सामाजिक न्याय और सेकुलरिज़्म की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बयान पार्टी को कठघरे में खड़ा कर देते हैं। बीजेपी लगातार इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है और कांग्रेस से स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है।

बीजेपी का आक्रामक रुख

बीजेपी इस पूरे मामले में आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस बार-बार हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर विवादित बयान देकर समाज को बांटने का काम कर रही है। बीजेपी इसे अपने समर्थकों के बीच एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर रही है।

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