दिल्ली ब्लास्ट का मास्टरमाइंड डॉक्टर निकला जैश का आतंकी, पुलवामा में घर पर चला बुलडोजर: जानिए कैसे दो साल से रच रहा था साजिश



दिल्ली ब्लास्ट में 13 मौतों के बाद पुलवामा के आतंकी डॉक्टर उमर का घर ढहाया गया, जांच में दो साल पुरानी साजिश का खुलासा हुआ।


पुलवामा के डॉक्टर की पहचान बनी राष्ट्रीय खतरा

दिल्ली में 11 नवंबर की शाम जब लाल किले के पास एक तेज धमाका हुआ, तब शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि इस हादसे की कड़ियां देश की सीमाओं से लगे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से जुड़ी होंगी। धमाके में 13 लोगों की मौत हुई, जिनमें निर्दोष राहगीर, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। पर जब जांच एजेंसियों ने साक्ष्य खंगाले, तो कहानी सामने आई एक ऐसे डॉक्टर की, जो सालों से इंसानियत का मुखौटा लगाकर आतंक की प्रयोगशाला में तबाही का नुस्खा तैयार कर रहा था। नाम था – डॉ. उमर मोहम्मद।

जैश-ए-मोहम्मद से सीधे जुड़ाव की पुष्टि

जांच एजेंसियों ने पुष्टि की कि डॉ. उमर मोहम्मद, आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय मॉड्यूल का हिस्सा था। यह वही संगठन है जो भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा है। बताया गया कि उमर ने न सिर्फ धमाके की योजना बनाई, बल्कि खुद ब्लास्ट के दौरान भी मौजूद था और उसी धमाके में मारा गया। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जब तक कार्रवाई शुरू की, तब तक आतंकी मॉड्यूल का मुखिया अपने अंजाम तक पहुंच चुका था, लेकिन उसके पीछे की साजिश अब साफ होती जा रही है।

दिल्ली से पुलवामा तक छापेमारी और गिरफ्तारी का सिलसिला

ब्लास्ट के अगले ही दिन देशभर में छापेमारी शुरू कर दी गई। पुलवामा के त्राल क्षेत्र में स्थित डॉ. उमर के पुश्तैनी मकान को सुरक्षा बलों ने घेर लिया। कागजी कार्रवाई के बाद उस घर को जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह घर अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहा था और इसे आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा था।

धमाके की दो साल पुरानी योजना का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर पिछले दो साल से इस धमाके की योजना बना रहा था। वह दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग ठिकानों से आतंकी नेटवर्क चला रहा था। जांच अधिकारियों को उमर के डिजिटल डिवाइस से कई इनक्रिप्टेड संदेश, मैप्स और विस्फोटकों की आपूर्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। उसकी योजना केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी; बल्कि मुंबई, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी।

मां और भाई से हुई पूछताछ, परिवार का चौंकाने वाला बयान

डॉ. उमर की गिरफ्तारी से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी, लेकिन पुलिस ने जांच के तहत उसके परिवार वालों को हिरासत में लिया। मां और भाई से लंबी पूछताछ की गई, जिसमें उसकी मां ने बताया कि उमर पिछले एक साल से कट्टरपंथी सोच का शिकार हो गया था। वो घर वालों से कई-कई दिनों तक संपर्क में नहीं रहता था। धमाके से ठीक पहले उसने परिवार को फोन न करने की हिदायत भी दी थी। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर परिवार को उमर की गतिविधियों पर शक था, तो उन्होंने पहले पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?

2900 किलो विस्फोटक बरामद, दिल्ली पुलिस का सबसे बड़ा आतंकी बरामदी ऑपरेशन

उमर की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस को अहम सुराग मिले थे। उमर की गैंग के कुछ सदस्यों को फरीदाबाद और गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने एक गोदाम से करीब 2900 किलो विस्फोटक बरामद किया। यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकी विस्फोटक जब्ती ऑपरेशन था, जिससे यह साफ हो गया कि धमाका अगर पूरी तरह से अंजाम पा लेता, तो नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

मेडिकल डिग्री की आड़ में आतंक का तानाबाना

डॉ. उमर पेशे से MBBS डॉक्टर था। वह जम्मू-कश्मीर में एक निजी अस्पताल में कार्यरत रहा और बाद में दिल्ली के एक क्लिनिक में भी उसने सेवाएं दीं। लेकिन ये महज उसका नकाब था। जांच एजेंसियों का दावा है कि डॉक्टर की डिग्री और सामाजिक प्रतिष्ठा का फायदा उठाकर उमर ने आतंक का जाल बुना, जिससे कोई उस पर शक न कर सके।

जांच एजेंसियों ने की हाई-लेवल मीटिंग

NIA, IB, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और RAW की संयुक्त मीटिंग में उमर के नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, उमर के संपर्क पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स से भी थे और उसने कई बार सीमा पार बातचीत की थी। उसके मोबाइल डेटा, वॉट्सऐप कॉल्स और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन को लेकर गहन जांच जारी है।

आतंक की नई रणनीति: पढ़े-लिखे युवा और मेडिकल प्रोफेशनल्स का इस्तेमाल

इस केस ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती पेश की है। अब आतंकवादी संगठन ऐसे युवाओं को निशाना बना रहे हैं जो पढ़े-लिखे हों और जिनका सामाजिक स्तर ऊंचा हो। डॉ. उमर इसका ज्वलंत उदाहरण है। देशभर में मेडिकल छात्रों और युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है कि कट्टरपंथी विचारधारा से कैसे बचा जाए और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय रहते सुरक्षा बलों को दी जाए।

दिल्ली पुलिस का बयान और अगला कदम

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ये महज शुरुआत है। उमर की गैंग के कई सदस्य अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होंगी और पूरे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मेट्रो स्टेशनों, भीड़भाड़ वाले इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

पुलवामा में दहशत, स्थानीय लोग डरे

उमर के घर पर चले बुलडोजर एक्शन के बाद पुलवामा में लोगों में दहशत है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनके बीच कोई इतना खतरनाक व्यक्ति छिपा बैठा था। उमर की मौत के बाद अब गांव में सन्नाटा पसरा है, लेकिन उसकी करतूतों ने पूरे कश्मीर को एक बार फिर आतंक की दहलीज पर ला खड़ा किया है।

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