बाथरूम में मौत का साइलेंट किलर! नहाने गई थी 22 साल की टीचर, गीजर की गैस ने ले ली जान… फर्श पर मिली लाश, अमरोहा की घटना ने मचाया कोहराम



अमरोहा में बाथरूम में गीजर की गैस से दम घुटने पर 22 वर्षीय शिक्षिका की दर्दनाक मौत, वेंटिलेशन बना मौत की वजह


अमरोहा में सुबह की शुरुआत मातम में बदली

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आई यह घटना किसी चेतावनी से कम नहीं है, जहां रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला गैस गीजर एक युवा जिंदगी के लिए मौत का कारण बन गया। हसनपुर थाना क्षेत्र की राजपूत कॉलोनी में रहने वाली 22 वर्षीय शिक्षिका शिवांशी चौहान की बाथरूम में दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

रोज की तरह स्कूल जाने की तैयारी, किसी को अंदाजा नहीं था आखिरी सुबह होगी

शुक्रवार की सुबह भी बाकी दिनों की तरह ही थी। शिवांशी रोजाना की तरह स्कूल जाने की तैयारी कर रही थीं। ठंड अधिक होने के कारण उन्होंने बाथरूम में गैस गीजर चालू कर पानी गर्म किया और नहाने के लिए अंदर चली गईं। परिवार को क्या पता था कि यह साधारण सा फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा।

बाथरूम में नहीं था वेंटिलेशन, गीजर की गैस बनी जानलेवा

जिस बाथरूम में शिवांशी नहाने गई थीं, वहां वेंटिलेशन की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। जैसे ही गैस गीजर चला, धीरे-धीरे बाथरूम में जहरीली गैस भरने लगी। ऑक्सीजन की कमी और गैस के प्रभाव से शिवांशी को चक्कर आया और वह वहीं फर्श पर गिर पड़ीं। यह सब इतनी खामोशी से हुआ कि किसी को कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला।

देर तक बाहर न आने पर मां को हुई चिंता

काफी देर तक जब शिवांशी बाथरूम से बाहर नहीं आईं, तो उनकी मां को चिंता हुई। उन्होंने कई बार दरवाजा खटखटाया और आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। आशंका बढ़ते ही परिवार ने दरवाजा तोड़ा। अंदर का दृश्य देखकर सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिवांशी फर्श पर बेसुध पड़ी थीं, शरीर में कोई हरकत नहीं थी।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही बुझ चुकी थी जिंदगी

परिजन बिना समय गंवाए शिवांशी को नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटी को कुछ घंटे पहले स्कूल जाते देखने की तैयारी हो रही थी, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।

खुद के डीपीएस स्कूल में पढ़ाती थीं शिवांशी

शिवांशी चौहान अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के देहरा मिलक गांव में स्थित अपने ही डीपीएस स्कूल में शिक्षिका थीं। कम उम्र में ही उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली थी। छात्र उन्हें बेहद पसंद करते थे और स्कूल स्टाफ भी उनके व्यवहार और मेहनत की तारीफ करता था।

सरकारी टीचर बनने का सपना अधूरा रह गया

प्राइवेट स्कूल में नौकरी के साथ-साथ शिवांशी सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी भी कर रही थीं। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थीं और परिवार को भरोसा था कि जल्द ही वह सरकारी नौकरी हासिल कर लेंगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

पिता की मौत के बाद संभाली थी जिम्मेदारियां

कुछ समय पहले ही शिवांशी के पिता का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियां काफी हद तक उन्हीं पर आ गई थीं। वह तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थीं। पढ़ाई, नौकरी और घर—तीनों मोर्चों पर वह मजबूती से खड़ी थीं।

बड़ी बहन के जाने से टूटा पूरा परिवार

शिवांशी की मौत के बाद छोटे भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां बार-बार बेहोश हो जा रही हैं और परिवार के लोग उन्हें संभालने में लगे हुए हैं। मोहल्ले में मातम का माहौल है और हर आंख नम है।

बिना पोस्टमार्टम के किया गया अंतिम संस्कार

परिजनों ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से इनकार करते हुए शिवांशी का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस का कहना है कि उन्हें थाने में इस संबंध में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी।

गीजर से होने वाली मौतें: एक अनदेखा खतरा

यह घटना एक बार फिर गीजर से होने वाली मौतों के खतरे को उजागर करती है। सर्दियों में गैस गीजर का इस्तेमाल आम है, लेकिन वेंटिलेशन न होने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकता है। कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैस बिना गंध के शरीर को नुकसान पहुंचाती है और व्यक्ति को संभलने का मौका तक नहीं देती।

घरों में सुरक्षा को लेकर लापरवाही पड़ रही भारी

अक्सर लोग बाथरूम में गीजर लगाते वक्त वेंटिलेशन पर ध्यान नहीं देते। छोटी सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। शिवांशी की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने घरों में सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लेते हैं।

मोहल्ले और स्कूल में पसरा सन्नाटा

घटना के बाद शिवांशी के स्कूल में भी शोक की लहर है। छात्रों और शिक्षकों को यकीन नहीं हो रहा कि उनकी प्रिय टीचर अब कभी क्लास में नहीं आएंगी। मोहल्ले में हर कोई इस हादसे से स्तब्ध है।

सर्दियों में बढ़ रहे ऐसे हादसे

हर साल ठंड के मौसम में गीजर, अंगीठी और हीटर से जुड़ी घटनाएं सामने आती हैं। इसके बावजूद लोग सावधानी नहीं बरतते। शिवांशी की मौत एक चेतावनी है कि सुरक्षा को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।

एक होनहार जिंदगी यूं ही बुझ गई

22 साल की उम्र में जहां सपने उड़ान भरते हैं, वहां शिवांशी की जिंदगी थम गई। एक होनहार शिक्षिका, एक जिम्मेदार बेटी और एक संघर्षशील युवा का इस तरह चले जाना पूरे समाज के लिए सोचने का विषय है।

अमरोहा की घटना ने छोड़ा कई सवाल

यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि उन तमाम घरों के लिए चेतावनी है जहां गैस गीजर बिना वेंटिलेशन के इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाएगा या फिर अगली खबर किसी और घर के मातम की होगी।

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