PhD की डिग्री मिलते ही बदल गया पत्नी का रवैया, बेरोजगार कहकर करती रही अपमान… हाईकोर्ट ने पति को दिलाया तलाक


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी के अपमानजनक व्यवहार को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति को तलाक की मंजूरी दी।


PhD की डिग्री के बाद बदला पत्नी का व्यवहार, बेरोजगार कहकर पति को किया अपमान, हाईकोर्ट से मिला तलाक

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक तलाक मामले में अहम फैसला सुनाया है, जिसमें पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखा गया। कोर्ट ने माना कि पति को बेरोजगार कहकर बार-बार ताने मारना, आर्थिक तंगी के समय अनुचित मांगें करना और लगातार झगड़े करना मानसिक उत्पीड़न है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दी।

फैमिली कोर्ट का आदेश हुआ खारिज

इससे पहले फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटते हुए पति के पक्ष में आदेश दिया। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि पत्नी का व्यवहार स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता और परित्याग की श्रेणी में आता है।

पत्नी के व्यवहार पर पति का आरोप

पति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि पत्नी ने पीएचडी की डिग्री हासिल करने और एक स्कूल में प्रिंसिपल की नौकरी मिलने के बाद से उसका अपमान करना शुरू कर दिया। कोविड महामारी के दौरान जब पति की आय का स्रोत बंद हो गया था, तब पत्नी ने बेरोजगारी का ताना मारना शुरू किया। छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज और झगड़े करना भी आम हो गया था।

बेटी को पिता के खिलाफ किया

पति ने कोर्ट को यह भी बताया कि पत्नी ने उनकी बेटी को भी उनके खिलाफ कर दिया। अगस्त 2020 में पत्नी बेटी के साथ घर छोड़कर चली गई, लेकिन बेटे को छोड़ दिया। यहां तक कि पत्नी ने पत्र लिखकर यह घोषणा कर दी कि वह पति और बेटे दोनों से सारे संबंध तोड़ रही है।

दस्तावेजी सबूत और गवाही

पति ने अदालत में पत्नी द्वारा लिखे गए पत्र सहित मौखिक और दस्तावेजी सबूत पेश किए। हाईकोर्ट ने इन सबूतों की समीक्षा की और कहा कि यह साबित करता है कि पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

पत्नी की ओर से पेश नहीं हुई दलील

नोटिस जारी किए जाने के बावजूद पत्नी कोर्ट में पेश नहीं हुई और न ही उसने कोई जवाब दाखिल किया। इस कारण फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने तथ्यों का सही आकलन नहीं किया।

हिंदू विवाह अधिनियम की धाराएं

हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी का यह व्यवहार हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (आईए) और (आईबी) के तहत मानसिक क्रूरता और परित्याग की परिभाषा में आता है। इसके बाद कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का आदेश सुनाया।

तलाक मामलों में यह फैसला क्यों अहम

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मानसिक क्रूरता को केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं माना गया। पत्नी द्वारा लगातार अपमानजनक शब्द कहना, ताना मारना, अनुचित मांगें करना और जीवनसाथी की गरिमा को ठेस पहुंचाना भी क्रूरता माना गया। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को न्याय मिलना जरूरी है।

सामाजिक और कानूनी असर

इस फैसले से तलाक मामलों में मानसिक उत्पीड़न और क्रूरता की परिभाषा को और मजबूती मिली है। अब यह साफ हो गया है कि पति या पत्नी में से कोई भी अगर दूसरे की भावनाओं को बार-बार ठेस पहुंचाता है, तो इसे तलाक का वैध आधार माना जा सकता है।

यह पूरी घटना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में पारिवारिक कानून के नजरिए से एक मिसाल बन सकती है। अब अदालतें केवल शारीरिक हिंसा को ही नहीं बल्कि मानसिक यातना को भी गंभीरता से लेकर तलाक मामलों में निर्णय दे रही हैं।

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